भारत कभी FIFA वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं रहा: एक मौका मिला, लेकिन नहीं लिया; चीन सिर्फ 1 बार खेला
Published:
4 min read

स्पोर्ट्स डेस्क. FIFA वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 11 जून को हो गया है। फाइनल 19 जुलाई को होगा। इस बार यह टूर्नामेंट अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहा है। पहली बार किसी एक FIFA वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा 48 टीमें खेल रही हैं। भारतीय टीम इस बार भी क्वालिफाई नहीं कर सकी। देखने वाली बात यह है कि वर्ल्ड कप खेल रहे 48 में से 44 देश (US, ब्राजील, मेक्सिको और जापान हटाकर) की कुल आबादी भारत की जनसंख्या से भी कम है।
इनमें 42 देश ऐसे हैं, जिनकी पॉपुलेशन 10 करोड़ से भी कम है। जबकि देश की जनसंख्या एक करोड़ से कम है। इन 48 देश में सबसे ज्यादा पॉपुलेशन वाला देश अमेरिका ही है, जिसकी जनसंख्या करीब 34.9 करोड़ है। भारत की जनसंख्या वर्ल्ड में सबसे ज्यादा करीब 148 करोड़ है। दूसरे पर चीन है, जिसकी पॉपुलेशन करीब 141 करोड़ है। चीन एक बार 2002 में वर्ल्ड कप खेल सका है।
इस बार 23वां सीजन
दरअसल, 1930 में पहली बार फीफा वर्ल्ड कप हुआ। इसका होस्ट और चैम्पियन दोनों ही उरुग्वे था। सेंकड वर्ल्ड वॉर के चलते 1942 और 1946 में वर्ल्ड कप नहीं हो सका था। इसके बाद 1950 से लगातार यह टूर्नामेंट हर 4 साल में हो रहा है। इस बार 23वां सीजन खेला जाएगा।
भारतीय फुटबॉल टीम का गोल्डन टाइम
1950 के दशक और 1960 के शुरुआती दशक में भारतीय फुटबॉल टीम का गोल्डन टाइम था। भारतीय टीम ने इस दौरान सैयद अब्दुल रहीम की कोचिंग में 1951 और 1962 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीता था। 1956 के समर ओलंपिक में टीम चौथे नंबर पर रही थी।
भारतीय टीम अब तक FIFA वर्ल्ड कप नहीं खेल सकी है। 1950 का वर्ल्ड कप ब्राजील की मेजबानी में हुआ था। इस दौरान कई टीमों ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया था। तब इंडिया को जगह मिली थी। हालांकि भारतीय टीम ने भी खेलने की ललक नहीं दिखाई और नाम वापस ले लिया।

वर्ल्ड वॉर का असर
दरअसल, सेकंड वर्ल्ड वॉर (1939-45) के बाद दुनिया पूरी तरह सामान्य नहीं हुई थी। यूरोप में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। ज्यादातर देश आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। ऐसे में फ्रांस, तुर्की और स्कॉटलैंड ने वर्ल्ड कप 1950 खेलने से मना कर दिया था। तब भारत को एंट्री मिली थी।
फीफा वर्ल्ड कप के लिए एशियाई क्वालिफिकेशन मैच होते हैं। 1950 में म्यांमार (तब बर्मा), इंडोनेशिया और फिलीपींस ने क्वालिफिकेशन मैच नहीं खेले थे। ऐसे में इंडिया को बगैर खेले ही वर्ल्ड कप में जगह मिली थी। भारत को स्वीडन, इटली और पैराग्वे के साथ ग्रुप में रखा गया था। हालांकि बाद में इंडिया ने नाम वापस ले लिया था। 1950 वर्ल्ड कप में 16 की बजाय 13 टीम ही खेली थीं।
इंडिया के नहीं खेलने के कारण
- तब फुटबॉल वर्ल्ड कप का भारत में उतना क्रेज नहीं था।
- ऐसे में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने वर्ल्ड कप की बजाय 1951 एशियन गेम्स पर फोकस किया।
- यात्रा का खर्च बहुत ज्यादा था। तैयारी और लॉजिस्टिक व्यवस्था भी कमजोर थी।

वर्ल्ड कप खेलते तो क्या होता
यदि भारतीय टीम 1950 फीफा वर्ल्ड कप में खेलती तो शायद ट्रॉफी भले ना जीतती, लेकिन देश में फुटबॉल के प्रति जुनून बढ़ सकता था। ऐसे में हॉकी और क्रिकेट की तरह फुटबॉल का भी भारत में अच्छा भविष्य होने की उम्मीद थी। हॉकी में भारत ओलंपिक में सबसे ज्यादा 8 गोल्ड जीतने वाला देश है।
वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई का रास्ता
भारत को हमेशा ही क्वालिफायर राउंड में जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब टीम से टक्कर मिलती रही है। भारतीय फुटबॉल टीम एशियन क्वालिफायर के तीसरे राउंड में ही बड़ी मुश्किल से पहुंचती है। इसी राउंड में तीन ग्रुप होते हैं, जिसकी टॉप-2 टीमें वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करती हैं।
इस वर्ल्ड कप 2026 में एशियाई ग्रुप से 9 टीम क्वालिफाई किया है। यह टीमें ऑस्ट्रेलिया, ईरान, ईराक, जापान, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, साउथ कोरिया और उज्बेकिस्तान हैं।

21 करोड़ आबादी वाले ब्राजील ने 5 ट्रॉफी जीतीं
फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में ब्राजील ने सबसे ज्यादा 5 बार खिताब अपने नाम किए हैं। इस देश की आबादी इस समय करीब 21.36 करोड़ है। मौजूदा समय में फुटबॉल जगत में दो बड़े नाम लियोनल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं। मेसी अर्जेंटीना के रहने वाले हैं और इस देश की आबादी करीब 4.6 करोड़ है। रोनाल्डो पुर्तगाल के हैं, जहां की जनसंख्या करीब 1.04 करोड़ है।

