दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम टूटेगा: 102 एकड़ में स्पोर्ट्स सिट बनेगी, भारत की नजर 2036 ओलंपिक पर
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दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम
स्पोर्ट्स डेस्क.दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को नया रूप देने की तैयारी है। सरकार ने फैसला किया है कि इस पुराने स्टेडियम को तोड़कर यहां एक अलग ‘स्पोर्ट्स सिटी’ बनाई जाए। यह प्रोजेक्ट भारत के खेल की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका मकसद 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को मजबूत करना है।
स्पोर्ट्स का नया फेस
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम 40 साल से देश में स्पोर्ट्स एक्टिविटीज का सेंटर रहा है। अब यह पूरी तरह बदलने जा रहा है। खेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक- इस स्टेडियम को तोड़कर 102 एकड़ में फैला हुआ एक नया ‘स्पोर्ट्स सिटी’ कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में भारत में खेलों की सूरत बदल सकता है।
43 साल पुराना
यह वही स्टेडियम है जो 1982 के एशियाई खेलों के लिए बनाया गया था और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के समय इसका बड़ा नाम हुआ था। करीब 60,000 दर्शकों की कैपेसिटी वाला यह स्टेडियम अब तक कई इंटरनेशनल एथलेटिक्स, फुटबॉल मैच, बड़े कॉन्सर्ट और समारोहों का गवाह रहा है। यहां स्वतंत्रता दिवस से जुड़े आयोजन भी हो चुके हैं।
अब सरकार चाहती है कि इसी जगह पर एक विश्वस्तरीय खेल नगर (स्पोर्ट्स सिटी) बनाई जाए। इसमें खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन ट्रेनिंग फैसिलिटी, स्टेडियम, इंडोर और आउटडोर फैसेलिटी और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर हों।
भारत सरकार की तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार इस प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय कतर और ऑस्ट्रेलिया के खेल शहरों के मॉडल का काम कर रही है।
कतर का दोहा स्पोर्ट्स सिटी, जो 617 एकड़ में फैला है, उसमें फुटबॉल, तैराकी और 13 तरह के इनडोर खेलों की फैसिलिटी हैं। एक स्पोर्ट्स मेडिसिन हॉस्पिटल भी है।
ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न का डॉकलैंड्स स्टेडियम ऐसा उदाहरण है। ये क्रिकेट, फुटबॉल, रग्बी और सॉकर जैसे कई खेलों की मेजबानी करता है।
250 एकड़ में कैम्पस
भारत में भी ऐसे बड़े खेल परिसर बन रहे हैं, जैसे अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स। ये 250 एकड़ में बना है और इसमें क्रिकेट, एथलेटिक्स, टेनिस और स्विमिंग की सुविधाएं हैं। यह करीब 4600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ था।अभी तक इस नए दिल्ली स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के काम शुरू होने की कोई तारीख तय नहीं की गई है। सरकार पहले इंटरनेशनल मॉडल्स को चेक करना चाहती है। इसके बाद ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा।

