Yo-Yo टेस्ट ने गंभीर-सहवाग-युवराज को बाहर किया था: पूर्व क्रिकेटर का दावा- अब रोहित को रोकने के लिए Bronco टेस्ट लाए, उन्हें वर्ल्ड कप में नहीं खिलाना
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38 साल के रोहित शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल के साथ टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया है। वे अब सिर्फ वनडे खेल रहे हैं। अगला वर्ल्ड कप खेलना और जीतना ही उनका सपना है। (सोशल मीडिया)
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के फिटनेस टेस्ट में Yo-Yo के अलावा ब्रोंको (bronco) टेस्ट भी शामिल कर लिया है। टीम में एंट्री के लिए खिलाड़ियों को अब यह ब्रोंको टेस्ट भी पास करना होगा। इसी बीच पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने एक दावा किया है। उन्होंने कहा कि 38 साल के रोहित शर्मा को बाहर करने के लिए यह टेस्ट लाए हैं। BCCI रोहित को 2027 वनडे वर्ल्ड कप नहीं खिलाना चाहता।
ब्रोंको टेस्ट रग्बी प्लेयर्स के लिए मेंडेटरी है, हालांकि अब इसे टीम इंडिया के लिए भी अमल में लाया जा रहा है। इसे लाने का फैसला हेड कोच गौतम गंभीर और स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन लेरू ने लिया है। इस टेस्ट का मकसद प्लेयर्स की फिटनेस को और बेहतर बनाना है।
रग्बी से इंस्पिरेशन
ब्रोंको टेस्ट में खिलाड़ी को 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर रनिंग करनी होती है। ये तीनों मिलाकर एक सेट बनता है। प्लेयर को ऐसे 5 सेट लगातार यानी बिना रुके दौड़ने होते हैं। कुल मिलाकर 1200 मीटर की रनिंग होती है। इसे 6 मिनट में पूरा करना होता है।
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में मंत्री मनोज तिवारी ने एक इंटरव्यू में कहा कि रोहित शर्मा यह टेस्ट पास करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में भारतीय क्रिकेट बोर्ड रोहित शर्मा के वनडे वर्ल्ड कप 2027 जीतने के सपने को तोड़ना चाहता है।
दरअसल, रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टी20 इंटरनेशनल के साथ टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया है। यह दोनों प्लेयर अब सिर्फ वनडे खेल रहे हैं और अगला वर्ल्ड कप खेलना और जीतना ही उनका सपना है। कोहली फिटनेस फ्रीक हैं और ब्रोंको टेस्ट पास कर सकते हैं। रोहित के लिए यह नहीं कहा जा सकता।
ब्रोंको टेस्ट का टारगेट रोहित शर्मा
पूर्व राइट हैंड बैटर मनोज ने कहा- “मेरा मानना है कि विराट कोहली को 2027 वर्ल्ड कप के प्लान में नहीं रखना बेहद मुश्किल है। मुझे शक है कि क्या वे रोहित को इस प्लान में शामिल करेंगे। देखिए, भारतीय क्रिकेट में क्या चल रहा है इस पर मैं बारिकी से नजर रखता हूं। मुझे विश्वास है कि कुछ दिन पहले लाए गए इस ब्रोंको टेस्ट का टारगेट रोहित शर्मा समेत वो प्लेयर हैं, जो टीम के फ्यूचर प्लान में नहीं हैं।”
“ब्रोंको टेस्ट पास करने का पैरामीटर काफी मुश्किल है, लेकिन सवाल यही है कि इसे अभी क्यों लाए? यह तभी क्यों नहीं लाए जब आपके नए कोच (गौतम गंभीर) आए थे और उनकी पहली सीरीज थी? यह किसका आइडिया है? इन सवालों के जवाब मेरे पास भी नहीं हैं। मेरी ऑब्जर्वेशन यही कहती है कि यदि रोहित शर्मा अपनी फिटनेस पर मेहनत नहीं करते हैं तो यह टेस्ट उनके लिए मुश्किल होगा। वे ब्रोंको टेस्ट की वजह से रुक (बाहर हो) सकते हैं।”
आने वाला वक्त जरूर इसका जवाब देगा
मनोज ने कहा कि Yo-Yo टेस्ट भी कई खिलाड़ियों को बाहर करने के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा- “मेरा मानना है कि यह ब्रोंको टेस्ट फिटनेस पैरामीटर को हाई रखने के लिए लाया गया है, लेकिन मुझे विश्वास है कि इसे कुछ प्लेयर्स को बाहर रखने के लिए भी लाया गया है।”
“यह ठीक वैसा ही है जैसे भारतीय टीम के लीजेंड्स गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया था। 2011 में टीम को वर्ल्ड कप जिताया। इसके बाद Yo-Yo टेस्ट आया। इसके पीछे भी बहुत सी बातें चलीं और यह मेरा ऑब्जर्वेशन है। चलो देखते हैं क्या होता है। आने वाला वक्त जरूर मुझे इसका जवाब देगा।”
Yo-Yo ब्रोंको टेस्ट फर्क
Yo-Yo टेस्ट में खिलाड़ी को रुक-रुक कर रनिंग करनी होती है। इसमें ब्रेक मिलता है। यह टेस्ट देखता है कि खिलाड़ी कितनी जल्दी थककर फिर से दौड़ने के लिए तैयार हो सकता है।
वहीं, ब्रोंको टेस्ट में कोई ब्रेक नहीं होता। प्लेयर को लगातार दौड़ना पड़ता है। यह टेस्ट खिलाड़ी का स्टेमिना और हार्ट रेट चेकर करने का बेहतरीन तरीका है।
2 किलोमीटर रनिंग तय वक्त में पूरा करनी होती है। तेज गेंदबाजों को यह रनिंग 8 मिनट 15 सेकंड में पूरी करनी होती है। दूसरी तरफ बैटर, विकेटकीपर और स्पिनर्स को यह दौड़ 8 मिनट 30 सेकंड में पूरी करनी होती है।

