पिंक बॉल टेस्ट लॉटरी जैसा: स्टुअर्ट ब्रॉड ने कहा- इसमें टाइमिंग अहम, नाइट सेशन में बाॅल का सही इस्तेमाल सीखना जरूरी
Published:
3 min read

एशेज 2025-26 का दूसरा टेस्ट 4 दिसंबर से ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेला जाएगा। यह डे-नाइट पिंक बॉल टेस्ट होगा।
स्पोर्ट्स डेस्क. इंग्लैंड के पूर्व पेसर स्टुअर्ट ब्रॉड ने एशेज 2025-26 के ब्रिस्बेन पिंक-बॉल टेस्ट को लेकर अहम बात कही है। उनके मुताबिक पिंक बॉल टेस्ट काफी हद तक लॉटरी जैसा होता है। जहां हालात और टाइमिंग मैच का पूरा नतीजा बदल देते हैं। ब्रॉड ने कहा- कहा कि इंग्लैंड की जीत इस बात पर डिपेंड करेगी कि टीम पिंक बॉल को रात में कितना अच्छे से इस्तेमाल कर पाती है।
पिंक बाॅल का एक्सीपिएंस
एशेज 2025-26 का दूसरा टेस्ट 4 दिसंबर से ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेला जाएगा। यह डे-नाइट पिंक बॉल टेस्ट होगा। पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 8 विकेट से हराया था। ऐसे में इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला बेहद अहम रहेगा। ब्रॉड ने पिंक बॉल टेस्ट को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

पिंक बाॅल टेस्ट काफी अलग
ब्रॉड ने एक इंटरव्यू में कहा- पिंक बॉल टेस्ट अक्सर एक लॉटरी की तरह होता है। इसमें नतीजा काफी हद तक हालात, रोशनी और गेंद की टाइमिंग पर डिपेंड करता है। रात के वक्त जब नई पिंक बाॅल मिलती है तो गेंदबाजों के लिए विकेट लेना काफी आसान हो जाता है, क्योंकि गेंद हवा में और पिच दोनों तरह की मूवमेंट करती है।
पिंक बॉल टेस्ट में सबसे मुश्किल काम यह तय करना होता है कि नई गेंद किस समय इस्तेमाल की जाए। उनके मुताबिक- अगर टीम पहले बाॅलिंग करती है। अगर टीम पहले बल्लेबाजी करके चाय तक ऑल आउट भी हो जाए, तो भी उनके गेंदबाज रात में नई गेंद के साथ सामने वाली टीम पर दबाव बना सकते हैं। रात के वक्त गेंद ज्यादा स्विंग और सीम करती है। इससे मैच का रुख जल्दी बदल सकता है।
बैटर्स के लिए मुश्किल का सबब
ब्रॉड ने ये भी बताया कि पिंक बाॅल को खेलना बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल होता है। क्योंकि गोलाकार चमकती हुई गेंद लाइट में अलग तरह दिखती है। लाल गेंद की तरह इसमें सफेद सीम नहीं होती, बल्कि काली सीम होती है। इससे गेंद की मूवमेंट को पहचानना और भी कठिन हो जाता है। तेज गेंदबाजों की इन-स्विंग या आउट-स्विंग समझ पाना बल्लेबाजों के लिए करीब-करीब नामुमकिन जैसा हो जाता है।
इंग्लैंड पिंक बॉल में ज्यादा कमजोर
इंग्लैंड के लिए चिंता की बात यह भी है कि टीम ने अब तक खेले गए अपने तीनों पिंक बॉल टेस्ट हारे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया अपने घर में 13 में से 12 पिंक बॉल टेस्ट जीत चुका है। इससे साफ है कि ऑस्ट्रेलियाई पिंक बॉल की कंडीशन को बेहतर तरीके से समझते और इस्तेमाल करते हैं।

रात का सेशन जरुरी
ब्रॉड ने कहा- पिंक बॉल टेस्ट पूरी तरह अलग फॉर्मेट है। अगर टीम सही समय पर नई गेंद का इस्तेमाल करे और रात के सेशन में गेंदबाजी मिले तो मैच अपनी तरफ में मोड़ा जा सकता है। लेकिन अगर टाइमिंग गलत हुई तो मैच हाथ से निकल सकता है।
दूसरा मुकाबला 4 दिसंबर से
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच 5 टेस्ट मैच की एशेज सीरीज में 1-0 से कंगारू आगे हैं।
वेन्यू और शेड्यूल
1st टेस्ट 21 नवंबर - पर्थ
2nd टेस्ट 4 दिसंबर - ब्रिस्बेन
3rd टेस्ट 17 दिसंबर -एडिलेड
4th टेस्ट 26 दिसंबर - मेलबर्न
5th टेस्ट 4 जनवरी - सिडनी

