गंभीर बनाम ब्रेंडन मैकुलम: इंग्लिश कोच ने बैज बाॅल पर भरोसा किया,गौतम के टीम चेंजेस डिसीजन काम नहीं आए
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गौतम गंभीर और ब्रेंडन मैकुलम दोनों ही क्रिकेट में अपने एग्रेसिव नेचर, बेबाक सोच और खुलकर बोलने के लिए जाने जाते हैं।
स्पोर्ट्स डेस्क. गौतम गंभीर और ब्रेंडन मैकुलम दोनों ही क्रिकेट में अपने एग्रेसिव नेचर, बेबाक सोच और खुलकर बोलने के लिए जाने जाते हैं। मैदान पर हों या बाहर, दोनों कभी भी अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटते। लेकिन जब कोच के रूप में इनके काम को देखा जाए तो नतीजे और असर एक-दूसरे से काफी अलग नजर आते हैं। एक ने अपने आइडिया पर टिके रहकर टीम को एक दिशा दी, जबकि दूसरा लगातार बदलाव करता रहा और टीम के प्रदर्शन पर इसका असर हुआ।
जुलाई में इंग्लैंड और भारत के बीच ओवल टेस्ट से पहले गंभीर और मैकुलम को बातचीत करते देखा गया। आम फैन को यह अजीब लग सकता है, लेकिन क्रिकेट जानने वालों के लिए नहीं। दोनों पहले IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ काम कर चुके हैं और वहीं से दोनों को कोच के रूप में पहचान मिली।
मैकुलम की एग्रेसिव सोच
मैकुलम ने इंग्लैंड की टेस्ट टीम में “बैजबॉल” नाम की एग्रेसिव सोच लाई। इस सोच का मतलब था बिना डरे खेलना, तेज रन बनाना खेलना। जब मैकुलम ने इंग्लैंड की टेस्ट टीम संभाली, तब टीम बहुत बुरे दौर से गुजर रही थी। 19 मैचों में सिर्फ 1 जीत। ऐसे में मैकुलम की नई सोच ने टीम में जान डाल दी। इंग्लैंड ने पाकिस्तान और न्यूजीलैंड में जीत दर्ज की और फैंस को दोबारा टेस्ट क्रिकेट देखने में मजा आने लगा।

बैज बॉल परफेक्ट नहीं
हालांकि बैज बॉल पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। ऑस्ट्रेलिया और इंडिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ इंग्लैंड को अब भी मुश्किल होती है। एशेज में यह सामने दिख रहा है। विदेशी हालात में कई बार यह एग्रेसिव अंदाज उल्टा भी पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद, इंग्लैंड को पता है कि उनकी टीम किस तरह का क्रिकेट खेलेगी। यही मैकुलम की सबसे बड़ी ताकत है साफ सोच और लगातार एक जैसा रवैया।
गंभीर की कोचिंग पर सवाल
वहीं, टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर बात की जाए तो उन्हें एक मजबूत और सफल टीम इंडिया मिली थी। भारत T20I वर्ल्ड कप जीत चुका था, घर में टेस्ट सीरीज लगभग नहीं हारता था और विदेश में भी मुकाबला करता था। गंभीर ने आते ही आक्रामक और “एडैप्टेबल” क्रिकेट की बात की। हालांकि, नतीजे इसके पक्ष में नहीं दिखे।

भारत का घर में खराब प्रदर्शन
गंभीर के कोच रहते भारत ने घर में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज गंवाई। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी हाथ से निकल गई और श्रीलंका से वनडे सीरीज भी हारनी पड़ी। ये सब लंबे वक्त बाद हुआ। हाल ही में साउथ अफ्रीका के खिलाफ घर में टेस्ट सीरीज हार गए।
T20i और वनडे टीम में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। कोई खिलाड़ी अपनी जगह को लेकर पक्का नहीं है। अच्छे प्रदर्शन के बाद भी खिलाड़ियों को बाहर किया जा रहा है। यही वजह है कि फैंस और एक्सपर्ट्स गंभीर की सोच और फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।

