FIFA WC 2026 में भारतीय मूल के 4 प्लेयर: 3 को खेलने का मौका, एक बेंच पर बैठा; जानिए इन चारों प्लेयर्स और उनकी टीमों का हाल
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स्पोर्ट्स डेस्क. FIFA वर्ल्ड कप 2026 में क्वार्टरफाइनल मैच खेले जा रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहा यह टूर्नामेंट 11 जून से शुरू हुआ था, जिसका फाइनल 19 जुलाई को होगा। भारतीय फुटबॉल टीम कभी भी FIFA वर्ल्ड कप नहीं खेली है। हालांकि कई मौकों पर भारतीय मूल के प्लेयर्स ने जरूर दम दिखाते नजर आए हैं। मौजूदा यानी 2026 सीजन में भी 4 भारतीय मूल के प्लेयर खेले थे, लेकिन उनकी टीम राउंड ऑफ 32 से आगे नहीं बढ़ सकी। साथ ही यह चारों प्लेयर कोई गोल या असिस्ट भी नहीं कर सके।
दरअसल, इस सीजन में चारों भारतीय मूल के प्लेयर अलग-अलग टीमों से खेलते नजर आए थे। इनमें कोई पंजाबी तो कोई मलयाली फैमिली से आता है। यह चारों प्लेयर न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह, DR कॉन्गो के सैमुअल मुथुसामी, ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्लई और कतर के तहसीन मोहम्मद जमशेद हैं।
जमशेद के अलावा तीनों प्लेयर को खेलने का मौका मिला, लेकिन वे कोई गोल या असिस्ट नहीं कर सके। जमशेद सिर्फ बेंच पर ही बैठे रहे। आइए जानते हैं इन चारों के बारे में...

सरप्रीत सिंह (न्यूजीलैंड)
न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में जन्में सरप्रीत सिंह पंजाबी फैमिली से आते हैं। 27 साल के अटैकिंग मिडफील्डर 2019 में इतिहास रचा था, जब वे बुंदेसलीगा खेलने वाले पहले भारतीय मूल के प्लेयर बने थे। उन्होंने बायर्न म्यूनिख के लिए डेब्यू किया था।
वे पुर्तगाल और सर्बिया के भी क्लब से खेल चुके हैं। अब अपने देश लौटकर वेलिंगटन फिनिक्स के लिए खेल रहे हैं। इसी साल जनवरी में वे चोट से ठीक हुए हैं। उन्हें फीफा वर्ल्ड कप के लिए 26 सदस्यीय न्यूजीलैंड टीम में जगह मिली थी। यह टीम ग्रुप G में थी और ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई। सरप्रीत को 227 मिनट खेलने का मौका मिला, लेकिन वे कोई भी गोल या असिस्ट नहीं कर सके।

सैमुअल मुथुसामी (DR कॉन्गो)
सैमुअल के पिता भारतीय मूल के तमिल फैमिली से थे, जो कैरेबियन आइलैंड गुआडेलूप में बस गए थे। उनकी मां कॉन्गो देश की थीं। 29 साल के मिडफील्डर सैमुअल ने कॉन्गो टीम के लिए 2019 में डेब्यू किया था। इससे पहले वो फ्रांस के फुटबॉल क्लब FC Nantes और तुर्की के क्लब Sivasspor से खेल चुके हैं।
इस वर्ल्ड कप में डीआर कॉन्गो राउंड ऑफ 32 में हारकर बाहर हुई। इंग्लैंड ने उसे 2-1 शिकस्त दी थी। सैमुअल को इस वर्ल्ड कप में 360 मिनट्स खेलने का मौका मिला, लेकिन वे भी गोल या असिस्ट करने में कामयाब नहीं हुए।

निशान वेलुपिल्लई (ऑस्ट्रेलिया)
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में जन्में निशान वेलुपिल्लई की मां एंग्लो इंडियन थीं। उनके पिता श्रीलंकन तमिल थे। 25 साल के निशान को फीफा वर्ल्ड कप के लिए 26 सदस्यीय ऑस्ट्रेलिया टीम में जगह मिली थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम राउंड ऑफ 32 में हारकर बाहर हुई। उसे इजिप्ट ने पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से हराया था।
वेलुपिल्लई को इस वर्ल्ड कप में 88 मिनट्स खेलने का मौका मिला। वे भी बगैर गोल और असिस्ट के रहे। वेलुपिल्लई ने 2024 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। यह चीन के खिलाफ क्वालिफायर मैच था। इस मैच में एक गोल भी किया था। निशान ने इस वर्ल्ड कप से पहले तक 8 इंटरनेशनल मैच खेले थे, जिसमें 3 गोल किए थे।

तहसीन मोहम्मद जमशेद (कतर)
ग्रुप-B में शामिल रही कतर की टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी। इसी टीम में भारतीय मूल के तहसीन मोहम्मद जमशेद भी शामिल थे, लेकिन उन्हें किसी भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला। कतर की राजधानी दोहा में जन्में तहसीन इसी साल 16 जून को 20 साल के हुए हैं।
तहसीन के माता-पिता मलयाली हैं, जो 2006 में कन्नूर से कतर आ गए थे। तहसीन के पहले कोच उनके ही पिता थे, जो खुद एक यूनिवर्सिटी एथलीट रह चुके हैं। इसके बाद तहसीन कतर की एस्पायर एकेडमी में खेले। वे कतर स्टार्स लीग में खेलने वाले भारतीय मूल के पहले फुटबॉलर बने थे। उन्होंने 2024 में इंटरनेशनल फुटबॉल में डेब्यू किया। पहला मैच अफगानिस्तान के खिलाफ था। तहसीन बतौर विंगर खेलते हैं।
विकास फ्रांस टीम से 2006 में खेले थे
20 साल पहले यानी 2006 वर्ल्ड कप में फ्रांस टीम के लिए भारतीय मूल के मिडफील्डर विकास धोरासू (Vikash Dhorasoo) खेले थे। इस सीजन में यह टीम रनरअप रही थी। विकास का आंध्र प्रदेश के विजयनगर से रिश्ता था। 2006 वर्ल्ड कप का फाइनल फ्रांस और इटली के बीच हुआ था। यह मैच 1-1 से ड्रॉ होने के बाद पेनल्टी शूटआउट में इटली ने 5-3 से खिताब अपने नाम किया था।

