भगवा रंग नहीं, ये टीम की नई रणनीति: हॉकी इंडिया ने कहा- ब्लू टर्फ पर विजिबिलिटी की दिक्कत, उपकप्तान बोले- ऑरेंज जर्सी हमारे लिए फायदेमंद
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स्पोर्ट्स डेस्क. हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले हॉकी इंडिया ने टीम की जर्सी का ट्रेडिशनल ब्लू कलर बदल दिया है। इसकी जगह ऑरेंज कलर में नई जर्सी तैयार की है। कुछ पूर्व खिलाड़ी और कई राजनीतिक लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। हॉकी इंडिया का कहना है कि ब्लू जर्सी, ब्लू एस्ट्रोटर्फ में मर्ज हो जाती है। इससे खिलाड़ियों को मैदान पर अपने साथी को देखने में परेशानी होती है। इसी वजह से ऑरेंज जर्सी को चुना गया है।
हालांकि आलोचकों को यह लॉजिक सही नहीं लग रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की टीम ग्रीन मैदान पर ग्रीन जर्सी पहनकर दो वर्ल्ड कप जीत चुकी है। ऐसे में भारत की ब्लू जर्सी को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
लगभग 100 साल से ब्लू रही भारत की पहचान
भारतीय हॉकी टीम की ब्लू जर्सी करीब एक सदी से उसकी पहचान रही है। इसी रंग की जर्सी में भारत ने 8 ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीते। वर्ल्ड कप जीता। कई यादगार जीत दर्ज कीं। भारत ने 1928 में पहली बार ओलिंपिक हॉकी में हिस्सा लिया था। इसके बाद से टीम बड़े टूर्नामेंट्स में ज्यादातर ब्लू या व्हाइट जर्सी में ही खेलती रही है।
पूर्व कप्तान ने सवाल किया
भारत के पूर्व कप्तान वीरेन रसकिन्हा ने कहा- मैंने कई साल तक गर्व के साथ ब्लू जर्सी पहनी है। फैंस भी भारतीय टीम को ब्लू जर्सी में देखना चाहते हैं। ऑरेंज जर्सी के पीछे क्या लॉजिक है उन्होंने भारत की तुलना अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम से की। रसकिन्हा ने कहा कि क्या अर्जेंटीना कभी अपनी ट्रेडिशनल ब्लू और व्हाइट स्ट्राइप्स को बदलकर ऑरेंज जर्सी पहन सकता है?

हॉकी इंडिया ने वजह बताई
हॉकी इंडिया ने ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी किया। फेडरेशन ने कहा कि जर्सी बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों से बातचीत के बाद लिया गया। हॉकी इंडिया के मुताबिक इंटरनेशनल हॉकी में अब ज्यादातर ब्लू सिंथेटिक टर्फ का इस्तेमाल होता है। ब्लू जर्सी इस टर्फ में मर्ज हो जाती है। इससे मैदान पर क्लैरिटी और विजिबिलिटी प्रभावित होती है। इस फैसले के पीछे कोई राजनीतिक वजह नहीं है। हालांकि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में 5 मौजूदा मेन्स और वुमन्स टीम ने दावा किया कि उनसे जर्सी के बारे में कोई बात नहीं की गई थी।
हार्दिक सिंह ने फैसले का बचाव किया
भारतीय हॉकी टीम के वाइस कैप्टन हार्दिक सिंह ने ऑरेंज जर्सी का बचाव किया। उन्होंने इसे टीम की स्ट्रैटेजी और टैक्टिक बताया। हार्दिक ने कहा- हमारी पिछली ब्लू जर्सी का रंग एस्ट्रोटर्फ से मैच करता था। इससे हमें कुछ दिक्कत हो रही थी। अगर ऑरेंज जर्सी हमारे लिए फायदेमंद है, तो इसे ट्राई करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम के लिए सबसे जरूरी देश को रिप्रेजेंट करना है। जर्सी का रंग टीम की परफॉर्मेंस से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है।
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ग्रीन जर्सी में पाकिस्तान जीता
हॉकी इंडिया की विजिबिलिटी वाली दलील पर स्पोर्ट्स कम्युनिटी ने सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने पाकिस्तान का उदाहरण दिया। पाकिस्तान की हॉकी टीम को ग्रीन शर्ट्स कहा जाता है। उसने ग्रीन मैदान पर ग्रीन जर्सी पहनकर कई बड़े टूर्नामेंट जीते हैं। इनमें 1982 एशियन गेम्स, 1984 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक और 1994 वर्ल्ड कप शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ग्रीन मैदान पर ग्रीन जर्सी में जीत सकता है, तो भारत को ब्लू टर्फ पर ब्लू जर्सी से इतनी बड़ी परेशानी क्यों हो रही है?
2012 में शुरू हुआ था ब्लू टर्फ
ब्लू टर्फ पहली बार 2012 लंदन ओलिंपिक में इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ चमकीली येलो बॉल का इस्तेमाल हुआ था। ब्लू टर्फ टीवी व्यूअर्स के लिए लाया गया था। ब्लू मैदान पर येलो बॉल साफ दिखाई देती है। इससे खिलाड़ियों, दर्शकों और टीवी व्यूअर्स को तेज रफ्तार बॉल ट्रैक करने में आसानी होती है। शुरुआत में ब्लू टर्फ को लेकर भी विवाद हुआ था। बाद में यह इंटरनेशनल हॉकी का स्टैंडर्ड बन गया।
हॉकी वर्ल्ड कप 14 अगस्त से
FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का 16वां एडिशन 14 से 30 अगस्त तक खेला जाएगा। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन शहर करेंगे। भारत ने सिर्फ एक हॉकी वर्ल्ड कप खिताब 1975 में जीता था। इसके बाद टीम दोबारा चैंपियन नहीं बन सकी। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या भारत 2026 में फिर से वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना पूरा कर पाएगा।

