इंडिया-इंग्लैंड सीरीज: क्रिकेट की बाईबिल कही जाने वाली विज्डन का एनालिसिस : भारत को 4-0 से जीतना चाहिए था, फील्डिंग और लोअर ऑर्डर कमजोर साबित हुए
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भारतीय टीम और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के तहत खेली गई 5 टेस्ट की सीरीज 2-2 से ड्रॉ रही। (BCCI)
थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं। भारतीय टीम को जून 2025 में इंग्लैंड दौरे पर जाना था। यहां 5 टेस्ट की सीरीज होनी थी। इससे पहले मई 2025 में विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टेस्ट से संन्यास ले लिया। रविचंद्रन अश्विन भी रिटायर हो चुके थे। मोहम्मद शमी चोट के कारण बाहर थे। जसप्रीत बुमराह भी वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते 5 में से 3 ही टेस्ट खेलने वाले थे।
4 अगस्त को यह सीरीज 2-2 की बराबरी पर खत्म हुई। बहरहाल, सवाल अब भी बाकी हैं। क्रिकेट की बाईबिल कही जाने वाली हिस्टोरिकल मैग्जीन ‘विज्डन’ ने इस सीरीज पर एक्सक्लूसिव एनालिसिस किया है। यहां यह खास आर्टिकल खास आपके लिए....
इंग्लिश कंडीशन अब पहले जैसी नहीं रहीं। इन कंडीशन्स में बैटिंग अब बेहद आसान हो चुकी थी। यह आशंका नहीं थी कि पहले दौरों की तरह टीम इंडिया की बैटिंग लाइनअप पहले की तरह कोलेप्स कर जाएगी। इंग्लैंड का बॉलिंग अटैक भी अनुभवहीन ही था।
जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड के रिटायरमेंट के बाद इंग्लैंड की किसी बड़ी टीम के खिलाफ पहली सीरीज थी। स्क्वॉड में क्रिस वोक्स ही सीनियर बॉलर थे। जोफ्रा आर्चर खेलेंगे या नहीं, ये भी क्लियर नहीं था। मार्क वुड टीम में नहीं थे। सीरीज से पहले यह भी तय नहीं था कि कप्तान बेन स्टोक्स कितने ओवर गेंदबाजी करेंगे।
इंग्लैंड का यह वो बॉलिंग अटैक नहीं था, जिसने 2022 से 2024 के बीच 4 बड़ी सीरीज जिताई थीं। इसी दौरान 2023 में ऑस्ट्रेलिया को भी एशेज सीरीज में रोका था। यह 2-2 से ड्रॉ रही थी। आइए विस्तार से जानते हैं एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में टीम इंडिया से कहां गलती हुई...

हेडिंग्ले में जीत का मौका गंवाया
सीरीज का पहला टेस्ट लीड्स के हेडिंग्ले में हुआ था। इसमें भारतीय टीम की ओर से 5 शतक लगे। ऋषभ पंत ने ही अकेले 2 सेंचुरी लगा दी थीं। यह एक रिकॉर्ड था। पहली पारी में 3 विकेट पर 430 रन बना लिए थे, लेकिन यशस्वी जायसवाल (101), गिल (147), पंत (134) के अलावा कोई नहीं चल सका। टीम 471 पर ढेर हुई। यहां बड़ा स्कोर बनाने का मौका था।
दूसरी पारी में भी 4 विकेट पर 333 रन बना लिए थे, लेकिन टीम 364 पर ढेर हो गई। यहां भी केएल राहुल (137) और पंत (118) के अलावा कोई नहीं चला। दोनों पारियों में निचला क्रम पूरी तरह सरेंडर नजर आया।
बुमराह ने पहली पारी में 5 विकेट लिए थे। आमतौर पर इन हालात में टीमें हारती नहीं हैं, लेकिन टीम इंडिया हारी। प्लेयर्स ने कई कैच छोड़े, शार्दुल ठाकुर को बॉलिंग नहीं दी। बेन डकेट और जैक क्रॉली के खिलाफ टीम के पास कोई प्लान नहीं था। जब बुमराह नई बॉल से विकेट नहीं ले सके तो टीम के पास प्लान B नहीं था। इंग्लैंड ने बैटिंग या बॉलिंग में नहीं, बल्कि फील्डिंग में टीम इंडिया को पछाड़ दिया।
बड़ी टीमें भी हार सकती हैं। हेडिंग्ले में इंग्लैंड ने भारतीय टीम को बैटिंग या बॉलिंग में नहीं हराया, बल्कि कैच लेकर शिकस्त दी। किसी भी परिस्थिति में आप एवरेज परफॉर्मेंस के लिए अनुभवहीन बैटिंग या बॉलिंग को जिम्मेदार तो ठहरा सकते हैं, लेकिन फील्डिंग में ये छूट नहीं है। फील्डिंग ही वो डिपार्टमेंट है, जिसमें बेस्ट टीम से कंडीशन की परवाह किए बगैर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। दूसरी पारी में रवींद्र जडेजा के रहते हुए टेलेंडर्स ने भी क्रीज पर टिकने की कोशिश नहीं की।
बुमराह के बगैर एजबेस्टन टेस्ट जीता
दूसरा टेस्ट बर्मिंघम के एजबेस्टन में हुआ, जहां इससे पहले टीम इंडिया कोई टेस्ट नहीं जीती थी। इस बार बुमराह के बगैर उसे उतरना था। मगर टीम ने दमदार वापसी की और मैच जीता। भारतीय टीम तीन ऑलराउंडर जडेजा, सुंदर और नीतीश रेड्डी के अलावा 3 तेज गेंदबाजों आकाश दीप, सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा के साथ उतरी। यह रणनीति ऑस्ट्रेलिया में सफल नहीं रही थी, लेकिन यहां काम कर गई।
पहली पारी में टीम ने आखिरी 4 विकेट 29 रन बनाने में ही गंवा दिए थे। तीन गेंदबाज 3 ही विकेट ले पाए थे। शुभमन गिल की सेंचुरी के साथ सिराज और आकाश दीप की गेंदबाजी इंग्लैंड पर भारी पड़ गई। गिल ने पहली पारी में 269 और दूसरी पारी में 161 रन बनाए। सिराज ने 7 (6+1) और आकाश ने 10 (4+6) विकेट लिए।
लॉर्ड्स में आर्चर की वापसी, इंग्लैंड 2-1 से आगे
तीसरा टेस्ट लंदन के लॉर्ड्स में हुआ, जिसमें पेसर जोफ्रा आर्चर की वापसी हुई। पहली पारी में बुमराह ने 5 विकेट लिए। इंग्लैंड की बैटिंग काफी धीमी रही। उसने 271 रन पर 7 विकेट गंवा दिए थे। टीम 387 के स्कोर तक पहुंची। भारतीय टीम ने 3 विकेट पर 248 रन बना लिए थे। स्कोर 6 विकेट पर 376 रन हुआ। टीम ने 11 रन बनाने में 4 विकेट गंवा दिए और 387 पर ही ढेर हो गई। इंडिया के पास यहां इंग्लैंड को कम स्कोर पर रोकने और खुद बड़ा स्कोर बनाने का मौका था।
दूसरी पारी में 193 रन का छोटा टारगेट मिला, लेकिन टीम की शुरुआत ही ठीक नहीं रही। 58 रन पर 4 विकेट गंवा दिए। जडेजा (61) एक छोर पर डटे रहे, लेकिन टीम 170 पर ऑलराउट हुई और 22 रन से मैच गंवा दिया। इस तरह इंग्लैंड ने सीरीज में 2-1 से बढ़त बनाई।
पूर्व भारतीय प्लेयर रवि शास्त्री ने कहा था कि यहां भारतीय टीम 3-0 से सीरीज पर कब्जा जमा सकती थी। उनकी बात में दम भी था, लेकिन दो आसान मुकाबले टीम ने गंवा दिए थे।
ओल्ड ट्रैफर्ड में जडेजा-सुंदर ने बचाया
तीसरे टेस्ट में चोटिल होकर नीतीश रेड्डी बाहर हो गए थे। उनकी जगह तेज गेंदबाज अंशुल कम्बोज टीम में आए। उन्हें आते ही सीधे मैदान में उतार दिया। अंशुल का डेब्यू हुआ, लेकिन वे रफ्तार से बॉलिंग नहीं कर पा रहे थे। बॉलिंग कोच मोर्ने मोर्केल भी इस पर हैरान थे। बुमराह भी बेहद धीमी गेंदबाजी कर रहे थे। उन्होंने पहली बार एक पारी में 100 रन दिए।
बैटिंग में भी टीम इंडिया ने पहली पारी में आखिरी 5 विकेट 44 रन बनाने में गंवा दिए थे। शार्दुल को भी एक बार फिर ज्यादा गेंदबाजी नहीं दी गई। उनका सही इस्तेमाल नहीं किया। ऋषभ पंत के पैर में चोट लगी, इसके बावजूद उन्होंने बैटिंग की। आखिर में जडेजा ने नाबाद 107 और सुंदर ने नाबाद 101 रन बनाकर मैच ड्रॉ कराया। यदि हेडिंग्ले और लॉर्ड्स जीत लेते तो टीम इंडिया को यह ड्रॉ भी सीरीज जीतने से नहीं रोक पाता।
ओवल में टीम इंडिया की शानदार जीत
एक बार फिर भारतीय लोअर ऑर्डर फ्लॉप रहा। पहली पारी में टीम ने आखिरी 4 विकेट 6 रन बनाने में गंवा दिए। इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी रही और 1 विकेट गंवाकर 100+ रन बना लिए थे। मगर यहां से पूरी बाजी पलट गई। इंग्लैंड टीम पहली पारी में 247 रन पर सिमटी। इस मैच में कैच भी बहुत छूटे, लेकिन इंग्लैंड की ओर से।
बतौर नाइटवॉचमैन आकाश दीप ने फिफ्टी (66) लगाई। आखिरी विकेट के लिए 39 रन की पार्टनरशिप हुई। सभी रन वॉशिंगटन सुंदर ने बनाए। सुंदर ने 4 छक्के लगाकर कुल 53 रन बनाए।
374 रन के टारगेट के जवाब में हैरी ब्रूक ने 111 और जो रूट ने 105 रन बनाए। सिराज ने ब्रूक का कैच छोड़ा। इंग्लैंड को 75 रन और चाहिए थे। उनके 7 विकेट बाकी थे। सिराज और कृष्णा ने शानदार गेंदबाजी की। आखिरी दिन 35 रन चाहिए थे और 4 विकेट बाकी थे। आखिर में क्रिस वोक्स टूटे कंधे के साथ पट्टी बांधकर खेले। सिराज-कृष्णा ने मैजिक कर दिखाया। टीम इंडिया 6 रन से ओवल टेस्ट जीती और सीरीज 2-2 से बराबर की। मगर इस जीत में यह बात दब गई कि भारतीय टीम हेडिंग्ले और लॉर्ड्स टेस्ट जीतकर सीरीज पर कब्जा भी कर सकती थी।
अब कुछ सवाल जरूर मन में उठते हैं...
क्या होता अगर हेडिंग्ले टेस्ट में भारतीय टीम छोड़े गए कैच में से आधे भी पकड़ लेती?
क्या होता अगर लोअर ऑर्डर थोड़ा भी जडेजा का साथ दे पाता?
क्या होता अगर लॉर्ड्स में केएल राहुल की सेंचुरी लंच के बाद आती, साथ ही वो थोड़ी देर और टिक पाते?
क्या होता जब लॉर्ड्स में 193 रन चेज करते समय भारतीय बल्लेबाज समझ जाते कि 30 ओवर बाद इंग्लिश बॉलर्स हावी नहीं रहेंगे। फिर संभलकर बैटिंग करते?
यदि यह सब हो पाता तो शायद यह सीरीज ओल्ड ट्रैफर्ड (चौथा टेस्ट) में ही खत्म हो गई होती।
कुछ साल बाद यह कड़वी यादें बहुत चुभेंगी
ओवल में जीत के बाद सीरीज 2-2 से बराबर हुई। अभी जश्न के वीडियो और फोटोज काफी वायरल हो रहे हैं। ड्रेसिंग रूम की स्टोरीज भी ड्रेंड में रहेंगी। मगर जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, सबकुछ धुंधला हो जाएगा। अभी ओवल की जीत में हेडिंग्ले और लॉर्ड्स की गलतियां ढक गईं। मगर कुछ साल बाद जब यह सीरीज याद आएगी तो यह बात जरूर सताएगी कि इस इंग्लैंड दौरे पर 18 साल बाद टेस्ट सीरीज जीतने का सुनहरा मौका था। शायद तब यह बात चुभने लगेगी।

