बॉलिंग स्पाइक्स के लिए गहने बेचने से लेकर IPL ऑक्शन तक का सफर: बिहार के तेज गेंदबाज साकिब हुसैन की सक्सेस स्टोरी
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बिहार के छोटे से जिले गोपालगंज से निकलकर IPL 2026 के ऑक्शन तक पहुंचना आसान नहीं था। साकिब को पहले चेन्नई सुपर किंग्स का नेट बॉलर चुना गया, जहां एमएस धोनी और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों ने उनकी गेंदबाजी की तारीफ की। IPL 2024 ऑक्शन में पहले अनसोल्ड रहने के बाद अब IPL 2026 ऑक्शन में उनका बेस प्राइस 30 लाख रुपए था उतनी रकम में उन्हे KKR ने खरीद लिया।
स्पोर्ट्स डेस्क. बिहार के छोटे से जिले गोपालगंज से निकलकर IPL 2026 के ऑक्शन तक पहुंचना आसान नहीं था। साकिब को पहले चेन्नई सुपर किंग्स का नेट बॉलर चुना गया, जहां एमएस धोनी और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों ने उनकी गेंदबाजी की तारीफ की। IPL 2024 ऑक्शन में पहले अनसोल्ड रहने के बाद अब IPL 2026 ऑक्शन में उनका बेस प्राइस 30 लाख रुपए था उतनी रकम में उन्हे KKR ने खरीद लिया।
साकिब हुसैन ने मेहनत, लगन और परिवार के बलिदान के दम पर यह मुकाम हासिल किया। कभी घर चलाने के लिए टेनिस बॉल टूर्नामेंट खेलने वाले साकिब आज देश के बड़े-बड़े क्रिकेट मंचों पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
जन्म साल 2004 में हुआ
हुसैन का जन्म साल 2004 में बिहार के गोपालगंज जिले के दरगाह मोहल्ला सदर ब्लॉक में हुआ। उनके पिता अली अहमद हुसैन किसान और मां हाउस वाइफ हैं। परिवार की आर्थिक हालत बहुत कमजोर थी। उम्र के साथ उनके पिता के घुटनों में दिक्कत होने लगी। इसके चलते उनके लिए खेती करना मुश्किल हो गया था। घर की जिम्मेदारी बढ़ गई और हालात और कठिन हो गए।

साकिब को आर्मी में जाना था
बचपन में साकिब का सपना क्रिकेटर बनने का नहीं, बल्कि सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का था। इसी वजह से वह रोज सुबह दौड़ लगाया करते थे। उनकी तेज रफ्तार देखकर आसपास के लोगों ने उन्हें क्रिकेट खेलने की सलाह दी। यहीं से साकिब का क्रिकेट से रिश्ता जुड़ा और उन्होंने गेंदबाजी शुरू की।
टेनिस बॉल टूर्नामेंट से परिवार का खर्च चलाते
शुरुआती दिनों में साकिब टेनिस बॉल टूर्नामेंट खेलते थे, जिससे उन्हें एक मैच में 500 से 1000 रुपए तक मिल जाते थे। इसी पैसे से वह घर का खर्च चलाने में मदद करते थे। धीरे-धीरे वह एक अच्छे राइट आर्म फास्ट-मीडियम बॉलर बने और निचले क्रम में बल्लेबाजी भी करने लगे।

जूते खरीदने के पैसे नहीं थे
साकिब की जिंदगी में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास तेज गेंदबाजी करने के लिए जरूरी बॉलिंग स्पाइक्स नहीं थे। बेटे का सपना पूरा करने के लिए उनकी मां ने अपने गहने बेच दिए। साकिब अपने मिंटू भैया और कोच रॉबिन सिंह को अपनी सफलता का क्रेडिट देते हैं, जिन्होंने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर किया।
चंडीगढ़ से NCA और IPL तक का सफर
चंडीगढ़ में अंडर-19 क्रिकेट खेलना साकिब के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। यहीं से उन्हें बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) जाने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में अच्छा परफॉर्मेंस किया, जिसे टीवी पर लाइव देखा गया। उनके प्रदर्शन से KKR, CSK, MI, DC और RCB जैसी टीमों ने उन्हे लेने का सोचा। अब वो इस लीग का हिस्सा हैं।

