सत्य साईं बाबा की किताब ने मुझे पॉजिटिव रखा: सचिन बोले- 2011 वर्ल्ड कप जीत सुनहरा पल
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सचिन तेंदुलकर ने 2011 के क्रिकेट वर्ल्ड कप से जुड़ी अपनी कुछ निजी और यादगार बातें साझा किया और किस तरह सत्य साईं बाबा” द्वारा भेजी गई एक किताब ने उनके मन को पॉजिटिव रखा।
स्पोर्ट्स डेस्क. पुट्टपर्थी आंध्र प्रदेश में एक फंक्शन में भारत रत्न और पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप से जुड़ी अपनी खास यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे सत्य साई बाबा द्वारा भेजी गई एक किताब से उन्हें उस समय गहरी शक्ति, भरोसा और इंस्पिरेशन मिला।
सत्य साईं के कार्यक्रम में पहुंचे थे सचिन
तेंदुलकर ने 2011 के क्रिकेट वर्ल्ड कप से जुड़ी अपनी कुछ निजी और यादगार बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि 2011 का वर्ल्ड कप उनके लिए कितना खास था और किस तरह सत्य साईं बाबा” द्वारा भेजी गई एक किताब ने उनके मन को पॉजिटिव रखा।

2011 की बात अलग
सचिन ने कहा- मैंने कई वर्ल्ड कप खेले, लेकिन 2011 का वर्ल्ड कप बहुत अलग था। मुझे पहले से ही महसूस हो रहा था कि यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप होगा। टीम इंडिया उस समय बेंगलुरु में कैंप कर रही थी। तभी मुझे एक फोन आया कि सत्य साईं बाबा ने मेरे लिए एक किताब भेजी है। यह सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ गई।

उस किताब से हिम्मत मिली
सचिन के मुताबिक- वह किताब मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। जैसे ही किताब अपने हाथ में ली, अंदर से एक अजीब-सा आत्मविश्वास महसूस हुआ, जैसे किसी ने मन में नई एनर्जी भर दी हो। वर्ल्ड कप के दौरान वह किताब हमेशा की साथी बन गई थी। मैं जहां भी जाता, सत्य साईं की वो किताब साथ रहती। उसे जब भी पढ़ता तो शांति और शक्ति मिलती।

वो मोमेंट नहीं भूल सकता
सचिन ने कहा- जब 2011 का वर्ल्ड कप खेलने मैदान में उतरा तो माहौल अलग था। खासकर मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ खेला गया फाइनल। यहां तो पूरी टीम जीत के इरादे से मैदान में थी। मैच रोमांचक था और पूरे देश की नजर टीवी पर जमी हुईं थीं। जब भारत ने वह मैच जीता और दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट खिताब अपने नाम किया, तो वह पल उनके जीवन का सबसे सुनहरा पल बन गया।
सचिन ने आगे कहा- अपने पूरे कॅरियर में कभी ऐसा नजारा देखने नहीं मिला था, जैसा वर्ल्ड कप जीतने के बाद देखने मिला। पूरा देश खुशी से झूम उठा था। हर गली, हर मोहल्ले में लोग जश्न मना रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे भारत एक साथ, एक दिल बनकर जश्न मना रहा हो। यह सब सिर्फ टीम की मेहनत से नहीं, बल्कि देशवासियों, शुभचिंतकों, गुरुओं और बाबा की दुआओं से संभव हुआ था।
2011 की जीत दिल के करीब
सचिन तेंदुलकर के लिए 2011 वर्ल्ड कप सिर्फ एक खेल की जीत नहीं थी, बल्कि भावनाओं, आस्था और प्रेरणा का मेल था। इसे वह कभी भूल नहीं सकते। उन्होंने कहा कि बाबा से मिला वह आशीर्वाद और वह किताब आज भी उनके दिल के बहुत करीब है।

