महाराष्ट्र में फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट लागू होते ही 2 FIR: UP और ब्रिटेन के नागरिक पर आरोप; पुणे पुलिस का एक्शन
Published:
2 min read

महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 1 अगस्त से लागू हुआ है। यह कानून जबरदस्ती, लालच, धमकी और दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है। (AI image)
नेशनल डेस्क. महाराष्ट्र में नए फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट (Freedom of Religion Act) लागू होने के बाद पहली FIR दर्ज की गई हैं। पुणे शहर पुलिस ने इस कानून के तहत दो मामले दर्ज किए हैं।
पहली FIR 5 अगस्त को उत्तर प्रदेश के एक 22 साल के युवक पर दर्ज की गई है। उस पर आरोप है कि उसने एक नाबालिग लड़की को अपना धर्म बदलने के दवाब डाला। पीड़िता नाबालिग भी है, इसलिए आरोपी के खिलाफ POCSO के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
UP के 22 साल के युवक पर आरोप
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी और नाबालिग उत्तर प्रदेश के एक ही गांव के रहने वाले हैं। दोनों की पहचान हुई और बाद में वे कर्नाटक और वहां से फिर पुणे आ गए। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने नाबालिग से धर्म बदलने के लिए कहा था। नए कानून के तहत नाबालिग से जुड़े क्राइम के लिए 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
UK के नागरिक ने बिना मंजूरी धार्मिक कार्यक्रम किए
दूसरे केस में पुणे पुलिस ने UK के नागरिक के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रार्थना सभाओं और अन्य धार्मिक आयोजनों में शामिल हुआ था और कथित तौर पर लोगों को दूसरा धर्म अपनाने के लिए उकसा रहा था। पुलिस ने कहा- उसे जरूरी मंजूरी के बिना धर्म का प्रचार करने या धार्मिक प्रवचन देने की इजाजत नहीं थी।
फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट क्या है
महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 1 अगस्त से लागू हुआ है। यह कानून जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच, गलत जानकारी देने, बल प्रयोग, धमकी और दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है। इसमें शादी या शादी के वादे से जुड़े धर्म परिवर्तन के बारे में भी प्रावधान हैं।

