कोई रोटी बना रही थी-कोई कपड़े धो रही थी: PAK वुमन्स टीम के पूर्व कोच बासित अली बोले- भारत से बराबरी की बात करना भी मूर्खता, अपने गिरेबां में झांक लीजिए
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वुमन् वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल रविवार (2 नवंबर) को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में हुआ। मैच में इंडिया ने साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराकर खिताब जीत लिया।(@BCCI)
स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया ने वुमन्स वर्ल्ड कप 2025 जीत लिया है। फाइनल में उसने साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराया। टीम इंडिया की जीत के चर्चे दुनिया के हर हिस्से में हो रहे हैं। कुछ लोग हैरान हैं कि एक साथ तीन मैच हारकर भी भारतीय महिला टीम ट्रॉफी उठाती है। दूसरी तरफ, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें कोई हैरानी नहीं है। उनका कहना है- यह वक्त तो पांच साल पहले आ जाना चाहिए था।
पाकिस्तान के पूर्व मिडिल ऑर्डर बैटर और पाकिस्तान वुमन्स टीम के कोच बासित अली और पूर्व विकेटकीपर (कप्तान भी) कामरान अकमल को टीम इंडिया की जीत पर कोई हैरानी नहीं है। एक डेली पॉडकास्ट में उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी।
मैदान पर जाने का वक्त नहीं
बासित अली ने एक शो में कहा- कोविड के बाद में पाकिस्तान की वुमन्स टीम का कोच था। उस वक्त सना मीर कप्तान थीं। एक दिन मैंने उन्हें फोन किया। पूछा- सना ऑफ सीजन में आपकी प्लेयर्स खुद को कैसे फिट रखती हैं? नेट्स सेशन कब करती हैं। बासित कहते हैं कि सना के जवाब से वो हैरान रह गए। इतना ही नहीं उन्होंने तय कर लिया कि वो इस टीम को कोचिंग नहीं दे पाएंगे।
बासित ने कहा- सना के जवाब ने मुझे हैरान कर दिया। उसने मेरे सवाल के जवाब में कहा- मैं अपनी टीम के प्लेयर्स को फोन करती हूं तो पता लगता है कि कोई रोटी डाल रही है (खाना बना रही है) तो दूसरी कपड़े धो रही है। मैंने खुद जब हमारी प्लेयर्स से बात की तो उनका जवाब था कि घर के कामों से फुर्सत मिले तो प्रैक्टिस करें, फिटनेस पर फोकस करें।

भारत की बराबरी अब सिर्फ ख्वाब
कामरान अकमल ने इसी पॉडकास्ट में कहा- जितनी जल्द हम ये सच कबूल कर लें कि भारती की बराबरी ख्वाब है…उतना ही बेहतर होगा। अगर कभी तुक्के में जीत जाएं तो बात अलग…वर्ना हम कहीं भी नहीं हैं। बहुत जल्द मुल्क और बोर्ड की बदहाली के चलते कई क्रिकेटर्स यहां से चले जाएंगे।

अंडर 16 भी हमसे आगे
कामरान ने एक सवाल के जवाब में कहा- भारत में स्टेट लेवल पर अंडर 16 या अंडर 19 खेलने वाले प्लेयर्स को जितना पैसा मिलता है, उतना ही हमारी नेशनल टीम के प्लेर्य को मिलता है। फिर आप बराबरी की बात किस मुंह से करते हैं?
बासित अली ने इस पर कहा- जय शाह जब BCCI प्रेसिडेंट बने तो उन्होंने मेन्स और वुमन्स प्लेयर्स के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट्स और मैच फीस के साथ अलाउंसेस भी बराबर कर दिए। ये तो ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में भी नहीं है। अब जब खेलने जाते हैं तो घर की फिक्र आपका बोर्ड करता है…आपका काम सिर्फ खेलना और जीतना है। भारत में यही हो रहा है। इसलिए बराबरी का ख्वाब भी मत पालिए।

