नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई: 8 महीने के ब्रेक के बाद दोहा डायमंड लीग खेले, चौथे नंबर पर फिनिश किया
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नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में गोल्ड जीता था। इसके अगले यानी पेरिस ओलंपिक 2024 में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। (फाइल फोटो)
स्पोर्ट्स डेस्क. चोट से ठीक होने के बाद जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने दोहा डायमंड लीग 2026 से वापसी की। हालांकि नीरज इस टूर्नामेंट में चौथे नंबर पर रहे। अच्छी बात यह रही कि 28 साल के नीरज ने अपने इस प्रदर्शन के साथ ही अपकमिंग कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
8 महीने लंबे ब्रेक के बाद मैदान पर वापसी कर रहे नीरज के लिए यह मुकाबला आसान नहीं था। पीठ की चोट (Back Injury) ठीक होने के बाद यह उनका पहला कॉम्पिटिशन था।
फाउल से शुरुआत, फिर दमदार वापसी
ओलंपिक को गोल्ड मेडलिस्ट नीरज की मैच में शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। अपने पहले ही प्रयास में वो फाउल कर बैठे। तीसरे प्रयास में नीरज ने 85.69 मीटर का एक शानदार थ्रो किया। इसके बाद चौथे प्रयास में उन्होंने 83.45 मीटर का थ्रो किया। फाइनल शूटआउट (टॉप 3) में बने रहने के लिए नीरज को पांचवें प्रयास में 86 मीटर से ज्यादा का थ्रो करना था। हालांकि यह 5वां थ्रो फाउल रहा, जिसके चलते वो चौथे स्थान पर ही रह गए।
टॉप-3 में कौन आया
इस मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश पाथिरागे ने सबको चौंकाते हुए 88.68 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 86.38 मीटर थ्रो के साथ दूसरे और अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन 85.99 मीटर थ्रो के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
वैसे दोहा का यह स्टेडियम नीरज के लिए बेहद खास है। पिछले साल इसी मैदान पर उन्होंने पहली बार 90 मीटर के आंकड़े को पार किया था।
कॉमनवेल्थ गेम्स किसी ओलंपिक से कम नहीं होगा
मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए नीरज चोपड़ा ने माना कि इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है। उन्होंने कहा, "वहां हिस्सा लेने वाले कई एथलीट्स 90 मीटर या उससे ज्यादा का थ्रो फेंक चुके हैं। ऐसे में कॉमनवेल्थ गेम्स में कॉम्पिटिशन किसी ओलंपिक या वर्ल्ड चैम्पियनशिप से कम नहीं होगा।"
दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल दोहा में फेंके गए अपने ऐतिहासिक 90 मीटर के थ्रो पर नीरज ने कहा कि वो थ्रो टेक्निकली उतना अच्छा नहीं था। उन्होंने हंसते हुए समझाया, "उस थ्रो में हाथ की रफ्तार बहुत तेज थी, लेकिन अगर मैंने अपने लोअर बॉडी का सही इस्तेमाल किया होता, तो भाला 2-3 मीटर और आगे जा सकता था।"

