सेना और अर्धसैनिक बलों में क्या अंतर?: बॉर्डर पर तैनात क्यों नहीं होती इंडियन आर्मी, पैरामिलिट्री फोर्स के पास है जिम्मेदारी
Published:
7 min read

भारत के पास चीन के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी एक्टिव आर्मी है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के मुताबिक, अभी भारत के पास 14 लाख से अधिक एक्टिव सैनिक हैं जबकि 11 लाख से अधिक सैनिक रिजर्व हैं। इसके साथ ही 16 लाख से अधिक पैरामिलिट्री फोर्स के जवान हैं। 50 हजार से अधिक जवान टेरिटोरियल आर्मी में है। भारतीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना के पास नहीं बल्कि पैरा मिलिट्री फोर्सेस के पास होती है। सेंट्रल आर्मड पुलिस फोर्स (CAPF) केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंडर काम करती हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर BSF, चीन सीमा पर ITBP, नेपाल- भूटान सीमा पर SSB के जवान तैनात रहते हैं। लेकिन जब युद्ध होता है तब आर्मी ही मूख्य भूमिका में होती है। इस स्टोरी में सेना और अर्ध-सैन्य बल क्या होते हैं और बॉर्डर पर सेना क्यों तैनात नहीं होती इसके बारे में जानेंगे।
मिलिट्री
भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। युद्ध, सीमाओं की रक्षा, सैन्य अभियान, दुश्मन पर हमला जैसे अभियान में भारतीय सेना शामिल होती है। सेना को भारी हथियार, मिसाइल, टैंक, फाइटर जेट की ट्रैनिंग दी जाती है। सेना में कैप्टन, कर्नल, मेजर जैसे पद होते हैं। आर्मी संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना मिशन में भी हिस्सा लेती हैं। सेना में पद के हिसाब से रिटायरमेंट की अलग-अलग उम्र होती है। सिपाही 17 से 19 साल की सर्विस या 35 साल की उम्र (जो पहले हो) में रिटायरमेंट दी जाती है। हलवदार 24 साल की सर्विस या 40 साल उम्र में रिटायरमेंट दी जाती है। सूबेदार मेजर 34 साल की सर्विस या 46 साल उम्र में रिटायर होते हैं। सेना में मेजर की रिटायरमेंट उम्र 52 साल होती है। जबकि सेना प्रमुख 62 साल या फिर 3 साल का कार्यकाल में (जो पहले) रिटायर होते हैं।
-
थल सेना (INDIAN ARMY)
थल सेना की स्थापना 26 जनवरी 1950 में हुई थी इससे पहले इंडियन आर्मी को ब्रिटिश इंडियन आर्मी कहा जाता था। थल सेना विश्व की दूसरे नंबर की सबसे बड़ी स्थायी सेना है। भारत के राष्ट्रपति थल सेना के प्रधान सेनापति होते हैं। थल सेना की कमान थल सेना अध्यक्ष के पास होती है। थल सेना में अभी 12 लाख से अधिक जवान तैनात हैं जबकि 9 लाख से अधिक जवान रिजर्व हैं।
-
नौसेना (INDIAN NAVY)
भारतीय नौ सेना समुद्री क्षेत्रों की रक्षा करती है। और समुद्री इलाकों पर नजर रखती है। नौसेना की कमान नौसेना अध्यक्ष के पास होती है। इंडियन नेवी की स्थापना ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1612 में की थी। तब इसे इंडियन मरीन के नाम से जाना जाता था। नौसेना इंडिया एयर फोर्स की भी मदद करते हैं। वायुसेना के फाइटर जेट युद्धपोत से फ्लाइंग करते हैं। आजादी के समय नेवी का नाम रॉयल इंडियन नेवी था। बंटवारे के बाद एक तिहाई नौसेना पाकिस्तान चली गई। नौ सेना ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर भारी तबाही की थी। और दुश्मन के कई जहाज और पनडुब्बी को डुबो दिया था। अभी भारतीय नौसेना में कुल 1 लाख 42 हजार से अधिक जवान हैं, जिसमें 11 हजार 979 अधिकारी शामिल हैं।
-
वायु सेना (INDIAN AIR FORCE)
भारतीय वायु सेना का 8 अक्टूबर 1932 में गठन हुआ था। आजादी से पहले इसका नाम रॉयल इंडियन एयरफोर्स था। इंडियन एयरफोर्स देश के हवाई क्षेत्र की रक्षा करती है। 1950 के बाद से इंडियन एयरफोर्स ने अब तक 4 युद्ध में भाग लिया है।
बॉर्डर पर सेना क्यों तैनात नहीं होती
दरअसल आर्मी के पास हैवी वेपन्स होते हैं। अगर आर्मी को बॉर्डर पर डिप्लॉय कर दिया तो मामूली फायरिंग पर ही बड़े हमले हो सकते हैं। और युद्ध की स्थिति बन सकती है जबकि अर्ध सैन्य बलों के पास छोटे हथियार होते हैं। जिससे बॉर्डर पर स्थिति कंट्रोल में रहती है। अगर बॉर्डर पर स्थिति बिगड़ती है तब गृह मंत्रालय रक्षा मंत्रालय से कॉर्डिनेट करता है।
पैरा मिलिट्री- अर्ध-सैन्य बल
CAPF- सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्स (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल), गृहमंत्रालय के अंडर काम करते हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ होते हैं। बॉर्डर की सुरक्षा, किसी VIP को सुरक्षा देना और इंडस्ट्रियल जगह भी इनकी तैनाती होती है। अर्ध-सैन्य बलों को पुलिस रैंक दी जाती है। जैसे DIG, IG कॉन्सटेबल आदि। पैरा मिलिट्री (CAPF) में 7 तरह के सुरक्षा बल होते हैं। पैरा मिलिट्री फोर्स में IPS अधिकारी इसे लीड करते हैं। इनकी रिटायरमेंट 60 साल की उम्र में होता है।
-
ASSAM RIFLES
-
BSF
-
ITBP
-
SSB
-
CRPF
-
CISF
-
NSG
असम राइफल्स(AR)
असम राइफल्स की स्थापना 1835 में मिलिशिया के रुप में की गई थी।असम राइफल्स को कछार लेवी के नाम से भी जाना जाता है। बिट्रिश काल में चाय के बागानों की सुरक्षा में इनकी तैनाती हुई थी। अभी असम राइफल्स चीन और म्यांमार सीमा की सुरक्षा में तैनात है। उत्तर पूर्व क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियान में असम राइफल्स शामिल है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय असम राइफल्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आदिवासी क्षेत्रों में तैनाती के कारण इन्हें ‘उत्तर पूर्व का मित्र’ भी कहा जाता है।
BSF- बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स
BSF यानी सीमा सुरक्षा बल का गठन भारत-पाक 1965 युद्ध के बाद हुआ था। यह विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल है। BSF का काम पाकिस्तान- बांग्लादेश बॉर्डर की निगरानी रखना, घुसपैठ रोकना और सीमावर्ती इलाकों में लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है। BSF के पास अभी 192 बटालियन हैं। और 6385 किमी से अधिक इंटरनेशनल बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। केंद्रीय राज्य गृह मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि, BSF में 2 लाख 65 हजार से अधिक जवान स्वीकृत है।
ITBP- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस
ITBP की स्थापना 1962 में की गई थी। ITBP एक विशेष पर्वतीय सैन्य बल है। जो 9 हजार फीट से लेकर 18 हजार फीट पर स्थित चौकियों की निगरानी करता है। ITBP लद्दाख से अरुणाचल तक की सीमा पर तैनात रहती है। ये भारत- चीन सीमा का 3488 किमी का एरिया कवर करती है।
CRPF- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल
1939 में जब इसकी स्थापना हुई थी तब इसका नाम क्राउन रिप्रेंजेटेटिव्स पुलिस था। 1949 में केंद्रीय रिजर्व बल के रुप में नामित किया गया। CRPF आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रमुख सुरक्षा बल है।
SSB- सशस्त्र सीमा बल
SSB की स्थापना 1963 में की गई थी। SSB भारत- नेपाल और भारत- भूटान सीमा की सुरक्षा करती है। इसका काम सीमा सुरक्षा बढ़ाना, सीमा पार अपराध पर अंकुश लगाना, अनाधिकृत प्रवेश रोकना और तस्करी को रोकना है।
CISF- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की 1969 में स्थापना हुई थी। जिसका काम सरकारी उद्योग और विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा करना है। CISF सार्वजनिक और प्राइवेट संस्थानों की सुरक्षा के आलावा VIP लोगों की सुरक्षा, मेट्रो, परमाणु संस्थान, ऐतिहासिक धरोहरों की भी सुरक्षा करता है।
NSG- नेशनल सिक्योरिटी गार्ड
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद 1986 में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अस्तित्व में आया था। जिसे ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है। आतंकवादी हमलों को रोकने, बंधक मुक्त कराने, आंतरिक गड़बड़ियों से निपटने और हाईप्रोफाइल मिशन के लिए जाना जाता है। NSG की ट्रैनिंग और भर्ती प्रक्रिया बहुत टफ होती है। NSG कमाडो यूएस आर्मी के स्पेशल फोर्सेज ‘ग्रीन बेरेट्स’ के साथ नियमित अभ्यास करते हैं। NSG कमांडों एडवांस वेपन्स से लैस होते हैं। 2008 में मुंबई आतंकी हमले में NSG ने ही बंधकों को बचाया था। NSG को ज्यादातर इमरजेंसी ऑपरेशन में लगााया जाता है। 35 साल की उम्र होने के बाद इन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया जाता है।
टेरिटोरियल आर्मी
टेरिटोरियल आर्मी सैनिक से अलग होती है जिसमें आम नागरिक शामिल हो सकते हैं। इन्हें भी सैनिकों की तरह ही ट्रेंनिंग दी जाती है। यह एक तरह का रिजर्व बल है जो जरुरत पड़ने पर सैनिक वर्दी पहनने के लिए उत्सुक रहता है। इसका गठन अंग्रेजों ने 1920 में किया था। 1948 में प्रादेशिक सेना अधिनियम पारित करने के बाद 1949 में भारतीय गवर्नर-जनरल सी राजगोपालाचारी ने स्थापना की थी। टेरिटोरियल आर्मी ने 1962, 1965 और 1971 में बड़ी भूमिका निभाई थी।
भूकंप, प्राकतिक आपदा, बाढ़ और हादसे में भी टेरिटोरियल आर्मी मदद करती है। टेरिटोरियल आर्मी में एमएस धोनी, नीरज चोपड़ा, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर अभिनव बिंद्रा जैसे खिलाड़ी हैं। जब ये लोग ट्रेनिंग या फिर सर्विस देते हैं उन्हें उतने दिन की सैलरी मिलती है। सरकारी वेबसाइट के अनुसार भारत के पास अभी 50 हजार से अधिक टेरिटोरियल आर्मी है। जो रेलवे, इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, खिलाड़ी सहित कई विभागों के अधिकारी कर्मचारी हैं।

