संजू-अश्विन बदल सकते हैं IPL टीम: क्या है ट्रांसफर विंडो, नीलामी से पहले खिलाड़ी कैसे बदल लेते हैं IPL टीम; जानिए सबकुछ
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IPL 2025 सीजन के एक मैच में संजू सैमसन और रविचंद्रन अश्विन। IPL में अब तक संजू ने 177 और अश्विन ने 221 मैच खेले हैं। (BCCI)
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 सीजन के लिए होने वाली मिनी ऑक्शन में अभी काफी समय है। इससे पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि विकेटकीपर बैटर संजू सैमसन और स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ट्रांसफर विंडो के तहत अपनी टीम बदल सकते हैं। संजू राजस्थान रॉयल्स (RR) के कप्तान हैं। जबकि अश्विन चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से खेलते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजू राजस्थान टीम छोड़कर चेन्नई टीम में जा सकते हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) भी संजू को लेने में दिलचस्पी दिखा रही है। आखिर यह ट्रांसफर विंडो क्या है? इसके नियम क्या हैं? क्या इससे खिलाड़ियों को भी फायदा होता है? आइए जानते हैं इन्हीं सब सवालों के जवाब...
ट्रांसफर विंडो क्या है?
दो IPL सीजन और ऑक्शन के बीच फ्रेंचाइजीज के बीच खिलाड़ियों की अदला-बदली या प्लेयर्स की ट्रेड को ही ट्रांसफर विंडो कहते हैं।
कब शुरू हुई ट्रांसफर विंडो?
IPL का पहला सीजन 2008 में हुआ था, लेकिन पहली ट्रांसफर विंडो 2009 में शुरू हुई। पहली डील आशीष नेहरा और शिखर धवन को लेकर मुंबई इंडियंस और दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स यानी DC) के बीच हुई थी। धवन मुंबई और नेहरा दिल्ली टीम में गए थे।
किस तरह होता है प्लेयर्स का ट्रांसफर?
ट्रांसफर विंडो के तहत खिलाड़ियों की ट्रेड दो तरह प्लेयर फॉर प्लेयर और प्लेयर फॉर कैश से होती है। प्लेयर फॉर प्लेयर को दो तरफा ट्रेड और प्लेयर फॉर कैश को एक तरफा ट्रेड भी कहते हैं।
प्लेयर फॉर कैश: जब कोई फ्रेंचाइजी अपने प्लेयर को देने के बदले में रुपए लेती है, तो इसे प्लेयर फॉर कैश डील कहा जाता है। जैसे- 2024 सीजन में हार्दिक पंड्या के लिए गुजरात टाइटन्स (GT) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच डील हुई थी। मुंबई ने पंड्या को 15 करोड़ रुपये में लिया था।
प्लेयर फॉर प्लेयर: जब दो फ्रेंचाइजी आपस में प्लेयर्स को बदलती हैं, तो इसे प्लेयर फॉर प्लेयर डील कहा जाता है। इसमें खिलाड़ियों के बीच कीमत में जो अंतर होता है, उसे खरीदने वाली टीम को चुकाना पड़ता है। 2019 में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने शिखर धवन देकर दिल्ली कैपिटल्स (DC) से तीन खिलाड़ी लिए थे।
ट्रेड में प्लेयर को कोई अधिकार होते हैं?
ट्रांसफर विंडो में कोई भी डील खिलाड़ी की मर्जी के बगैर नहीं हो सकती। प्लेयर को यह अधिकार होता है कि वो डील को मना भी कर सकता है। इसके अलावा यदि कोई प्लेयर ट्रांसफर विंडो के तहत दूसरी टीम में जाना चाहता है, तो उसे फ्रेंचाइजी की मंजूरी चाहिए होती है। यहां फ्रेंचाइजी इनकार करने का अधिकार रखती है।
2010 का एक मामला इसमें सटीक बैठता है। जब राजस्थान रॉयल्स (RR) के रवींद्र जडेजा ने बगैर फ्रेंचाइजी को बताए दूसरी टीम से डील कर ली थी। साथ ही राजस्थान फ्रेंचाइजी के साथ नए कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने से मना कर दिया था। तब जडेजा पर नियम तोड़ने के मामले में एक साल का बैन लगा था।
क्या ट्रांसफर फीस भी होती है?
जी हां, कोई टीम किसी खिलाड़ी को खरीदने के लिए एक्स्ट्रा रुपए चुका सकती है। इसे ही ट्रांसफर फीस कहते हैं। यह फीस कोई और नहीं बल्कि दोनों फ्रेंचाइजी आपसी समझौते से तय करती हैं। इस ट्रांसफर फीस की कोई लिमिट भी नहीं है। इसके लिए IPL गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी जरूरी होती है।
क्या ट्रांसफर फीस में प्लेयर को कुछ मिलता है?
जरूरी नहीं है कि खिलाड़ी को ट्रांसफर फीस में हिस्सा मिले। मगर कई बार मिलता भी है। यह हिस्सा कितना होगा, यह प्लेयर और फ्रेंचाइजी के बीच सहमति के हिसाब तय होता है। इसका खुलासा भी बहुत ही कम होता है। रिपोर्ट्स की मानें तो ट्रांसफर फीस में प्लेयर को कम से कम 50% हिस्सा मिलता है।
विंडो कब से कब तक खुली होती है?
दो IPL सीजन और ऑक्शन के बीच यह ट्रांसफर विंडो हमेशा ओपन होती है। यह IPL सीजन खत्म होने के 1 महीने बाद ओपन होती है, जो अगले ऑक्शन से एक हफ्ते पहले तक चलती है। ऑक्शन के बाद फिर विंडो ओपन होती है, तो अगले IPL सीजन शुरू होने से एक महीने पहले बंद होती है।

