कप्तानी में इंग्लिश बैरियर क्यों : अक्षर पटेल बोले- खुद को हिम्मत वाला नहीं मानता, जो भी प्लान करता हूं, अच्छे माइंडसेट से करता हूं
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स्पिन ऑलराउंडर अक्षर पटेल 168 इंटरनेशनल मैच खेल चुके है। इसमें 209 विकेट लिए हैं। (फाइल)
स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया के ऑलराउंडर अक्षर पटेल आज हर फॉर्मेट में भरोसे का दूसरा नाम बन चुके हैं। चाहे रन की जरूरत हो, विकेट चाहिए हो मैच में टीम को संभालना हो, सबको भरोसा होता है, अक्षर है न। हालांकि अक्षर खुद को ‘डेरिंग’ (daring) नहीं मानते। उनका कहना है कि वो जो भी करते हैं, वो पूरी तैयारी और अच्छे माइंडसेट से करते हैं। हाल में उन्होंने अपने खेल और कप्तानी को लेकर खुलकर बात की है।
सोच समझ कर काम करता हूं
अक्षर ने एक इंटरव्यू में कहा- मुझे ‘डेरिंग’ कहे जाने से अच्छा नहीं लगता। डेरिंग का मतलब होता है बिना सोचे कुछ कर देना। जैसे शॉट लग गया तो लग गया। मैं ऐसा नहीं हूं। मैं इतनी तैयारी करता हूं कि मुझे खुद पर भरोसा होता है। सबसे बड़ी चीज कॉन्फिडेंस है।
प्लेयर की कमजोरी पता करता हूं
अक्षर ने आगे कहा- चाहे कोई भी टीम या फॉर्मेट हो मैं हमेशा पहले से तैयारी करता हूं। अपोजिशन टीम के बैटर के वीडियो देखता हूं। उनके स्ट्रोक्स समझता हूं। मुझे सरप्राइज पसंद नहीं। मैं पहले से जान लेता हूं कि कौन खिलाड़ी क्या करता है। इससे मुझे मैच में आसानी होती है। अक्षर मैदान पर हमेशा मस्ती करते दिखते हैं। हालांकि उनका मैच में काफी डेडिकेशन दिखता है।
अक्षर कहते हैं- मुझे दुनिया को नहीं दिखाना कि मैं कितना सीरियस हूं। मेरा काम है तैयारी करना और अच्छा खेलना। दुनिया को बताने की जरूरत नहीं। मैच में अच्छा परफॉर्मेंस कर टीम को जीत दिलाकर अपने काम पर फोकस करता रहूं। बैटिंग नहीं कर रहा होता, तो मैं बस थोड़ा बहुत मैच देखता हूं। बाकी टाइम साथियों से हंसी-मजाक करता हूं। मुझे रिलैक्स रहना पसंद है।

कप्तानी में लैंग्वेज बैरियर क्यों
कप्तानी के बारे में अक्षर ने कहा- दिल्ली कैपिटल्स की कमान संभालते टाइम मैंने सबको खुश किया। हालांकि वो इस बात से नाराज हैं कि लोगों के लिए अच्छी इंग्लिश बोलने वाला ही अच्छा कप्तान होता है।
फैन्स के मुताबिक- इंग्लिश नहीं बोल पाता, तो कप्तान कैसे बनेगा। लेकिन कप्तान का काम बोलना नहीं, टीम को समझना है। हर खिलाड़ी की ताकत और कमजोरी पहचानना है। अक्षर का मानना है कि कप्तानी लैंग्वेज बैरियर नहीं होना चाहिए। लोग सोचते हैं कि जो सोशल मीडिया पर एक्टिव है। जो इंग्लिश में बात करता है, वही लीडर बन सकता है। हालांकि प्लेयर और कोच जानते हैं कि असली वैल्यू क्या है।

अक्षर का मूल मंत्र
अक्षर ने आखिर में कहा- बस यही मायने रखता है कि क्रिकेट समझने वाले लोग आपकी वैल्यू जानते हैं। बाकी लोग क्या सोचते हैं, उससे फर्क नहीं पड़ता। बस अपना काम करो और चुपचाप आगे बढ़ो।

