Yo-Yo के साथ अब Bronco टेस्ट भी जरूरी: रग्बी से इंस्पायर BCCI का फैसला; प्लेयर्स की फिटनेस ज्यादा बेहतर होगी
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Bronco टेस्ट की शुरुआत हेड कोच गौतम गंभीर और स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन लेरू ने की है। (फोटो फाइल)
स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया के प्लेयर्स अब सिर्फ Yo-Yo टेस्ट पास करना काफी नहीं होगा। इसके बाद अब एक नया फिटनेस टेस्ट जोड़ा गया है, इसका नाम ब्रोंको (bronco) है। यह फैसला हेड कोच गौतम गंभीर और स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन लेरू ने लिया है। इस टेस्ट का मकसद प्लेयर्स की फिटनेस को और बेहतर बनाना है।
रग्बी से इंस्पिरेशन
ब्रोंको टेस्ट रग्बी प्लेयर्स के लिए मेंडेटरी है, हालांकि अब इसे टीम इंडिया के लिए भी अमल में लाया जा रहा है।
इस टेस्ट में खिलाड़ी को 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर रनिंग करनी होती है। ये तीनों मिलाकर एक सेट बनता है। प्लेयर को ऐसे 5 सेट लगातार यानी बिना रुके दौड़ने होते हैं। कुल मिलाकर 1200 मीटर की रनिंग होती है। इसे 6 मिनट में पूरा करना होता है।
बॉलर्स के लिए बेहद फायदेमंद
BCCI मानती है कि कई गेंदबाज जिम में तो मेहनत करते हैं, लेकिन मैदान पर दौड़ की प्रैक्टिस कम कर रहे हैं। एड्रियन ने लगातार रनिंग करने के लिए इस टेस्ट को जरूरी माना। अब बॉलर्स या दूसरे प्लेयर्स ग्राउंड या मैच फिटनेस बेहतर परखी जा सकेगी।
कोहली ने शुरू किया था Yo-Yo टेस्ट
Yo-Yo टेस्ट टीम इंडिया में 2017 में लाया गया था। तब विराट कोहली कप्तान थे। इस टेस्ट में प्लेयर को 20 मीटर की दूरी पर बार-बार दौड़ना होता है। हर बार दौड़ने के बाद थोड़ा आराम मिलता है और हर राउंड में दौड़ने की स्पीड बढ़ती जाती है। इसमें प्लेयर की रिकवरी यानी थक कर फिर से तैयार होने की काबिलियत देखी जाती है। इस टेस्ट को पास करने के लिए 17.1 या उससे ज्यादा स्कोर चाहिए।

Yo-Yo ब्रोंको टेस्ट फर्क
Yo-Yo टेस्ट में खिलाड़ी को रुक-रुक कर रनिंग करनी होती है। इसमें ब्रेक मिलता है। यह टेस्ट देखता है कि खिलाड़ी कितनी जल्दी थककर फिर से दौड़ने के लिए तैयार हो सकता है।
वहीं, ब्रोंको टेस्ट में कोई ब्रेक नहीं होता। प्लेयर को लगातार दौड़ना पड़ता है। यह टेस्ट खिलाड़ी का स्टेमिना और हार्ट रेट चेकर करने का बेहतरीन तरीका है।
2 किलोमीटर रनिंग भी जरूरी
2 किलोमीटर रनिंग तय वक्त में पूरा करनी होती है। तेज गेंदबाजों को यह रनिंग 8 मिनट 15 सेकंड में पूरी करनी होती है। दूसरी तरफ बैटर, विकेटकीपर और स्पिनर्स को यह दौड़ 8 मिनट 30 सेकंड में पूरी करनी होती है।

