फ्लाइट टिकट के मनमाने किराए पर लगेगी लगाम: 1 जनवरी 2027 से सरकार को दखल देने का अधिकार, बुकिंग के समय दिखाने होंगे सभी चार्ज
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नए रूल्स को 1 जनवरी 2027 से लागू कर दिया जाएगा। (AI जेनरेटेड इमेज)
बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने फ्लाइट टिकट किराए को लेकर नए एविएशन रूल्स को नोटिफाई किया है। इन नियम के लागू होने के बाद सरकार के पास खास हालातों में एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले किराए में टेम्पररी तौर पर दखल देने का अधिकार होगा। भारतीय वायुयान नियम 2026 के तहत इसे 1 जनवरी 2027 से लागू कर दिया जाएगा।
सरकार का यह फैसला हवाई टिकटों की कीमतों पर कोई परमानेंट लिमिट लगाने के लिए नहीं है। सामान्य हालातों में एयरलाइंस पहले की तरह मार्केट की डिमांड टिकटों की बुकिंग और अपने ऑपरेशनल एक्सपेंस के बेस पर किराया तय कर सकेगी। नए नियम के तहत केंद्र सरकार जरुरत पड़ने पर एयरलाइंस को किराया कंट्रोल करने से जुड़े निर्देश दे सकेगी। इसके अलावा पैसेंजर्स को टिकट बुक करते समय बेस फेयर, टैक्स और दूसरे शुल्क की जानकारी भी साफ तौर पर देनी होगी।

1 जनवरी 2027 से नए एविएशन रुल्स लागू होंगे
केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम 2026 को ऑफिशियली नोटिफाई कर दिया है। इन नए रूल्स को भारतीय वायुयान एक्ट 2024 के तहत बनाया गया है। यह एक्ट पहले से लागू एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 की जगह ले चुका है।
नए रूल्स 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनके लागू होने के साथ ही एयरक्राफ्ट नियम 1937 की जगह नया सिस्टम ले लेगा। हालांकि, पुराने नियमों के तहत जारी कुछ नोटिफिकेशन्स और प्रेविजन्स को बताने के लिए नोटिफिकेशन में सेविंग्स प्रोविजन्स भी शामिल किए गए हैं।
नए एविएशन रूल्स में सबसे जरूरी बदलाव रूल्स 192 में है। इसके तहत केंद्र सरकार के पास खास हालातों में एयरलाइन टैरिफ यानी हवाई टिकट के किराए को लेकर निर्देश जारी करने का अधिकार होगा।
सरकार किन हालातों में हवाई टिकट किराए पर दखल दे सकती है?
भारतीय वायुयान नियम 2026 के रूल्स 192 के मुताबिक, केंद्र सरकार एयरलाइंस को टैरिफ रेगुलेट करने के लिए लिखित निर्देश दे सकती है। यह अधिकार सरकार को किसी खास हालात के लिए दिया गया है। जब जनता के हित के लिए दखल देना जरूरी हो।
हालांकि, नोटिफिकेशन में इन हालातों की कोई साफ लिस्ट नहीं दी गई है। इसके अलावा, सरकार कितनी मैक्सिमम कीमत तय कर सकेगी या किन हालातों में किराए पर कंट्रोल लगाया जाएगा, इसकी कोई लिमिट नही तय की गई है।
नए प्रोविजन के मुताबिक, सरकार हालातों के हिसाब से दखल दे सकती है और इसे सिर्फ एक तय समय के लिए लागू किया जा सकेगा। एयरलाइंस के लिए हर समय लागू रहने वाला किराया कंट्रोल नहीं है। सरकार को जरूरत पड़ने पर लिमिटेड समय के लिए दखल देने का अधिकार मिलेगा।

हवाई टिकटों की कीमतों पर नहीं लगेगी कोई परमानेंट लिमिट
नए रूल्स के बाद भी एयरलाइंस सामान्य हालातों में मार्केट की डिमांड के मुताबिक टिकटों की कीमतें तय कर सकेंगी। भारत में साल 1994 में एयरलाइन किराया तय करने के सिस्टम से सरकार का कंट्रोल हटा दिया गया था। इसके बाद एयरलाइंस को मार्केट की डिमांड और बिजनेस कंडीशन्स के आधार पर टिकटों की कीमत तय करने की अनुमति मिली थी।
मौजूदा समय में एयरलाइंस कई तरह के फैक्टर्स को ध्यान में रखकर किराया तय करती हैं। इनमें फ्लाइट की डिमांड, टिकट बुकिंग का समय, अवेलेबल सीटें, फ्यूल प्राइस और दूसरे ऑपरेशनल एक्सपेंस शामिल हैं।
नए रूल्स के मुताबिक, एयरलाइंस को टिकट का किराया तय करने से पहले हर बार सरकार से मंजूरी लेने की जरूरत भी नहीं होगी। हालांकि, सामान्य हालातों में सरकार रूल्स 192 के तहत दखल दे सकती है।
अब टिकट बुक करते समय दिखेंगे सभी चार्ज
नए एविएशन रूल्स में टिकट की कीमतों को लेकर ट्रांसपेरेंसी रखने पर जोर दिया गया है। नए रूल्स के मुताबिक, एयरलाइंस को टिकट की कीमत की पूरी डिटेल बतानी होगी। इसमें बेस फेयर यानी मूल किराया, सरकारी टैक्स, फीस, कैंसलेशन चार्ज और रिफंड से जुड़ी शर्तों की जानकारी शामिल होगी।
इसके अलावा टिकट बुकिंग के दौरान पैसेंजर को कुल पेमेंट अमाउंट को क्लियर दिखाना होगा। यह डिटेल टिकट पर भी उपलब्ध करानी होगी। इससे पैसेंजर समझ सकेगा कि टिकट की कुल कीमत कितना बेस फेयर है और कितना पैसा टैक्स या दूसरी सर्विसेज के लिए लिया जा रहा है।
नए रूल्स से सरकारी टैक्स और एयरलाइंस द्वारा अपनी सर्विसेज के लिए वसूली जाने वाली फीस के बीच फर्क समझ आएगा। इससे टिकट बुकिंग के दौरान एक्सट्रा चार्ज को लेकर होने वाली परेशानी कम होगी।

DGCA एयरलाइन टिकटों के किराए पर नजर रखेगा
नए रूल्स में एयरलाइन टैरिफ पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) नजर रखेगा। रूल्स के मुताबिक, जिन एयर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों पर टैरिफ फाइलिंग की कंडीशन लागू होगी, उन्हें अपने तय किराए की जानकारी DGCA के पास जमा करनी होगी।
एयरलाइंस को यह जानकारी रेगुलेटर द्वारा तय फॉर्मेट और टाइमलिमिट के मुताबिक देनी होगी। इसके साथ उन्हें अपने किराए को ऑफिशियल वेबसाइट या दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पब्लिश करना होगा। हालांकि, नए नोटिफिकेशन में टैरिफ की निगरानी का प्रोविजन तो किया गया है, लेकिन सरकार के दखल के लिए हालातों के बारे में नहीं बताया गया है।
पुराने एयरक्राफ्ट नियम 1937 के नियम 135(4) के तहत DGCA को ज्यादा किराए, प्रीडेटरी प्राइसिंग और ओलिगोपोलिस्टिक प्रैक्टिस जैसे हालातों में निर्देश जारी करने का अधिकार था। नए रूल 192 में इन आधारों को उसी तरह लिस्ट नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में एयरफेयर का मामला पहुंचने के बाद आया फैसला
यह नोटिफिकेशन ऐसे समय पर आया है, जब देश में मनमाने और ज्यादा फ्लाइट टिकट की कीमतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। 16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि नए एविएशन रूल्स को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें दो हफ्ते के अंदर पब्लिश कर दिया जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 16 नवंबर तक नोटिफाई किए गए नियम कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया था।
अब केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम 2026 को ऑफिशियल गैजेट में पब्लिश कर दिया है। यह नोटिफिकेशन 31 अक्टूबर को जारी किया गया था।

पैसेंजर को नए रूल्स से क्या फायदा होगा?
नए एविएशन रूल्स का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि खास हालातों में सरकार फैसेंजर के हितों को ध्यान में रखते हुए एयरलाइन किराए पर टेमपररी निर्देश जारी कर सकेगी। इसके अलावा, टिकट बुकिंग के दौरान सभी चार्ज की जानकारी अलग-अलग मिलने से पैसेंजर को कीमतों को समझने और दूसरी एयरलाइंस के किराए की तुलना करने में आसानी होगी।
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