प्लेयर मशीन नहीं, फिट होने में टाइम लगता है: CoE पर उठे सवालों पर VVS लक्ष्मण बोले- कॅरियर में खिलाड़ियों को चोट लगती रहती है
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वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) को जल्द अजीत अगरकर की जगह नया चीफ सिलेक्टर बनाया जा सकता है। (फोटो सोर्स -@BCCI)
स्पोर्ट्स डेस्क. ज्यादातर भारतीय क्रिकेटर्स के लगातार चोटिल होने को लेकर उठ रहे सवालों पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के हेड VVS लक्ष्मण ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि किसी प्लेयर्स को चोट से उबरने में कितना टाइम लगेगा। यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। प्लेयर्स मशीन नहीं होते कि हर बार एक तय टाइम में फिट हो जाएं।
लक्ष्मण ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का काम सिर्फ चोटिल खिलाड़ियों की रिकवरी कराना नहीं है। यहां प्लेयर्स की फिटनेस, परफॉर्मेंस और ओवरऑल डेवलपमेंट पर भी काम किया जाता है।

CoE सिर्फ इंजरी ठीक करने की जगह नहीं
लक्ष्मण ने बताया कि किसी प्लेयर को चोट लगने के बाद उसकी पूरी रिकवरी पर नजर रखी जाती है। शुरुआत से लेकर मैदान पर वापसी तक उसकी प्रोग्रेस को लगातार मॉनिटर किया जाता है। प्लेयर की हालत देखकर ही उसका वर्कलोड बढ़ाया जाता है। अगर रिकवरी उम्मीद के मुताबिक नहीं होती, तो आगे की जानकारी टीम मैनेजमेंट और सिलेक्टर्स को दे दी जाती है।
उन्होंने कहा - इंजरी के लिए किसी को दोषी बताना सही नहीं है। हर प्लेयर का शरीर अलग तरह से काम करता है। किसी की रिकवरी जल्दी होती है, तो किसी को ज्यादा टाइम लग सकता है। इंजरी प्लेयर्स के कॅरियर का पार्ट है। ऐसे में CoE को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं।

बुमराह- साई सुदर्शन का उदाहरण
लक्ष्मण ने जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण देते हुए सिलेक्शन प्रोसेस को भी समझाया। उन्होंने कहा कि सिलेक्टर्स किसी प्लेयर को चुनने से पहले CoE से उसकी फिटनेस रिपोर्ट लेते हैं। यह रिपोर्ट सिलेक्शन कमेटी के प्रेसिडेंट को भेजी जाती है। इसके अलावा टीम के हेड कोच और BCCI को भी इसकी जानकारी दी जाती है।
लक्ष्मण ने कहा - अगर किसी प्लेयर के नाम के आगे स्टार लगा होता है, तो इसका मतलब होता है कि उनका खेलना फिटनेस पर डिपेंड करेगा। अगर रिकवरी स्लो होती है, तो इसकी इन्फॉर्मेशन दी जाती है। बाहर से देखने वाले लोगों को भी अपना नजरिया बदलना चाहिए। CoE की फिटनेस टीम प्लेयर्स के साथ लगातार काम कर रही है।

