चिन्नास्वामी स्टेडियम अनसेफ: RCB परेड में भगदड़ के बाद विमंस वर्ल्ड कप, IPL मैचों की मेजबानी पर संकट
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18 साल बाद RCB ने IPL खिताब अपने नाम किया था। इसकी विक्ट्री परेड के दौरान भगदड़ मच गई थी। इसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी।
बेंगलुरु का एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम बड़े इवेंट्स को होस्ट करने के लिहाज से सेफ नहीं हैं। कर्नाटक कैबिनेट ने विमेंस वर्ल्ड कप और 2026 आईपीएल सीजन के अहम मुकाबलों की मेजबानी को लेकर आशंका जताई है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की आईपीएल जीत विक्ट्री परेड में हुई भगदड़ के लिए जांच कमेटी बनाई गई। जस्टिस जॉन माइकल डी कुन्हा आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि स्टेडियम की डिजाइन और बनावट ऐसी है कि जब ज्यादा लोग हो जाते हैं, तो यह सुरक्षित नहीं हैं। उस भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई थी और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के स्टेडियम होने चाहिए
आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि अब अगर यहां बड़े इवेंट होते हैं, तो लोगों की सुरक्षा को खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेडियम भीड़ को संभालने, इमरजेंसी में लोगों को बाहर निकालने और ट्रैफिक के लिहाज से भी सेफ नहीं है। आयोग ने सलाह दी है कि ऐसे इवेंट उन स्टेडियम में हों जो सेफ हों और जिन्हें बनाते समय इन बातों का ध्यान रखा गया हो। इसके साथ ही फ्यूचर में बड़े इवेंट्स उन जगहों पर कराए जाने चाहिए जो इंटरनेशनल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर खरे उतरते हों।
रिपोर्ट में चिन्नास्वामी स्टेडियम की कई खामियों का जिक्र किया गया है। 1974 में बने इस स्टेडियम में ठीक से क्यू यानी कतार और वेटिंग प्लेस नहीं हैं। यहां आने-जाने के लिए पर्याप्त गेट भी नहीं हैं, ताकि भीड़ कंट्रोल की जा सके। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से कनेक्टिविटी भी अच्छी नहीं है। इससे लोगों का सही वक्त पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इमरजेंसी गेट की कोई योजना भी नहीं हैं। पार्किंग और ड्रॉप-पिकअप के अरेंजमेंट्स भी ठीक नहीं हैं।
जिम्मेदारों पर एक्शन मुमकिन
कर्नाटक सरकार ने अब रिपोर्ट को मंजूर कर लिया है। इससे आरसीबी, कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA), इवेंट कंपनी डीएनए एंटरटेनमेंट और बेंगलुरु पुलिस के बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। सितंबर-नवंबर 2025 में यहां विमेंस वर्ल्ड कप के बड़े मैच होने वाले हैंं। अगले साल आईपीएल के मुकाबले भी होने हैं।
रिपोर्ट में कहा गया हैं कि 4 जून का इवेंट करने का फैसला तब लिया गया, जबकि सभी जानते थे कि भीड़ को संभालना मुश्किल होगा — साथ ही विधानसभा में भी उसी समय सरकारी कार्यक्रम था। जांच में पुलिस की बड़ी लापरवाहियां भी सामने आई हैं। सिर्फ 79 पुलिसकर्मी स्टेडियम के अंदर थे और बाहर कोई नहीं था, जबकि भीड़ काफी थी। मौके पर एम्बुलेंस भी नहीं थी और सीनियर अफसर देर से पहुंचे। ज्वाइंट कमिश्नर भी मौके पर देर से पहुंचे।
अब सरकार की मंजूरी से जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई शुरू हो सकती हैं। इनमें से कुछ अधिकारियों को पहले से ही निलंबित किया जा चुका है और लापरवाही व गैर-इरादतन हत्या के केस भी दर्ज हुए हैं।

