मेसी को किडनैप कर लो...: दादी, VHS टेप और फोन कॉल; कैसे स्पेन के बजाए अर्जेंटीना के लिए खेले मेसी- कहानी अनजानी...
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messi in fifa world cup 2026 @ rajexpress.com
स्पोर्ट्स डेस्क. लियोनेल मेसी (Messi) नंबर 1 फुटबॉलर... उन्होंने अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप जिताया, कई बैलन डी'ऑर जीते और बार्सिलोना के साथ अनगिनत ट्रॉफियां उठाईं। लेकिन अब रुकिए....हमारे पास भी मेसी की कुछ कहानियां हैं। और यकीनन इनके बारे में कम लोग ही जानते होंगे।
‘राज एक्सप्रेस’ के इस स्पोर्ट्स एक्सप्लेनर में आज बात इन्हीं दिलचस्प किस्से और कहानियों की....अगर आप फुटबॉल फैन हैं.....तो दिल थामकर रखिए। चलिए शुरू करते हैं....
दरअसल, एक वक्त ऐसा भी था जब यह तय नहीं था कि मेसी अर्जेंटीना के लिए खेलेंगे या स्पेन के लिए। ESPN की डॉक्यूमेंट्री Messi The Forgotten Tape के मुताबिक कि कैसे दादी का भरोसा, एक VHS टेप, स्पेन की कोशिश, एक शेफ की सलाह और आखिर में फोन डायरेक्टरी ने मेसी को अर्जेंटीना (messi in fifa world cup 2026) की जर्सी तक पहुंचाया।
दादी की पारखी निगाहें

मेसी जब अर्जेंटीना के शहर रोसारियो में बचपन गुजार रहे थे, तब उनकी नानी सेलिया ओलिवेरा कुच्चितिनी ने सबसे पहले उनकी हुनर को पहचाना। अपने इलाके के ग्रांडोली क्लब में... मेसी को सीनियर्स के साथ खेलने की परमिशन नहीं मिल रही थी, लेकिन दादी लगातार कोच से गुजारिश करती रहीं।...आखिरकार मौका मिला और मेसी ने मैदान पर उतरते ही 2 गोल कर दिए। ये एक कहानी, इतिहास और एक युग की शुरुआत थी।
इस लड़के में कुछ खास है...

बार्सिलोना की मशहूर अकादमी ला मासिया में मेसी के साथ खेलने वाले विक्टर वाज केज कहते हैं- पहले दिन से ही साफ था कि यह लड़का सबसे खास है। वहीं कोच एलेक्स गार्सिया को हैरानी होती थी कि जेरार्ड पिके और सेस्क फाब्रेगास जैसे खिलाड़ी स्पेन की जूनियर टीम में चुने जा रहे थे, लेकिन मेसी को कोई बुलावा नहीं मिल रहा था।
स्पेन की वो अधूरी हसरत....हाथ मलते रह गए

स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन मेसी पर नजर रखे हुए था। प्लानिंग ये थी कि उन्हें स्पेन की नागरिकता दिलाकर नेशनल टीम में शामिल किया जाए।
स्पेन के टीम के उस टाइम के स्पोर्टिंग डायरेक्टर गिनेस मेलेंडीज ने मजाक में कहा था- उसे किडनैप कर लो, ताकि वह स्पेन के लिए खेले। अर्जेंटीना तो कुछ कर ही नहीं रहा था।
हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया कि उनका मतलब था कि किसी तरह मेसी को मनाया जाए। स्पेन चाहता था कि मेसी खुद उनकी टीम के लिए खेलने का फैसला करें। हालांकि, कुदरत को तो कुछ और ही मंजूर था, किस्मत में यकीन करने वाले कह सकते हैं कि मेसी काे भाग्य में कुछ और ही लिखा था।
वो फोन कॉल और....आगे

मेसी (Messi) के पहले एजेंट होरासियो गागियोली के पास लगातार फोन आते थे। उनसे पूछा जाता था कि क्या मेसी स्पेन के लिए खेल सकते हैं? गागियोली का जवाब हमेशा एक ही होता था- जरूर खेल सकते हैं, लेकिन फैसला तो उसको ही यानी मेसी को ही करना होगा।
एक VHS टेप ने बदल दी पूरी कहानी

2002 में 15 साल के मेसी अर्जेंटीना में लगभग अनजान थे। तभी मेसी के पिता जॉर्ज मेसी ने कोच गागियोली से कहा- बस मेरा एक काम कर दीजिए। मेरे बेटे का एक वीडियो टेप किसी तरह अर्जेंटीना टीम तक पहुंचा दीजिए।
गागियोली बार्सिलोना द्वारा तैयार किया गया एक VHS टेप लेकर उस होटल पहुंचे, जहां अर्जेंटीना की टीम ठहरी थी। उन्होंने यह टेप कोच मार्सेलो बिएल्सा के असिस्टेंट क्लाउडियो विवास को दिया।
पहले विवास ने हाइलाइट्स देखीं, फिर पूरे मैच मंगवाए। कुछ ही देर में उन्होंने बिएल्सा से कहा- ओह माय गॉड... यह खिलाड़ी सिर्फ अच्छा नहीं, ये तो कमाल का है। बिएल्सा ने भी वीडियो देखने के बाद कहा- नहीं, यह लड़का तो गजब का खिलाड़ी है।
एक शेफ और उसका रोल

कहानी आगे बढ़ती है। यह टेप अर्जेंटीना अंडर-20 टीम के कोच ह्यूगो टोकेली तक पहुंचता है। उन्हें भी मेसी पसंद आए, लेकिन टीम पहले से तैयार थी, इसलिए किसी खिलाड़ी को बाहर करना आसान नहीं था।
फिर 2003 अंडर-17 वर्ल्ड कप के दौरान स्पेन और अर्जेंटीना की टीम डिनर पर मिलीं। इसी दौरान स्पेन के शेफ ने टोकेली से कहा-अगर तुम बार्सिलोना वाले उस लड़के को टीम में ले आओ, तो तुम्हारी टीम चैंपियन बन जाएगी।
टोकेली चौंके और पूछा- क्या तुम मेसी की बात कर रहे हो? शेफ ने जवाब दिया- तुम आप भी उसे जानते हैं? फिर भी टीम में नहीं लाए? यहीं से टोकेली ने मेसी को टीम में बुलाने का मन बना लिया।
फोन डायरेक्टरी से ढूंढा गया मेसी का घर

अब सबसे बड़ी परेशानी थी कि मेसी से संपर्क कैसे किया जाए? उस समय मोबाइल और सोशल मीडिया का दौर नहीं था। अर्जेंटीना टीम मैनेजर ओमर साउटो एक पब्लिक फोन बूथ पहुंचे। उन्होंने रोसारियो शहर की टेलीफोन डायरेक्टरी मंगाई और 'M अक्षर से शुरू होने वाले सभी Messi परिवारों के नंबर मिलाने शुरू कर दिए।
आखिरकार फोन मेसी की दादी ने उठाया। उन्होंने मेसी के चाचा का नंबर दिया, फिर वहां से पिता जॉर्ज मेसी का संपर्क मिला। जब अर्जेंटीना की तरफ से फोन पहुंचा, तो जॉर्ज मेसी ने सिर्फ एक शब्द कहा-आखिरकार...
ये न होता तो वो होता...वो नहीं...यही हुआ

बहरहाल, इन किस्सों ने तकदीर के इस खेल ने फुटबॉल का इतिहास बदल दिया।
जरा सोचिए... अगर दादी मेसी पर भरोसा न करतीं
अगर वह VHS टेप अर्जेंटीना तक न पहुंचता
अगर स्पेन का शेफ टोकेली को याद न दिलाता
और अगर फोन डायरेक्टरी में मेसी का नंबर न मिलता.. तो
आज दुनिया लियोनेल मेसी को अर्जेंटीना की नहीं, बल्कि स्पेन की जर्सी में खेलते हुए देखती। लेकिन, कहते हैं न कि...अगर कुदरत को किसी से किसी मिलाना हो तो फिर वो दुनिया के हर संयोग को ऐसा बनाती है कि जिसको जो मिलना होता है...वो मिलकर रहता है।
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