बंगाल टाइगर कहिए या प्रिंस ऑफ कोलकाता: टीम इंडिया में जीत का जज्बा-जुनून और जोश भरने वाले गांगुली- तस्वीरों की जुबानी सौरव का सफर
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स्पोर्ट्स डेस्क. वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे मशहूर बैटर और कमेंटेटर सर ज्यॉफ्री बॉयकॉट...उन्होंने 21 साल के एक लेफ्टी बैटर को खेलते देखा। उस दिन उन्होंने उसे दो नाम दिए- प्रिंस ऑफ कोलकाता और बंगाल टाइगर। यह लड़का कोई और नहीं सौरव गांगुली थे। भारत में उन्हें दादा यानी बड़े भाई के तौर पर ज्यादा पुकारा जाता है।
सौरव गांगुली आज 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। वो सिर्फ एक महान बल्लेबाज नहीं, बल्कि उस नई सोच और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, जिसने भारतीय टीम को विदेशी सरजमीं पर आंखों में आंखें डालकर मुकाबला करना सिखाया।
लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराने वाला उनका ऐतिहासिक जश्न आज भी भारतीय क्रिकेट के आत्मविश्वास, फियरलेस सोच और नए दौर की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। दादा की कप्तानी में भारत ने अलग पहचान और दबदबा कायम किया।
वो किस्सा, जो शायद कम लोग जानते होंगे
दादा की जिंदगी सिर्फ रिकॉर्ड और यादगार जीतों तक नहीं रही। उनके कॅरियर से जुड़े कई ऐसे मजेदार किस्से भी हैं। एक किस्सा जूनियर क्रिकेट के दिनों का है, जब सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने गांगुली के कमरे में इतना पानी भर दिया कि उनका पूरा क्रिकेट किटबैग पानी में तैरने लगा। यह किस्सा आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित प्रैंक्स में गिना जाता है।

नन्हे हाथों में फोन था, किस्मत के हाथों में भारतीय क्रिकेट का भविष्य। दादा की फैमिली वेस्ट बंगाल के अमीर परिवारों में गिनी जाती है।
यह सौरव गांगुली की बचपन की फोटो है। इसमें वो पेरेंट्स और बड़े भाई के साथ हैं। सौरव के पिता चंडीदास गांगुली कामयाब बिजनेसमैन थे। वो क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके थे। मां निरूपा गांगुली हाउस वाइफ थीं। शुरुआत में वह चाहती थीं कि सौरव अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें, लेकिन जब उन्होंने बेटे का क्रिकेट के लिए जुनून देखा, तो उन्होंने हर कदम पर उसका साथ दिया।

8 जुलाई 1972 को कोलकाता में जन्मे सौरव को बचपन में उन्हें क्रिकेट से ज्यादा फुटबॉल पसंद था। लेकिन आठवीं की परीक्षा के बाद पिता ने छुट्टियों के दौरान उन्हें क्रिकेट अकादमी भेज दिया। यहीं से उनकी क्रिकेट जर्नी शुरू हुई।

अंडर-15 क्रिकेट के दिनों में सौरव ने करियर की नींव रखी। ओडिशा अंडर-15 टीम के खिलाफ शानदार शतक लगाया। इसके बाद उन्हें स्कूल की क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया। यही समय था जब उनकी मुलाकात सचिन तेंदुलकर से हुई।
सौरव को क्रिकेट के लिए मोटिवेट करने वालों में उनके बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली का सबसे बड़ा योगदान रहा। स्नेहाशीष खुद बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। 1989-90 सीजन में उन्होंने बंगाल की ओर से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया। उसी सीजन बंगाल ने फाइनल में दिल्ली को हराकर रणजी ट्रॉफी जीती।

1992 में सौरव को वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिला। वह सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। उन्होंने अगले तीन साल घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। रणजी ट्रॉफी में लगातार रन बनाने के बाद 1995-96 में दिलीप ट्रॉफी खेलने का मौका मिला, जहां उनके दमदार प्रदर्शन ने भारतीय टीम में वापसी की राह आसान कर दी।
1996 में सौरव ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स पर टेस्ट डेब्यू किया। पहली ही पारी में 131 रन बनाए। इसके बाद 1997 में श्रीलंका दौरे पर उन्होंने कोलंबो में 113 रन बनाकर अपने वनडे करियर की पहली सेंचुरी लगाई।

1997 के सहारा कप में पाकिस्तान के खिलाफ सौरव गांगुली ने लगातार चार मैचों में 'मैन ऑफ द मैच' का अवार्ड जीता। ऐसा करने वाले वह वनडे क्रिकेट इतिहास के पहले खिलाड़ी बने।

सचिन और सौरव ने मिलकर 8,227 रन बनाए। 26 सेंचुरी पार्टनरशिप कीं। ये लंबे वक्त तक रिकॉर्ड रहा।

सौरव ने 23 अगस्त 1996 को बचपन की दोस्त डोना गांगुली से गुपचुप शादी की थी। दोनों परिवारों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे। बाद में परिवारों की सहमति मिलने के बाद 21 फरवरी 1997 को पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी की। सौरव की पत्नी डोना ओडिसी डांसर हैं। वह 'दीक्षा मंजरी' नाम का अपना डांस ग्रुप चलाती हैं। सौरव और डोना गांगुली की एक बेटी है, Sana Ganguly, जिनका जन्म नवंबर 2001 में हुआ था।

IPL के पहले सीजन (2008) की नीलामी में सौरव गांगुली को Kolkata Knight Riders ने करीब 7 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था। वह 2008 से 2010 तक कोलकाता की ओर से खेले और टीम की कप्तानी भी संभाली। 2011 में सौरव गांगुली Pune Warriors India से जुड़े, जहां उन्हें 1.8 करोड़ रुपये, उस समय के बेस प्राइस पर साइन किया गया। 2012 सीजन के बाद उन्होंने IPL में अपने खिलाड़ी के रूप में करियर को अलविदा कह दिया।

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी गांगुली खेल से जुड़े रहे। उन्होंने IPL में Delhi Capitals में डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट और मेंटर की भूमिका निभाई। इसके अलावा गांगुली को दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग की टीम Pretoria Capitals में भी और हेड कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

सौरव गांगुली एक बार टीम के सबसे बड़े प्रैंक का शिकार भी बने थे। हरभजन सिंह और युवराज सिंह ने मिलकर एक फर्जी खबर तैयार कर दी, जिसमें दावा किया गया कि गांगुली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने ही खिलाड़ियों की आलोचना की है। यह खबर पूरी तरह मजाक के लिए बनाई गई थी और गांगुली ने ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया था।

2001 की भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में गांगुली ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की उस साजिश को पहली बार नाकाम कर दिया, जिसके जरिए वो दौरे पर आने वाली टीमों पर मानसिक दबाव बनाती थी। गांगुली ने कई बार ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के लिए इंतजार कराया। एक बार तो उन्होंने देरी की वजह यह बताई कि वह ब्लेजर पहनना ही भूल गए थे।
सौरव ने क्रिकेट के साथ-साथ बिजनेस में भी कदम रखा। उन्होंने 2004 में कोलकाता के पॉश इलाके पार्क स्ट्रीट में 'सौरव्स – द फूड पैविलियन' नाम से तीन मंजिला रेस्टोरेंट शुरू किया था। इस रेस्टोरेंट का उद्घाटन सचिन तेंदुलकर ने किया

सौरव के सम्मान में पश्चिम बंगाल के राजारहाट (उत्तर 24 परगना) में 1.5 किलोमीटर लंबी सड़क का नाम 'सौरव गांगुली एवेन्यू' रखा गया। इस सड़क के नए नाम की पट्टिका का अनावरण खुद सौरव गांगुली ने राजारहाट-गोपालपुर नगर पालिका द्वारा आयोजित एक विशेष समारोह में किया था।

सौरव ने 2002 की नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में लॉर्ड्स की बालकनी से टी-शर्ट लहराकर ऐतिहासिक अंदाज में जीत का जश्न मनाया था। यह जश्न एंड्रयू फ्लिंटॉफ द्वारा कुछ महीने पहले वानखेड़े स्टेडियम में इसी तरह टी-शर्ट उतारकर मनाए गए जश्न का जवाब माना जाता है। यह पल आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार जश्नों में गिना जाता है।
सौरव को बचपन में उनके माता-पिता ने 'महाराज' नाम दिया था। सौरव कोलकाता के बेहाला स्थित बिरेन रॉय रोड पर बनी 48 कमरों वाली पुश्तैनी हवेली में रहते हैं। करीब 40 करोड़ रुपये की कीमत वाली यह चार मंजिला हवेली पारंपरिक बंगाली वास्तुकला, लकड़ी के फर्नीचर और घर के परिसर में बनी निजी क्रिकेट पिच के लिए भी मशहूर है।

सौरव ने अक्टूबर 2019 से अक्टूबर 2022 तक BCCI के 39वें अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। BCCI अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद सौरव गांगुली अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल लौटे और एक बार फिर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष बने।



