बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए ऑस्ट्रेलिया का प्लान: ऑस्ट्रेलिया की 3 टीमें आएंगी, 30 दिन में 16 मैच; जानिए कब-कहां और कौन सी टीमें मैच खेलेंगी
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2004-05 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-1 से हराया था। उस टीम की कप्तानी रिकी पोंटिग कर रहे थे। (फाइल)
स्पोर्ट्स डेस्क. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम इस बार सिर्फ भारत दौरे पर मैच खेलने नहीं आ रही, बल्कि अगले साल होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) की बड़ी तैयारी कर रही है। पिछले 20 साल से ऑस्ट्रेलिया भारत में कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाया है। आखिरी बार कंगारू टीम ने 2004-05 में भारत को टेस्ट सीरीज में हराया था। अब इसी सूखे को खत्म करने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने खास प्लान बनाया है।ऑस्ट्रेलिया जानता है कि भारत में जीतना आसान नहीं है। यहां की स्पिन पिचें, गर्म मौसम और लंबे मैच विदेशी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं। इसी वजह से इस बार ऑस्ट्रेलिया सिर्फ सीनियर टीम नहीं, बल्कि A टीम, महिला A टीम और अंडर-19 टीम को भी भारत भेज रहा है।सितंबर और अक्टूबर में ये टीमें भारत में मैच खेलेंगी ताकि खिलाड़ी भारतीय पिचों और परिस्थितियों को पहले से समझ सकें।
2004 में मिली थी आखिरी जीत
2004-05 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-1 से हराया था। उस टीम की कप्तानी रिकी पोटिग कप्तानी कर रहे थे। टीम में मैथ्यू हेडन, एडम गिलक्रिस्ट, शेन वॉर्न और ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गज खिलाड़ी मौजूद थे।उसके बाद से ऑस्ट्रेलिया भारत में एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीत सका।
A टीम का दौरा सबसे अहम
सबसे ज्यादा फोकस ऑस्ट्रेलिया A टीम पर है। क्योंकि इसी टीम के कई खिलाड़ी आगे चलकर टेस्ट टीम का हिस्सा बन सकते हैं। अगले साल जनवरी में नागपुर से बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी शुरू होनी है।ऑस्ट्रेलिया के पास इस बार तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं होगा। न्यूजीलैंड सीरीज खत्म होने के तुरंत बाद टीम को भारत आना पड़ेगा। इस टूर से टेस्ट टीम के करीब रहने वाले युवा खिलाड़ियों को बहुत फायदा मिला। ऐसे में A टीम का यह दौरा प्रैक्टिस नहीं बल्कि जरूरत माना जा रहा है।पिछले बार भारत में हुई सीरीज में युवा सैम कॉनस्टास, कैंपबेल केलावे, कूपर कॉनॉली, जेवियर बार्टलेट और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारत की कंडीशन समझने का अच्छा मौका मिला था।

भारतीय पिचों से क्या सीखना चाहता है ऑस्ट्रेलिया?
पिछले भारत दौरे पर ऑस्ट्रेलिया A टीम के खिलाड़ियों ने माना था कि उन्हें भारतीय पिचों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। लाल मिट्टी और काली मिट्टी की विकेट अलग तरह से खेलती हैं, यह बात कई युवा खिलाड़ियों को यहां आकर समझ आई।
स्पिनर टॉड मर्फी को भारतीय मौसम में गेंद पकड़ने की तकनीक सीखनी पड़ी, जबकि बल्लेबाजों को समझ आया कि ज्यादा गर्मी में फिटनेस और एनर्जी कैसे बचानी होती है।
जूनियर लेवल पर भी फोकस
ऑस्ट्रेलिया की महिला A टीम भी लंबे समय बाद भारत आ रही है। वहीं अंडर-19 टीम भी यहां कई मैच खेलेगी। इसका मकसद साफ है भविष्य के खिलाड़ियों को पहले से भारतीय हालात की आदत डालना।ऑस्ट्रेलिया अब लॉन्ग टर्म प्लानिंग पर काम कर रहा है ताकि आगे आने वाले सालों में भारत दौरा खिलाड़ियों के लिए मुश्किल न लगे।

भारत में ऑस्ट्रेलिया को सबसे बड़ी दिक्कत क्या?
ऑस्ट्रेलिया में पिच तेज गेंदबाजों के लिए मददगार होती हैं, जबकि भारत में स्पिनरों का दबदबा रहता है। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज यहां अक्सर संघर्ष करते नजर आते हैं।इंडिय में सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि धैर्य और मजबूती भी बहुत जरूरी होती है।
A टीम का दौरा क्यों सबसे अहम?
ऑस्ट्रेलिया A टीम के कई खिलाड़ी आगे चलकर टेस्ट टीम का हिस्सा बनेंगे। इसलिए बोर्ड चाहता है कि वे पहले से भारतीय पिचों पर खेलकर अनुभव हासिल करें।पिछले दौरे में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने माना था कि उन्हें लाल मिट्टी और काली मिट्टी की विकेट का फर्क तक ठीक से नहीं पता था। कई खिलाड़ियों को भारतीय गर्मी और स्पिन में खुद को ढालने में परेशानी हुई थी।
ऑस्ट्रेलिया A टीम का पूरा शेड्यूल
22-25 सितंबर: पहला फोर डे मैच, पुडुचेरी
29 सितंबर-2 अक्टूबर: दूसरा फोर डे मैच
6 अक्टूबर: पहला वनडे
9 अक्टूबर: दूसरा वनडे
11 अक्टूबर:तीसरा वनडे
महिला A टीम का शेड्यूल
12 सितंबर :पहला टी20
15 सितंबर: दूसरा टी20
17, 20, 23 सितंबर: वनडे सीरीज
29 सितंबर-2 अक्टूबर: फोर डे मैच

ऑस्ट्रेलिया U-19 टीम का शेड्यूल
18, 21, 23 सितंबर: वनडे मैच
27-30 सितंबर:पहला फोर डे मैच
5-8 अक्टूबर: दूसरा फोर डे मैच

