भारत को 20 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी: 2030 में अहमदाबाद होस्ट सिटी, नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी
Published:
3 min read

मेजबानी मिलने के ऐलान के बाद ग्लास्गो के होटल में गरबा का रंग देखते ही बनता था। यहां जश्न का माहौल था।
स्पोर्ट्स डेस्क: भारत को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिल गई है। कॉमनवेल्थ एसोसिएशन ने अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को पहले ही मंजूरी दे दी थी। इस पर फाइनल फैसला आज यानी 26 नवंबर को लिया गया। अब यह तय है कि 2010 के बाद भारत फिर से कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए तैयार है। बता दें, कॉमनवेल्थ गेम्स हर 4 साल में होता है। 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की 100वीं एनिवर्सरी भी होगी।
ढोल और गरबा की गूंज
ग्लासगो शहर के एक होटल में बुधवार को जब अहमदाबाद के नाम का ऐलान किया गया तो चंद मिनट में वहां माहौल भारतीय और गुजराती हो गया। 30 ढोल की थाप पर गरबा डांसर्स थिरकते नजर आए।
इसके बाद वहां मौजूद इंडियन डेलिगेशन ने खेलों को लेकर एक प्रेजेटेंशन दिया। ये बताया कि खेलों के दौरान भारत क्या खास करने जा रहा है। खास बात यह है कि विकसित भारत कार्यक्रम के तहत भारत ओलिंपिक और पैरा ओलिंपिक की मेजबानी के लिए भी कोशिश कर रहा है।
तस्वीरें देखिए..



सबसे बड़ा स्टेडियम
अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम्स में से एक है। इसके कैपेसिटी 1 लाख 32 हजार दर्शकों की है। 2023 में यहीं वर्ल्ड कप क्रिकेट का फाइनल खेला गया था। यहीं कॉमनवेल्थ खेलों की ओपिनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी होगी। इंडियन डेलिगेशन ने वहां मौजूद मेहमानों को बताया कि स्टेडियम से किसी भी सुविधा को हासिल करने के लिए 35 मिनट से ज्यादा सफर नहीं करना होगा।

अहमदाबाद को नाइजीरिया से मिली थी चुनौती
कॉमनवेल्थ की एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने पिछले महीने कन्फर्म किया था कि उन्होंने 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की होस्ट सिटी के लिए अहमदाबाद को नॉमिनेट किया है। होस्टिंग के लिए अहमदाबाद को नाइजीरिया से कड़ी चुनौती मिली, लेकिन अथॉरिटी ने उन्हें 2034 के कॉमनवेल्थ गेम्स की होस्टिंग के लिए जरूरी सहयोग देने का निर्णय लिया।
भारत ने पहली बार 2010 में होस्ट किया
भारत ने पहली बार 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स होस्ट किया था। तब ये गेम्स नई दिल्ली में हुए थे। भारत ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 101 मेडल जीते थे। इनमें से 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज थे।
इसकी शॉर्ट हिस्ट्री जान लीजिए
कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) 1930 में पहली बार कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुए थे। शुरू में इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था। इसमें तब 11 देशों के करीब 400 खिलाड़ी हिस्सा लेते थे। ये खेल हर चार साल में होते हैं, लगभग ओलंपिक की तरह।
यह गेम उन देशों के बीच होता है जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे। फिलहाल इसमें 54 देश भाग लेते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स का मकसद खेलों के जरिए देशों के बीच दोस्ती और शांति को बढ़ावा देना है।

