IndiGo बढ़ा सकती है टिकट का किराया: महंगे फ्यूल से एयरलाइन को 1,879 करोड़ रुपए का घाटा हुआ, कंपनी CEO ने दी जानकारी
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कंपनी के CEO विली वॉल्श ने कहा कि एविएशन फ्यूल की बढ़ती कीमतों को मैनेज करने के लिए किराया बढ़ाना पड़ सकता है। (AI जेनरेटेड इमेज)
बिजनेस डेस्क। हवाई सफर करने वाले पैसेंजर्स को आने वाले दिनों में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। देश की खास इंडिगो (IndiGo) फ्लाइट टिकट के दाम बढ़ाने के बारे में सोच रही है। कंपनी के CEO विली वॉल्श ने जानकारी दी है कि एविएशन फ्यूल की लगातार बढ़ती कीमतों को मैनेज करने के लिए एयरलाइन को किराया बढ़ाना पड़ सकता है। कंपनी ने सितंबर 2026 की तिमाही के लिए 1,879 करोड़ रुपए का नेट लॉस बताया है।
हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इसी तिमाही के लिए कंपनी का नुकसान कम हुआ है। फिलहाल इंडिगो के ही टिकट महंगे नहीं हुए हैं, बल्कि दूसरी एयरलाइन्स के टिकट भी महंगे हुए हैं।

महंगे एविएशन फ्यूल से बढ़ा IndiGo का खर्च
इस समय IndiGo के लिए सबसे बड़ी चुनौती एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें बढ़ना है। पिछले साल के मुकाबले एयरलाइन का फ्यूल बिल 67.2% बढ़कर करीब 9,967 करोड़ रुपए हो गया है। इसकी वजह से कंपनी की ऑपरेशन कॉस्ट पर भी बढ़ गया है।
एयरलाइन ने टिकट के दाम बढ़ाकर और दूसरे तरीकों से इस एक्स्ट्रा खर्च की भरपाई करने की कोशिश की है, लेकिन कंपनी फ्यूल की बढ़ी कॉस्ट का सिर्फ लगभग 60% हिस्सा रिकवर कर पाई है।
IndiGo के CEO विली वॉल्श के मुताबिक, सितंबर तिमाही में डिमांड आमतौर पर कमजोर रहती है। इसी दौरान फ्यूल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल ने भी बिजनेस पर असर ड़ाला।
कंपनी ने इन्हीं हालातों को देखते हुए अपनी कैपेसिटी और किराए को मैनेज करने की स्ट्रैटजी अपनाई है। इससे रेवेन्यू को कुछ हद तक कम किया जा सका, लेकिन बढ़ती कॉस्ट का पूरी तरह से असर कम नहीं किया जा सका।
सितंबर तिमाही में 1,879 करोड़ रुपए का नेट लॉस
IndiGo ने 30 सितंबर 2026 तिमाही के लिए 1,879 करोड़ रुपए का नेट लॉस बताया। हालांकि, यह नुकसान पिछले साल के मुकाबले इसी तिमाही के लिए 2,582 करोड़ रुपए के घाटे से कम है।
विली वॉल्श ने जानकारी दी कि कंपनी ने कॉस्ट को कंट्रोल करने और कमाई को सही रखने के लिए कई कदम उठाए। फिर भी कंपनी को तिमाही में लगभग 19 अरब रुपए का नुकसान हुआ।
पैसेंजर्स की संख्या में 4.7% की गिरावट आई
IndiGo के लिए बढ़ती कॉस्ट ही परेशानी नहीं है, बल्कि सितंबर तिमाही में पैसेंजर्स की संख्या में भी कमी आई। पिछले साल के मुकाबले इसी समय के लिए 4.7% की कमी रिकॉर्ड की गई। एविएशन सेक्टर एक्सपर्ट का कहना है कि टिकट की बढ़ती कीमतों की वजह से पैसेंजर्स की संख्या में कमी आई।

IndiGo CEO ने दिए किराया बढ़ाने के संकेत
विली वॉल्श ने कहा कि फ्यूल की बढ़ती कीमतों को लंबे समय तक किराया बढ़ाए बिना मैनेज करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि एविएशन इंडस्ट्री में करीब 47 साल बिताए हैं, लेकिन ऐसी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है।
उन्होंने कहा कि फ्यूल का खर्च तेजी से बढ़ा है और इसकी भरपाई मौजूदा किराया से करना मुश्किल है। इसलिए टिकट की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।
कोलकाता से बागडोगरा का किराया बढ़ा
फ्यूल की कीमतों के बढ़ने का असर दूसरे एयरलाइन ऑपरेटर्स और अलग-अलग रूट पर भी दिखाई दे रहा है। कई घरेलू रूट्स पर टिकट की कीमतें बढ़ी हैं।
कोलकाता से बागडोगरा के बीच एक तरफ का एवरेज किराया पहले करीब 3,500 रुपए था, जो अब बढ़कर 7,000 रुपए से ज्यादा हो गया है। यानी इस रूट पर पैसेंजर को पहले के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा पैसे खर्च करना पड़ेगा।
एक एयरलाइन अधिकारी के मुताबिक, किराया बढ़ने का असर फैमिलीज पर ज्यादा पड़ रहा है। 4 लोगों की फैमिली को पहले के मुकाबले 30,000 रुपए ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। किराया बढ़ने से बागडोगरा जाने वाली कुछ फ्लाइट्स में सीटें खाली जा रही हैं।
कोलकाता-बेंगलुरु और दिल्ली रूट पर भी महंगी हुई टिकट
किराया बढ़ने क असर दूसरे रूट पर भी देखा जा रहा है। कोलकाता से बेंगलुरु के बीच एक तरफ का एवरेज किराया 6,500 रुपए से बढ़कर लगभग 9,000 रुपए हो गया है। वहीं गुरुवार शाम को 20 नवंबर को दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का किराया अलग-अलग एयरलाइन्स में 10,000 रुपए दिखाई दिया, जो कि पहले 5,500 रुपए था।

इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में भी बढ़ोतरी
घरेलू फ्लाइट्स के साथ इंटरनेशनल रूट पर भी टिकट महंगे हुए हैं। एयरलाइन इंडस्ट्री के मुताबिक, कोलकाता से बैंकॉक के बीच आने-जाने का किराया गुरुवार को 30,000 रुपए से ज्यादा था, जो कि पिछले साल इसी समय लगभग 20,000 रुपए था।
वहीं ट्रैवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TAFI) के ईस्ट जोन के चेयरमैन अनिल पंजाबी ने कहा कि घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह की फ्लाइट्स में ऑफ-सीजन में ही टिकट का किराया उतना ज्यादा है, जितना कि पीक सीजन में देखने को मिलता था।
उन्होंने कहा कि महंगी फ्लाइट टिकटों का असर इस त्योहारी सीजन पर भी पड़ा है। बड़ी फैमिली और ग्रुप पैसेंजर ट्रेन से जाना पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट ट्रैवल में भी गिरावट आई है। IndiGo की कॉस्ट बढ़ने की एक वजह भारतीय रुपए में गिरावट आना भी है। दरअसल कंपनी के कई खर्च डॉलर में होते हैं। विली वॉल्श ने कहा कि कंपनी के नॉन-फ्यूल खर्चों का लगभग 50 से 60% हिस्सा अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से एयरलाइन के कुल खर्च पर दबाव पड़ता है।
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