BCCI अब RTI के दायरे में नहीं: CIC का फैसला- भारतीय क्रिकेट बोर्ड अब पब्लिक अथॉरिटी नहीं माना जाएगा
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CIC ने फैसला सुनाते हुए कहा कि BCCI को RTI Act के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं माना जा सकता।
स्पोर्ट्स डेस्क. बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) को अब RTI के दायरे से बाहर कर दिया गया है। यह फैसला सोमवार (18 मई) को सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने सुनाया। उन्होंने कहा कि अब कानून के तहत BCCI को अब पब्लिक अथॉरिटी यानी सार्वजनिक संस्था नहीं माना जाएगा। आसान भाषा में कहें तो अब BCCI से RTI के जरिए सरकारी विभागों की तरह किसी भी प्रकार का जवाब नहीं मांगा जा सकेगा।
सरकार के अंडर में नहीं है BCCI
CIC का कहना है कि BCCI न तो सरकार की तरफ से बनाई गई संस्था है, न ही सरकार इसके कामकाज को पूरी तरह कंट्रोल करती है और न ही इसे सरकार से सब्सटेंशियल फंडिंग यानी बड़ी आर्थिक मदद मिलती है। इसी आधार पर आयोग ने यह फैसला दिया कि RTI Act की धारा 2(h) के तहत BCCI को RTI के दायरे में नहीं रखा जा सकता।
इस मामले में एक और अपील दायर की गई थी। इसमें पूछा गया था कि आखिर BCCI किस कानून के तहत भारत की टीम को रिप्रेजेंट करता है और इंटरनेशनल मैचों के लिए खिलाड़ियों का चयन कैसे करता है। लेकिन CIC ने इस अपील को खारिज कर दिया।

BCCI किसी संविधान के तहत नहीं बना
आदेश में यह भी साफ किया गया कि BCCI का कामकाज किसी सरकारी संस्था जैसा नहीं है। आयोग ने कहा कि BCCI न तो संविधान के तहत बना है और न ही संसद या किसी राज्य विधानसभा के कानून से इसकी स्थापना हुई है। यह एक स्वतंत्र खेल संगठन की तरह काम करता है। CIC ने यह भी कहा- सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। मतलब सरकार इसके रोजमर्रा के फैसलों, टीम चयन या प्रशासनिक मामलों में सीधे दखल नहीं देती।
BCCI अपनी कमाई खुद करता
फाइनेंशियल कंडीशन की बात करें तो BCCI अपनी कमाई खुद करता है। उसकी आमदनी मीडिया राइट्स, ब्रॉडकास्टिंग डील्स, स्पॉन्सरशिप और मैच टिकट्स से आती है। यानी यह पूरी तरह से एक मजबूत कमर्शियल बॉडी की तरह काम करता है, जो अपने खर्च और कमाई खुद संभालता है। CIC ने यह भी साफ किया कि सरकार से मिलने वाली टैक्स छूट या किसी तरह की रियायत को सरकारी फंडिंग नहीं माना जा सकता। इसी वजह से यह तर्क भी खारिज हो गया कि BCCI को सरकारी समर्थन मिलता है।
यह मामला 2018 से चला आ रहा है। तब तत्कालीन सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने BCCI को RTI के तहत पब्लिक अथॉरिटी माना था। तब बोर्ड को सूचना अधिकारी नियुक्त करने का आदेश भी दिया था। इसके बाद BCCI ने मद्रास हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी। वहां से इस मामले को CIC के पास भेज दिया गया। इसी मामले में सुनवाई करते हुए CIC ने फैसला सुनाया है।

