FIFA वर्ल्ड कप में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट का प्लान: UEFA की वॉर्निंग- फैसला बदलो, वरना यूरोप के 55 देश FIFA का कोई टूर्नामेंट नहीं खेलेंगे; जानिए मामला
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स्पोर्ट्स डेस्क: फुटबॉल जगत में इस वक्त घमासान मचा हुआ है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन फुटबॉल (FIFA) और यूरोप की सबसे बड़ी फुटबॉल ऑर्गेनाइजेशन UEFA आमने-सामने आ गई हैं। FIFA ने अपने टूर्नामेंट में प्राइवेट इन्वेस्ट लाने का प्लान बनाया, जिसका UEFA ने विरोध किया। इस यूरोपीय संस्था ने साफ कह दिया है कि यदि FIFA ने यह प्लान वापस नहीं लिया, तो यूरोप के 55 देश वर्ल्ड कप समेत FIFA के किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेंगे।
आखिर विवाद है क्या?
पूरा मामला FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के नए प्लान से शुरू हुआ। FIFA एक नई कंपनी FIFA Forward Enterprise (FFE) बनाना चाहता है। यह कंपनी वर्ल्ड कप समेत FIFA के सभी बड़े टूर्नामेंट्स के TV राइट्स, स्पॉन्सरशिप, टिकट और लाइसेंस जैसे कमर्शियल काम संभालेगी। FIFA इस कंपनी की 20% हिस्सेदारी निजी इन्वेस्टर्स को बेचना चाहता है। इससे करीब 4.2 अरब डॉलर (करीब 36 हजार करोड़) जुटाने की योजना है।
FIFA ऐसा क्यों करना चाहता है?
FIFA का कहना है कि इस इन्वेस्ट से मिलने वाला पैसा वर्ल्ड लेवल पर फुटबॉल को आगे बढ़ाने में लगाया जाएगा। ऑर्गेनाइजेशन ने अपने 211 सदस्य देशों से कहा है कि अगर यह योजना मंजूर हो जाती है, तो हर देश को करीब 350 करोड़ तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसमें से करीब 175 करोड़ की पहली किस्त 1 जनवरी 2027 से मिल सकती है। इन्फेंटिनो का कहना है कि इससे छोटे और गरीब देशों में भी फुटबॉल को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही FIFA का खेल पर पूरा कंट्रोल पहले की तरह ही बना रहेगा।
UEFA क्यों भड़क गया?
UEFA का कहना है कि वर्ल्ड कप कोई कारोबार नहीं है, बल्कि फुटबॉल की सबसे बड़ी पहचान है। इसे निवेशकों के हाथों में नहीं सौंपा जा सकता। UEFA ने साफ शब्दों में कहा- वर्ल्ड कप बिकाऊ नहीं है। इसकी विरासत किसी भी कीमत पर निजी निवेशकों को नहीं दी जा सकती।
यूरोप के 55 देश एक साथ
UEFA अध्यक्ष अलेक्जेंडर सेफरिन की अगुआई में सभी 55 सदस्य देशों ने इस योजना का विरोध किया है। उनका कहना है कि अगर FIFA अपने फैसले से पीछे नहीं हटा, तो यूरोप की कोई भी टीम FIFA के टूर्नामेंट नहीं खेलेगी। UEFA ने यह भी कहा है कि FIFA को सिर्फ यह योजना वापस नहीं लेनी होगी, बल्कि भविष्य में भी ऐसा कदम नहीं उठाने की गारंटी देनी होगी।

FIFA पीछे हटने को तैयार नहीं
UEFA के विरोध के बावजूद FIFA अपने फैसले पर कायम है। संस्था ने अपने 211 सदस्य देशों से 19 सितंबर तक इस प्रस्ताव पर वोट करने को कहा है। FIFA का मानना है कि इससे मिलने वाला पैसा उन देशों तक पहुंचेगा, जहां फुटबॉल को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है।
UEFA के साथ कौन-कौन?
UEFA के अलावा इंग्लैंड फुटबॉल एसोसिएशन (FA) ने भी इस योजना का विरोध किया है। वहीं नॉर्थ अमेरिका के फुटबॉल संगठन ने भी इस मॉडल को मंजूर करने से इनकार कर दिया है। इससे FIFA पर दबाव और बढ़ गया है।

अगर समझौता नहीं हुआ तो?
अगर सितंबर में यह प्रस्ताव पास हो गया और UEFA अपने फैसले पर अड़ा रहा, तो इसका सबसे बड़ा असर वर्ल्ड कप पर पड़ेगा।
- यूरोप की बड़ी-बड़ी टीमें वर्ल्ड कप से बाहर हो सकती हैं।
- TV राइट्स और स्पॉन्सरशिप पर बड़ा असर पड़ सकता है।
- ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और प्लेयर्स को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है।
- UEFA अपने अलग इंटरनेशनल टूर्नामेंट शुरू करने या मौजूदा इवेंट को और बड़ा बनाने की दिशा में कदम उठा सकता है।
अब आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर 19 सितंबर पर है। इसी दिन तक FIFA के 211 सदस्य देशों को इस प्रस्ताव पर फैसला लेना है। अगर योजना पास हो जाती है और UEFA अपने बहिष्कार के फैसले पर कायम रहता है, तो पहली बार ऐसा वर्ल्ड कप देखने को मिल सकता है जिसमें यूरोप की बड़ी टीमें ही नहीं होंगी।
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