श्रेयस अय्यर ने बताया एडिलेड की सफल पारी का राज: बोले- एक साल तक तकनीक पर काम किया, पुराने बैटिंग स्टांस पर लौटा
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श्रेयस अय्यर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेले गए दूसरे वनडे में 61 रन की पारी खेली। (फोटो क्रेडिट: @ShreyasIyer15)
स्पोर्ट्स डेस्क। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेले गए दूसरे वनडे में भारत को भले ही दो विकेट से हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन अय्यर की 61 रनों की पारी ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने मुश्किल परिस्थिति में टीम इंडिया को संकट से उबारा। श्रेयस की इस पारी पर जब मैच के बाद सवाल-जवाब हुए तो उन्होंने बताया कि अपनी पुरानी सीधी (upright) बैटिंग स्टांस पर वापसी की बदौलत उनकी यह फिफ्टी आई है।
एक साल तक स्टांस पर काम किया
अय्यर ने कहा कि एक साल से वह अपनी तकनीक पर काम कर रहे थे और हाल ही में उन्होंने फैसला किया कि वह फिर से अपनी पुरानी अपराइट स्टांस पर बल्लेबाजी करेंगे। उन्होंने बताया कि जब पिच पर गेंद थोड़ी ज्यादा उछलती है, तो सीधा खड़े होकर खेलने से बैलेंस और टाइमिंग दोनों बेहतर रहते हैं। अय्यर ने कहा- मैंने अपने कोच के साथ मिलकर इस पर काम किया और अब यह स्टांस मुझ पर खूब सूट कर रहा है।
अय्यर ने कहा- हर विकेट और हर देश की पिच अलग होती है। इसलिए बल्लेबाज को भी हालात के हिसाब से खुद को बदलना पड़ता है। मुंबई में जब हम लाल मिट्टी की विकेट पर खेलते हैं, जहां गेंद ज्यादा उछलती है, तो अपराइट स्टांस काफी मदद करता है। मैंने कई बार अपना स्टांस बदला है और अब लगता है कि मैं हर तरह की पिच पर ढल सकता हूं।
रोहित और अय्यर के बीच पार्टनरशिप
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड मैच में अय्यर और रोहित के बीच 118 रन की अहम साझेदारी हुई। अय्यर ने बताया कि उनकी कोशिश थी कि विकेट मुश्किल होने के बावजूद रन बनाए जाएं और स्ट्राइक रोटेट करते रहें।
दूसरी पारी में बैटिंग आसान थी
अय्यर ने माना कि दूसरी पारी में विकेट बल्लेबाजी के लिए थोड़ा आसान हो गया था। उन्होंने युवा खिलाड़ी कूपर कॉनॉली की तारीफ करते हुए कहा कि उसने बहुत समझदारी से मैच खत्म किया। फॉर्मेट बदलने और घरेलू व इंटरनेशनल क्रिकेट को बैलेंस करने पर अय्यर ने कहा- मेरे लिए ये कोई बड़ी चुनौती नहीं है। बस लगातार फिट रहना और हालात के हिसाब से खेलना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू क्रिकेट से आत्मविश्वास मिलता है और इंडिया A सीरीज ने भी उन्हें अच्छा रिदम दिया। श्रेयस ने यह भी बताया कि अब वह वर्कलोड मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा- टेस्ट क्रिकेट में जब लंबे समय तक फील्डिंग करनी पड़ती है, तो एनर्जी कम हो जाती है। मैंने सीखा है कि हर फॉर्मेट में इंटेंसिटी बनाए रखना कितना जरूरी है।
मेरी कोशिश हर मैच में रन बनाऊं
आखिर में अय्यर ने बताया कि डोमेस्टिक क्रिकेट में अच्छा परफॉर्मेंस करने से उन्हे इंटरनेशनल लेवल पर खेलने का एक विश्वास मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरी कोशिश यही है कि मैं टीम इंडिया के लिए हर मैच में रन बनाऊं।

