नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया: बालेन शाह के बयान पर विपक्षी नेता और पूर्व राजदूत नाराज; कहा- अपने दावों पर सबूत पेश करें PM
Published: Updated:
4 min read

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की संसद में पहली स्पीच के बाद कई विपक्षी नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है।
इंटरनेशनल डेस्क। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने एक बयान को लेकर घरेलू राजनीति में घिर गए हैं। संसद में पहली बार स्पीच के दौरान उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। शाह के इस बयान के बाद नेपाल की सियासत में भूचाल आ गया। विपक्षी पार्टियों, पूर्व डिप्लोमेट्स और सीमा मामलों के जानकारों ने प्रधानमंत्री से उनके दावे के सबूत मांगे हैं। मामला इतना बढ़ गया कि सरकार को बाद में सफाई तक जारी करनी पड़ी।
संसद में क्या बोले बालेन शाह
35 वर्षीय बालेन शाह ने संसद में कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनके मुताबिक दोनों देशों की ओर से सीमा विवाद मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल को दोस्त की तरह बैठकर इतिहासकारों, सर्वे एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों की मदद से सीमा विवाद का समाधान निकालना चाहिए। शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने इस मुद्दे को चीन और ब्रिटेन के सामने भी उठाया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि नेपाल ने कथित तौर पर भारत की कौन-सी जमीन पर कब्जा किया है।

विपक्षी नेताओं और पूर्व राजदूतों ने उठाए सवाल
प्रधानमंत्री के बयान के तुरंत बाद नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने विरोध जताया। विपक्षी सांसदों ने मांग की कि या तो प्रधानमंत्री अपने दावे के सबूत पेश करें या फिर बयान वापस लें। भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने कहा कि भारतीय क्षेत्र पर नेपाली कब्जे को लेकर सरकारी स्तर पर कोई जानकारी या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद का करीब 97% मसला पहले ही सुलझाया जा चुका है।

सरकार को देनी पड़ी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री का इशारा सीमा के नो-मैन्स लैंड और क्रॉस-बॉर्डर इस्तेमालज की तरफ था। मंत्रालय के मुताबिक कुछ इलाकों में नेपाल के नागरिक भारतीय सीमा के भीतर की जमीन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ भारतीय नागरिक नेपाल की जमीन का इस्तेमाल करते हैं। यह स्थिति सीमा निर्धारण और नदी आधारित सीमाओं के कारण बनी है। मंत्रालय ने साफ किया कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित क्षेत्रों पर नेपाल की ऑफिशियल पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
भारत और नेपाल के बीच क्या विवाद है
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है, जिसकी बुनियाद 1816 की सुगौली संधि पर टिकी है। हालांकि, कालापानी, लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और सुस्ता जैसे कुछ क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जबकि भारत इन्हें उत्तराखंड का हिस्सा मानता है। भारत का रुख रहा है कि सभी विवादों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए।

क्यों अहम है यह बयान
बालेन शाह का बयान ऐसे समय आया है जब भारत और नेपाल के रिश्तों में बैलेंस बनाने की कोशिश की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान नेपाल के पुराने डिप्लोमेटिक लाइन से अलग नजर आता है। यही वजह है कि विपक्ष और पूर्व अफसरों ने इसे भविष्य में होने वाली भारत-नेपाल वार्ता के लिए नुकसानदेह बताया है। फिलहाल नेपाल सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है।

