फिक्सिंग से इनकार पर दाऊद ने हमले करवाए: ललित मोदी का दावा- दाऊद के लोग IPL टीम खरीदना चाहते थे, क्रिकेट से दूरी की एक वजह यह भी
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इंडियन क्रिकेट में IPL का कॉन्सेप्ट लाने वाले ललित मोदी ही थे। वे शुरुआती तीन सीजन में लीग के कमिश्नर रहे। 2010 में IPL से जुड़े वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगने के बाद उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। इसके बाद वे विदेश चले गए और फिर भारत वापस नहीं लौटे। फाइल फोटो।
नेशनल डेस्क: IPL के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने दावा किया कि फिक्सिंग से मना करने पर दाऊद इब्राहिम ने उन पर तीन बार हमले करवाए। करोड़ों डॉलर की पेशकश की। दाऊद से जुड़े लोग IPL टीम भी खरीदना चाहते थे। 2012 में उन्होंने फोन पर दाऊद इब्राहिम की आवाज भी सुनी थी। ललित का कहना है कि क्रिकेट से दूरी बनाने की एक वजह दाऊद भी है।
फिक्सिंग न करने पर हमले हुए
ललित मोदी ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा- जब तक मैं IPL रन कर रहा था, वहां फिक्सिंग नाम की चीज भी नहीं थी। यह बात माफियाओं को पसंद नहीं आई। पहले सीजन के बाद उन्हें लगा कि मैं दूसरा सीजन नहीं करा पाऊंगा। लेकिन, दूसरा सीजन हुआ और काफी हिट भी रहा। मुझे धमकियां मिलने लगीं। मुंबई में मेरे घर के बाहर गोलियां चलीं। पुलिस ने मुझे Z सिक्योरिटी दी। इसके बावजूद हमले नहीं रुके।
दाऊद से जुड़े लोग टीम खरीदना चाहते थे
ललित मोदी ने आगे कहा- देश से बाहर भी मेरे ऊपर कई हमले हुए। लंदन में मेरे बेटे तक को किडनैप कर लिया गया। एक दिन सुबह करीब साढ़े तीन बजे मुझे फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि मुझे तुरंत एक व्यक्ति 'बाबा' से मिलना होगा। मैं उसके पेंटहाउस पहुंचा। वहां उसने IPL टीम खरीदने की इच्छा जताई।
फोन पर दाऊद की आवाज सुनी
मोदी ने आगे कहा- मैंने उस बाबा से दाऊद से जुड़ी प्रॉब्लम बताई। उसने कहा कि मैें इसे तुरंत फिक्स करता हूं। उसने मेरे सामने तुरंत दाऊद को फोन लगा दिया। मेरी हालत खराब हो गई। ये बात 2012 के आस-पास की है।
दाऊद ने स्पीकर पर कहा कि अगर आप बाबा के दोस्त हैं तो अब आपको मुझसे डरने की जरूरत नहीं हैं। मुझे लगता है कि ये सारा ड्रामा जानबूझकर किया गया था। वे चाहते थे कि मैं इस खेल से दूर हो जाऊं, जिससे ये आसानी से अपनी एक्टिविटी कर सकें। शायद, इसी वजह से मैं क्रिकेट से हमेशा के लिए दूर हो गया।

कोच्चि टस्कर्स टीम से विवाद पर क्या बोले
ललित मोदी ने इस इंटरव्यू में कोच्चि टस्कर्स केरला टीम को लेकर हुए विवाद पर भी बात की।
उन्होंने कहा- मुझे इस टीम के मालिकाना ढांचे और सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी पर शक था, इसलिए मैंने सवाल उठाए। इसके बाद मुझ पर राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा। कई बड़े नेताओं के फोन आए। जब मैंने सुनंदा पुष्कर के बारे में जानकारी मांगी, तो शशि थरूर ने मुझसे इस मामले में ज्यादा पूछताछ न करने को कहा। मैंने फ्रेंचाइजी समझौते पर सिग्नेचर करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि मुझे कुछ बातें सही नहीं लग रही थीं। हालांकि, तत्कालीन BCCI अध्यक्ष शशांक मनोहर के कहने पर मुझे समझौते पर हस्ताक्षर करने पड़े।

