जापानी फैन्स मैच के बाद कचरा क्यों उठाते हैं: FIFA वर्ल्ड कप में 28 साल का ट्रेडिशन, साफ-सफाई स्कूल से सिखाई जाती है
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स्पोर्ट्स डेस्क. "किसी जगह को वैसा ही छोड़कर जाओ जैसा तुमने उसे पाया था।" जापान की यह मशहूर कहावत वहां के लोगों की लाइफस्टाइल का पार्ट है। बचपन से बच्चों को क्लीनलीनेस, डिसिप्लिन और पब्लिक प्लेस की जिम्मेदारी लेना सिखाया जाता है। यही वजह है कि ये हैबिट्स समय के साथ उनकी पर्सनैलिटी का पार्ट हो जाती हैं।
FIFA वर्ल्ड कप 2026 में जापान के फैन्स एक बार फिर इसी कल्चर की मिसाल पेश करते नजर आए। मैच खत्म होने के बाद जापानी फैन्स स्टेडियम की सीट्स और आसपास के एरिया की सफाई करते दिखे। उनकी फोटोज और वीडियोज वायरल हो रही हैं। सभी इस पहल की तारीफ कर रहे हैं…
आइए राज एक्सप्रेस में जानते हैं कि मैच के बाद स्टेडियम की सफाई करना जापानी फैंस के लिए इतना स्पेशल क्यों है..
ये ट्रेडिशन 1998 वर्ल्ड कप से शुरू हुआ
जापानी फैन्स पहली बार 1998 FIFA वर्ल्ड कप के दौरान फ्रांस में स्टेडियम साफ करते नजर आए थे। तब से लगभग हर बड़े टूर्नामेंट में यह सीन देखने को मिलता है। 2022 कतर वर्ल्ड कप में भी जापानी फैन्स ने जर्मनी पर जीत के बाद सेलिब्रेशन से पहले स्टेडियम की सफाई की थी।
2026 वर्ल्ड कप में फिर ऐसा करते नजर आए
नीदरलैंड्स के खिलाफ 2-2 ड्रॉ के बाद भी जापानी फैन्स स्टेडियम में रुके रहे। कचरा इकट्ठा करते नजर आए। FIFA ने भी सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें शेयर कर तारीफ की। मैच से पहले लोकल अथॉरिटीज ने जापानी फैन्स की मांग पर हजारों गार्बेज बैग दिए थे।
स्कूल से मिलती है सीख
जापान में बच्चों को छोटी उम्र से ही साफ-सफाई करना सिखाया जाता है। वहां स्टूडेंट्स खुद अपने क्लासरूम, हॉलवे और कॉमन एरिया साफ करते हैं। यही हैबिट बाद में उनकी लाइफस्टाइल का पार्ट बन जाती है।
रिस्पेक्ट दिखाने का तरीका
जापान में मैच के बाद सफाई को रिस्पेक्ट का सिम्बल माना जाता है। वे जहां भी जाते हैं, वहां खुद को मेहमान मानते हैं। ऐसे में उस जगह को साफ छोड़ना भी अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

ट्रेडिशन का असर
साफ-सफाई जापान के कल्चर का अहम हिस्सा है। बौद्ध धर्म में साफ-सफाई को काफी महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि लोग मंदिर में एंट्री करने से पहले हाथ और मुंह धोते हैं। यही सीख उनकी डेली लाइफ और पब्लिक प्लेस पर भी साफ नजर आती है।

