साइकिल चलाने पर पत्थर मारे गए: अफगानिस्तान की फरीबा ने हार नहीं मानी, अब एशियन गेम्स में सिल्वर जीता; जानिए स्ट्रगल स्टोरी
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23 साल की फरीबा ने अपनी बहन युलदुज के साथ 2017 में साइकिलिंग शुरू की थी। (फोटो सोर्स - सोशल मीडिया )
स्पोर्ट्स डेस्क. अफगानिस्तान की साइकिलिस्ट फरीबा हाशिमी ने एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीता। फरीबा महिलाओं की इंडिविजुअल रोड रेस में दूसरे नंबर पर रहीं। वह 2002 के बाद एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाली अफगानिस्तान की पहली महिला एथलीट बनीं। लेकिन 23 साल की फरीबा की यह जीत सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है। इसके पीछे संघर्ष, डर और अपने सपने के लिए लड़ने की लंबी कहानी है।
एक समय ऐसा भी था जब उन्हें साइकिल चलाने पर पत्थर भी मारे गए। लेकिन इस एथलीट ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से कई उपलब्धियां हासिल कीं। एशियन गेम्स का यह सिल्वर मेडल भी इस मेहनत का सबूत है।
पड़ोसी से साइकिल उधार लेकर चलाना सीखा
फरीबा ने अपनी बहन युलदुज के साथ 2017 में साइकिलिंग शुरू की थी। उस समय दोनों को साइकिल चलाना तक ठीक से नहीं आता था। एक दिन दोनों ने लोकल साइकिल रेस का एड देखा। पड़ोसी से साइकिल उधार ली। कुछ घंटे प्रैक्टिस की और रेस में उतर गईं। फरीबा ने वह रेस जीत ली। युलदुज दूसरे नंबर पर रहीं। फरीबा ने बाद में इस पल को याद करते हुए कहा था कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वह उड़ने वाली चिड़िया हैं।

पहचान छिपाकर करनी पड़ती थी प्रैक्टिस
फरीबा और युलदुज के लिए साइकिल चलाना आसान नहीं था। उत्तरी अफगानिस्तान के फरीयाब में महिलाओं का खुले में साइकिल चलाना स्वीकार नहीं किया जाता था। दोनों अपनी पहचान छिपाकर ट्रेनिंग करती थीं। सिर पर स्कार्फ, मास्क और सनग्लासेस लगाती थीं। कई बार फरीबा पुरुषों की तरह कपड़े पहनकर ट्रेनिंग करती थीं।
हालात बिगड़ते गए। साइकिल चलाते समय दोनों पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। गालियां दी गईं। एक बार रिक्शा चालक ने युलदुज को टक्कर मार दी। इससे उनकी कलाई टूट गई।
तालिबान की वापसी के बाद छोड़ना पड़ा देश
2020 में दोनों बहनों को अफगानिस्तान की नेशनल महिला साइकिलिंग टीम में जगह मिली। लेकिन 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। दोनों को अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा। बाद में वे इटली में बस गईं। यहीं से उन्होंने अपने साइकिलिंग कॅरियर को आगे बढ़ाया। फरीबा ने 2022 में अफगानिस्तान नेशनल चैंपियनशिप जीती। इसके बाद वह UCI रेस जीतने वाली पहली अफगान महिला बनीं।
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पेरिस ओलंपिक के बाद एशियन गेम्स में इतिहास
फरीबा और युलदुज ने 2024 पेरिस ओलंपिक में भी अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व किया। अब एशियन गेम्स में फरीबा ने सिल्वर मेडल जीत लिया है। उन्होंने मेडल जीतने के बाद कहा कि वह यहां पोडियम पर खड़े होने और अपने देश को रिप्रेजेंट करने का सपना लेकर आई थीं।
उन्होंने कहा कि यह सिल्वर मेडल अफगान महिलाओं की मजबूती की कहानी बता सकता है। उनके मुताबिक, वह अकेली नहीं हैं। उनके पीछे कई देशों की लाखों महिलाएं हैं, जो अपने सपने के लिए खड़ी हैं।
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रिफ्यूजी बनकर सपने पूरे किए
फरीबा ने अपनी जिंदगी के संघर्ष को लेकर कहा कि अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्हें लोगों के फेंके पत्थरों से बचकर निकलना पड़ा। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह रिफ्यूजी बन जाएंगी। लेकिन उन्हीं पत्थरों ने उन्हें अपनी आजादी के लिए लड़ने की ताकत दी। आज वही फरीबा एशियन गेम्स के पोडियम पर खड़ी हैं। हाथ में सिल्वर मेडल है और सामने पूरी दुनिया है।

