3 ICC और 5 IPL ट्रॉफी: सौरव चुपचाप उनका खेल देखने पहुंचे; टिकट कलेक्टर से ट्रॉफी कलेक्टर का सफर- माही की कहानी, कुछ खास तस्वीरों की जुबानी
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स्पोर्ट्स डेस्क. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज (7 जुलाई 2026) अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में से एक धोनी की कहानी रांची की गलियों से वर्ल्ड कप तक की है। वे भारतीय रेलवे के टिकट कलेक्टर (TC) से भारतीय क्रिकेट में ट्रॉफी कलेक्टर बने हैं।
धोनी को पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की खोज माना जा सकता है, क्योंकि वे चुपचाप माही का खेल देखने पहुंचे थे। यहीं से वे धोनी से इम्प्रेस हुए और मौका दिया। धोनी को प्यार से लोग माही और थाला भी कहते हैं। उनके जीवन की कुछ ऐसी घटनाएं और कहानियां हैं, जो शायद ही कभी चर्चा में आईं? आइए जानते हैं…
धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड (पहले बिहार) की राजधानी रांची के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम पान सिंह धोनी और माता का नाम देवकी है।

धोनी की शुरुआती पढ़ाई रांची के जवाहर विद्या मंदिर से हुई। बचपन में धोनी को बैडमिंटन, टेनिस और फुटबॉल खेलना पसंद था। वे स्कूल की फुटबॉल टीम में गोलकीपर थे। क्रिकेट की शुरुआत उनके स्कूल के दिनों से ही हुई। स्कूल कोच ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें विकेटकीपिंग के लिए प्रोत्साहित किया। फिर धोनी पूरी तरह क्रिकेट में रम गए।

1999-2000 में बिहार रणजी टीम से अपने घरेलू क्रिकेट की शुरुआत की। इस बीच धोनी रेलवे में TC की नौकरी करते थे, जिसके कारण वे अपने खेल पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे। क्रिकेट खेलने के लिए धोनी ने TC की नौकरी छोड़ दी। 2003 में उन्हें इंडिया A टीम में जगह मिली। इसका भी एक दिलचस्प किस्सा है।
दरअसल, गांगुली ने खुद बताया था कि वे पूर्व विकेटकीपर सबा करीम के कहने पर धोनी का खेल देखने चुपचाप जमशेदपुर पहुंचे थे। आक्रामक बैटिंग देख उन्होंने 'इंडिया ए' टीम में धोनी को सिलेक्ट किया। गांगुली ने कहा था- मेरी कप्तानी में इंडिया-ए के लिए खेला और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शानदार सिक्स लगाते हुए सेंचुरी लगाई। इसके बाद उसे नेशनल टीम में भी सिलेक्ट किया गया।

शुरुआती दिनों की बात है। धोनी अपने दोस्तों के साथ रांची के आसपास छोटे-मोटे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने जाया करते थे। धोनी के पास जब रेलवे टिकट के पैसे नहीं थे, तब उन्होंने अपनी पुरानी नोटबुक और किताबें बेचकर टिकट के पैसे जोड़े, लेकिन इतने काफी नहीं थे।
धोनी ने हार नहीं मानी और TC से बात की, जो रांची का ही रहने वाला था। उसने धोनी को क्रिकेट खेलते देखा था। धोनी ने TC से रिक्वेस्ट किया कि उन्हें मैच के लिए जानें दें। लौटते वक्त वे पैसे चुका देंगे।

धोनी के क्रिकेट के प्रति जुनून देख TC मान गया। धोनी और उनके दोस्त उस टूर्नामेंट में गए, उन्होंने न सिर्फ टूर्नामेंट जीता, बल्कि एक छोटा इनाम भी हासिल किया। मैच के बाद धोनी रेलवे स्टेशन पहुंचे और TC को टिकट के बचे पैसे दिए और साथ ही अपनी जीती हुई ट्रॉफी भी दिखाई।
धोनी ने 23 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव वनडे से इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। पहली ही गेंद पर वे रनआउट हो गए। उस वक्त कप्तान सौरव गांगुली और सिलेक्टर्स ने उन पर भरोसा जताया।

5 अप्रैल 2005 को विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे में धोनी ने नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए 123 गेंदों पर 148 रन बनाए। इस इनिंग में 15 चौके और 4 छक्के शामिल थे। इस पारी ने धोनी को रातों रात स्टार बना दिया। धोनी ने 2 दिसंबर 2005 को चेन्नई में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया। इस मैच में धोनी ने सिर्फ 30 रन बनाए, लेकिन उनकी विकेटकीपिंग कमाल रही।

2007 वनडे वर्ल्ड कप में भारत की हार के बाद बवाल मच गया। टीम इंडिया ग्रुप स्टेज में बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर बाहर हो गई। राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टीम के खराब प्रदर्शन ने प्रशंसकों को गुस्से में भर दिया। खिलाड़ियों के घर पर लोगों ने पथराव किया। मीडिया में द्रविड़ और टीम इंडिया के तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल की आलोचना हुई। BCCI पर इससे बहुत दबाव बढ़ा, ग्रेग को हटाया गया और 14 सितंबर 2007 को राहुल द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ दी।

इसके बाद धोनी को टीम का कप्तान बनाया गया। यह फैसला सीनियर खिलाड़ियों के मना करने के बाद लिया गया। पूर्व मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ने वन क्राउन नाम के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि राहुल द्रविड़ की कप्तानी छोड़ने के बाद नए कप्तान की तलाश शुरू हो गई थी।
वेंगसरकर ने पहले सचिन तेंदुलकर से बात की, लेकिन वह पहले कप्तानी कर चुके थे। अपने पुराने अनुभव का हवाला देते हुए कप्तानी से मना कर दिया। उन्होंने सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण से बात की, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया। अनिल कुंबले ने टेस्ट में कप्तानी करने के लिए हामी भरी, लेकिन वनडे और T20 के लिए कप्तान चाहिए था। सिलेक्टर्स ने धोनी पर दांव लगाया।

हालांकि कप्तानी के रेस में युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग का भी नाम सामने आया था। लेकिन BCCI ने इन दोनों को साइड करके धोनी को ही चुना। वेंगसरकर के मुताबिक, धोनी प्रतिभाशाली थे। हमें लगा कि वह इस जिम्मेदारी को संभाल सकते हैं। 2007 में माही को टी20 टीम का कप्तान बनाया। इसी साल उन्होंने टीम को 2007 T20I वर्ल्ड कप जिताया। इसके बाद उन्होंने लंबे बाल छोटे करा लिए थे।

टीम इंडिया ने कपिल देव की कप्तानी में 1983 में पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीता था। दूसरा खिताब जीतने के लिए टीम इंडिया को 28 साल इंतजार करना पड़ा। 2011 में धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम दोबारा वर्ल्ड चैम्पियन बनी।

पूरे वर्ल्ड कप में धोनी का बल्ला खामोश था। हालांकि, फाइनल में उन्होंने 91 रन की मैच विनिंग पारी खेल जीत दिलाई। फाइनल में श्रीलंकाई बॉलर कुलशेखरा को मारा गया धोनी का सिक्स कौन भूल सकता है। माही ने मन्नत मांगी थी कि वर्ल्ड कप जीतने के बाद सिर मुंडवा लेंगे। 2011 वर्ल्ड कप जीतने के दूसरे दिन ही धोनी ने सिर मुंडवा लिया।
धोनी की कप्तानी में ही भारतीय टीम ने 2013 में ICC चैम्पियंस ट्रॉफी भी जीती। इस तरह माही ICC की तीनों ट्रॉफी जीतने वाले पहले कप्तान बने।


धोनी और साक्षी की शादी की इनसाइड स्टोरी
धोनी और उनकी पत्नी साक्षी एकदूसरे को बचपन से ही जानते थे। दोनों के पिता एक कंपनी में साथ काम करते थे। दोनों परिवार के बीच अच्छे संबंध थे। धोनी और साक्षी स्कूल में साथ ही पढ़ते थे।
साक्षी माही से 7 साल छोटी थीं, जिसकी वजह से दोनों एक दूसरे से शुरुआती दौर में मिल नहीं पाए। बाद में साक्षी के पिता का ट्रांसफर हो गया। दोनों परिवारों के बीच मिलना जुलना कम हो गया।

2007 में कोलकाता के ताज बंगाल होटल में साक्षी होटल मैनेजमेंट की इंटर्नशिप कर रही थीं। वहां उनकी मुलाकात धोनी से हुई। साक्षी को क्रिकेट में दिलचस्पी नहीं थी। धोनी ने अपने दोस्त की मदद से साक्षी का नंबर लिया, पहले तो साक्षी को भरोसा नहीं हुआ। बाद में धोनी के प्रयासों के बाद 2008 में डेटिंग शुरू की और दो साल तक अपना रिलेशनशिप प्राइवेट रखा।

साक्षी की पढ़ाई पूरी होने के बाद 4 जुलाई 2010 को देहरादून में दोनों ने गुपचुप शादी कर ली। इस शादी में उनके परिवार और करीबी लोग ही शामिल हुए। 6 फरवरी 2015 को उनकी बेटी जीवा का जन्म हुआ।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक धोनी की कुल संपत्ति 1050 करोड़ रुपए के आस-पास है। उनके पास रांची में एक फार्म हाउस है, जिसका नाम कैलाशपति है। 7 एकड़ में फैले इस आलीशान फार्म हाउस की कीमत तकरीबन 6 करोड़ है। इसमें सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे जिम, स्विमिंग पूल, क्रिकेट नेट प्रैक्टिस फील्ड, इंडोर स्टेडियम और बगीचा। इसके अलावा देहरादून में भी एक शानदार घर है, जिसकी कीमत 17.।8 करोड़ रुपए है।
फार्मिंग: धोनी अपने फार्म हाउस में ऑर्गेनिक खेती करते हैं। इसमें वह स्ट्रॉबेरी, पपीता, टमाटर और भिंडी लगाते हैं। वे केवल जैविक खाद का ही उपयोग करते हैं। धोनी सोशल मीडिया पर ट्रैक्टर चलाते और पेड़-पौधों की देखभाल करते हुए दिखते हैं। इन सभी कामों में साक्षी उनका पूरा साथ देती हैं।

बिजनेस: धोनी की कंपनी धोनी स्पोर्ट्स मैनेजमेंट नए खिलाड़ियों को सपोर्ट करती है। रांची में धोनी की माही रेजीडेंसी नाम का प्रीमियम होटल है। सेवन एक लाइफस्टाइल ब्रांड है, जिसे 2016 में धोनी और रिति ग्रुप ने लॉन्च किया। यह स्पोर्ट्सवेयर, फुटवियर और एक्सेसरीज बनाता है।

कार और बाइक कलेक्शन: धोनी को बाइक से बहुत गहरा लगाव है। उनके पास 70 से अधिक बाइक हैं, जिनमें हार्ले-डेविडसन फैट बॉय, कॉन्फेडरेट हेलकैट X132, डुकाटी 1098 और कावासाकी निंजा शामिल हैं। इनके लिए उन्होंने एक अलग गैराज बना रखा है। बाइक के साथ धोनी के पास कारों का भी काफी कलेक्शन है। इनमें फरारी 599 GTO, रोल्स रॉयस सिल्वर शैडो, हमर H2, ऑडी Q7 और ग्रैंड चेरोकी जैसी गाड़ियां हैं। एक बार विराट कोहली भी धोनी का यह कलेक्शन देखने पहुंचे थे।

IPL के पहले सीजन के सबसे महंगे खिलाड़ी: IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) के पहले सीजन 2008 के सबसे महंगे खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी थे। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने उन्हें 6 करोड़ रुपए में खरीदा था। धोनी उस समय भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में से एक थे। वर्ल्ड टी-20 जिताने के बाद वे फ्रेंचाइजियों की पहली पसंद बन गए थे।

नोट- सभी फोटोज सोशल मीडिया, BCCI और ANI से लिए गए हैं।

