रैना ने धोनी के साथ संन्यास लेने की वजह बताई: बोले- परिवार के साथ वक्त बिताना था, माही ने मेरे लिए अपनी बैटिंग पोजिशन बदल दी थी
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एमएस धोनी को प्यार से “थाला” और सुरेश रैना को “चिन्ना थाला” कहते हैं। दोनों ने भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर को मजबूत किया और धोनी की कप्तानी में 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे।
स्पोर्ट्स डेस्क। पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने खुलासा किया है कि उन्होंने एमएस धोनी के साथ ही 15 अगस्त 2020 को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास क्यों लिया था। दोनों ने भारतीय टीम के अलावा चेन्नई सुपर किंग्स के लिए भी एक दशक से ज्यादा समय तक साथ क्रिकेट खेला।
15 अगस्त 2020 को धोनी ने शाम 7:29 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। इसके कुछ ही देर बाद रैना ने भी संन्यास की घोषणा कर दी।
रैना ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा से बातचीत में बताया कि जब उन्होंने धोनी को बताया कि वह भी उसी दिन क्रिकेट को अलविदा कहने वाले हैं, तो माही को यकीन ही नहीं हुआ। धोनी ने उनसे कहा था, ‘ये क्या किया तूने?’
परिवार के साथ समय बिताना चाहते थे रैना
रैना ने बताया कि देश के लिए खेलना किसी भी क्रिकेटर के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। इसके लिए खिलाड़ी के साथ उसका परिवार भी कई तरह के त्याग करता है। लेकिन उस समय उन्हें लगा कि अब परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने का वक्त आ गया है। रैना ने कहा कि उस समय उनकी उम्र करीब 32-33 साल थी। उनके लिए संन्यास का फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि उस वक्त यही सही फैसला है।
उनके मुताबिक, क्रिकेटर अपने कॅरियर में बहुत कुछ हासिल करना चाहता है, लेकिन एक समय ऐसा भी आता है जब परिवार और अपनी जिंदगी के लिए समय निकालना जरूरी हो जाता है।
IPL के लिए UAE जाने की तैयारी कर रहे थे दोनों
जब धोनी और रैना ने संन्यास का ऐलान किया, उस समय दोनों CSK के बायो-बबल में थे। दोनों UAE जाने की तैयारी कर रहे थे, जहां 2020 का IPL खेला जाना था। कोरोना महामारी के कारण उस साल IPL सितंबर से नवंबर के बीच UAE में आयोजित किया गया था। इसी दौरान दोनों ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया।
धोनी ने रैना के लिए बदली थी बैटिंग पोजिशन
रैना ने धोनी के साथ अपनी दोस्ती और रिश्ते के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि धोनी ने कई बार टीम के हित में अपनी बैटिंग पोजिशन तक बदली, ताकि रैना को ऊपर आकर खेलने का मौका मिल सके। रैना के मुताबिक, जब सौरव गांगुली कप्तान थे, तब धोनी खुद ऊपर बल्लेबाजी करते थे। बाद में धोनी ने युवराज सिंह को ऊपर भेजा और रैना को भी बैटिंग ऑर्डर में जगह दी।
रैना ने बताया कि धोनी उनसे कहते थे, तुम ऊपर जाओ। सुरेश, तुम यहां खेलो। मैं यहां बैठता हूं।’

रैना ने कहा कि धोनी को उनकी काबिलियत पर उनसे भी ज्यादा भरोसा था। इस भरोसे ने उन्हें टीम के लिए और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह मैदान पर अपना पूरा दम लगाते थे। चाहे फील्डिंग हो या गेंदबाजी, वह हर जिम्मेदारी पूरे दिल से निभाना चाहते थे। उनके लिए यह सिर्फ क्रिकेट नहीं था, बल्कि कप्तान के भरोसे को सही साबित करने की बात भी थी।
रैना के मुताबिक, एक मुकाम के बाद इंसान हर फैसला सिर्फ दिमाग से नहीं लेता। जब किसी के साथ दिल से जुड़ाव हो जाता है, तो कई फैसले दिल से लिए जाते हैं। उनके और धोनी के बीच भी कुछ ऐसा ही रिश्ता था।

दोस्ती के लिए हमारे दिल में हमेशा जगह रहेगी
रैना ने कहा कि वह जानते हैं कि धोनी किस तरह के इंसान हैं। अगर कोई आपके लिए इतना कुछ करता है और आप पर इतना भरोसा दिखाता है, तो उसके लिए कुछ करने का जज्बा भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पैसा हर किसी के पास हो सकता है, लेकिन दूसरों के लिए खर्च करने और दिल खोलकर साथ देने के लिए बड़ा दिल चाहिए। रैना के मुताबिक, उनके और धोनी के रिश्ते में यही चीज सबसे खास रही।

