साउथ अफ्रीका टीम: इस क्रिकेट टीम में आरक्षण, 6 खिलाड़ियों का कोटा फिक्स; ICC ने किया था बैन
Published:
3 min read

साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम। (ICC)
क्रिकेट में आरक्षण… यह सुनकर ही अजीब लगने लगा होगा। क्या खेल में भी कभी रिजर्वेशन होता है? मगर एक देश ऐसा भी है, जिसने अपनी क्रिकेट टीम आरक्षण लागू कर रखा है। यह देश कोई और नहीं बल्कि चोकर्स कही जाने वाली साउथ अफ्रीका है।
इस देश में शुरुआत से ही रंगभेद का मामला रहा है। अश्वेत और गोरे लोगों के बीच जंग चलती रही है। अंग्रेजों ने साउथ अफ्रीका पर भी शासन किया है। उस दौरान यह विवाद काफी बढ़ गया था।
साउथ अफ्रीका में क्रिकेट की शुरुआत
इसी बीच 19वीं सदी में यहां क्रिकेट की शुरुआत हुई। 1808 में आधिकारिक तौर पर केपटाउन में एक टेस्ट खेला गया था। इसके 81 साल बाद यानी 1889 में साउथ अफ्रीका ने अपना पहला इंटरनेशनल टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला। तब यह टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम बनी।
मामला 1948 में आकर गरमा गया। जब अश्वेत लोगों का क्रिकेट समेत तमाम खेलों में वर्चस्व बढ़ने लगा तब एक नियम बना। इसके तहत नेशनल क्रिकेट टीम में अश्वेत लोगों की एंट्री पर पूरी तरह बैन लग गया। यह नियम और मामला करीब 22 साल तक चला।
1970 में ICC ने लगाया बैन
फिर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने इसमें दखल दिया। उसने 1970 में साउथ अफ्रीका टीम पर बैन लगा दिया। वह इंटरनेशनल मैच नहीं खेल सकी। यह बैन 21 साल चला। 1991 में साउथ अफ्रीका ने क्रिकेट में अपना यह रंगभेद वाला नियम बंद कर दिया।
तब ICC ने भी बैन हटा लिया। तब अफ्रीका ने पहला इंटरनेशनल मैच भारत के खिलाफ खेला था। यह वनडे मैच 10 नवंबर 1991 को कोलकाता में हुआ, जिसमें भारतीय टीम 3 विकेट से जीती थी।
2016 में लागू हुई ट्रांसफॉर्मेशन पॉलिसी
25 साल बाद 2016 में साउथ अफ्रीका क्रिकेट में औपचारिक रूप से ट्रांसफॉर्मेशन पॉलिसी लागू की गई, जो अब तक जारी है। इसके तहत कुछ नियम बनाए गए। इसके तहत साउथ अफ्रीका की प्लेइंग-11 में कम से कम 6 अश्वेत खिलाड़ी होना जरूरी है। इसमें भी 2 ब्लैक अफ्रीकन होना चाहिए। मिसाल के तौर पर फिलहाल साउथ अफ्रीकी टीम में कगिसो रबाडा और कप्तान टेम्बा बाबुमा ब्लैक अफ्रीकन हैं। इसके अलावा केशव महाराज और एडन मार्करम अफ्रीकी होते हुए भी दूसरे ओरिजन से आते हैं।
घरेलू क्रिकेट में भी यह नियम लागू है। इसमें भी हर एक फ्रेंचाइजी और स्टेट की टीम को प्लेइंग-11 में 3 ब्लैक अफ्रीकन समेत कम से कम 6 अश्वेत खिलाड़ी शामिल करना जरूरी है। इन नियमों का पालन नहीं करने पर सजा मिलेगी।
साउथ अफ्रीकन क्रिकेट में ट्रांसफॉर्मेशन पॉलिसी लागू करने का उद्देश्य समाज के सभी लोगों के लिए इस खेल को सरल बनाना है। इससे अश्वेत लोगों को ज्यादा मौके मिलते हैं। हालांकि कुछ इस नियम की आलोचना भी करते हैं। उनका मानना है कि यह आरक्षण काबिलियत को खत्म करता है। सिलेक्शन काबिलियत के आधार पर होना चाहिए ना कि रिजर्वेशन के आधार पर।

