धनखड़ का इस्तीफा मंजूर: कैसे होती है उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग, कितना होगा नए सभापति का कार्यकाल; Q&A में जानें सबकुछ
Published:
4 min read

जगदीप धनखड़
जगदीप धनखड़ ने सोमवार देर रात उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? अब कौन उपराष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेगा?
Q. उपराष्ट्रपति की गैर मौजूदगी में जिम्मेदारी कौन संभालेगा?
उपराष्ट्रपति राज्यसभा के चेयरमैन होते हैं। अभी हरिवंश नारायण सिंह डिप्टी चेयरमैन हैं। उपराष्ट्रपति की गैर मौजूदगी में डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह हाउस की अध्यक्षता करेंगे। वे 2020 से राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन पद पर हैं। उनका कार्यकाल इसी महीने खत्म होने वाला है। उपराष्ट्रपति का इस्तीफा स्वीकार हुआ तो नया उपराष्ट्रपति चुने जाने तक उपसभापति ही राज्यसभा (अनुच्छेद 91 के तहत) के चैयरमैन होंगे। लेकिन उन्हें उपराष्ट्रपति का कार्यभार नहीं मिलेगा, क्योंकि संविधान में कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का कोई प्रावधान नहीं है।
Q. उपराष्ट्रपति के चुनाव कब होंगे?
राष्ट्रपति के मामले में संविधान में 6 महीने के अंदर चुनाव कराने का प्रावधान है। लेकिन उपराष्ट्रपति के लिए ऐसी कोई फिक्स डेडलाइन नहीं है। एक मात्र यही शर्त है कि उपराष्ट्रपति के पद के लिए यथाशीर्घ चुनाव कराया जाए। चुनाव आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति के चुनाव का शेड्युल जारी करेगा। उपराष्ट्रपति का चुनाव ‘राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम 1952’ के तहत होता है। परंपरा के अनुसार संसद के किसी भी जनरल सेकेट्री को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जाता है।
Q. नए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल कितना होगा?
धनखड़ का कार्यकाल 2027 में खत्म होना था। लेकिन उन्होंने 2 साल पहले ही इस्तीफा दे दिया। हालांकि, नए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरे 5 साल का होगा। इसमें धनखड़ का कार्यकाल नहीं जुड़ेगा।
Q. उपराष्ट्रपति चुनाव कैसे होगा?
संविधान के आर्टिकल 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति को दोनों सदन से बने निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) द्वारा चुना जाता हैं, इनमें राज्यसभा के नामित सदस्य भी शामिल होते हैं। इस चुनाव में राष्ट्रपति चुनाव जैसे राज्य विधानसभाएं भाग नहीं लेती। चुनाव के लिए वोटिंग नई दिल्ली के पार्लियामेंट हाउस में होती है। चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के जरिए होता है। ये वोटिंग सीक्रेट बैलेट के जरिए होती है। हर सदस्य का एक ही वोट होता है। उसे प्राथमिकता के आधार पर नंबर देना होगा। हर सदस्य रैंकिग के आधार पर उम्मीदवारों को वोट डालता है। सभी वोटों की एक ही वैल्यू होती है। बैलेट पेपर पर वोटर को पहली पसंद को 1, दूसरी को 2 और इसी तरह से प्राथमिकता तय करनी होती है।
इसे ऐसे समझिए
अगर A, B और C नाम के उम्मीदवार उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे हैं, तो वोटर को हर किसी के नाम के आगे अपनी पहली पसंद बतानी होगी। इसके लिए वोटर को A उम्मीदवार के आगे 1, B के आगे 2 और C के आगे 3 लिखना होगा।
इसे इस उदाहरण से समझिए
मान लीजिए चुनाव में 787 सदस्यों (राज्यसभा 245 और लोकसभा 543 सांसद) ने वोट डाले। इसे 2 से भाग देने पर 393.50 नंबर आया। इसमें 0.50 को नहीं गिना जाता, अब यह नंबर 393 हुए। इसमें 1 जोड़ने पर 394 नंबर आया। उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए 394 वोट जरूरी है। इस नंबर को कोटा कहते हैं। जीतने वाले उम्मीदवार को कोटा जितने नंबर की जरूरत होती है। पहली प्राथमिकता के आधार पर उम्मीदवार को कोटा जितने वोट मिल जाते हैं तो उसे जीता हुआ मान लिया जाता है। अगर पहली प्राथमिकता में जीत के जरुरी वोट नहीं मिलते तो तो सबसे कम नंबर वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है। और उसके वोट दूसरे नंबर के उम्मीदवार में जोड़ दिए जाते हैं। अगर फिर भी रिजल्ट नहीं आता तो यही प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है। किसी भी विवाद की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट (आर्टिकल-71) को फैसला लेने का अधिकार है।
Q. उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए योग्यता?
- भारतीय नागरिक होना चाहिए
- उम्र 35 साल या उससे अधिक हो
- वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के लिए योग्य हो
- मतदाता सूची में नाम होना चाहिए
- उन्हें राष्ट्रपति, राज्यपाल या मंत्री जैसे पदों को छोड़कर, केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए
- उम्मीदवार को 15 हजार रुपये भी जमा कराने होते हैं, चुनाव हार जाने पर या 1/6 वोट नहीं मिलने पर राशि वापस नहीं मिलती।
Q. उपराष्ट्रपति की भूमिका?
उपराष्ट्रपति देश का दूसरा संवैधिनिक सर्वोच्च पद होता है। उपराष्ट्रपति किसी सदन के सदस्य या फिर राज्य विधानसभा के सदस्य नहीं होते। संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रुप में कार्य करते हैं। इस दौरान उनके पास राष्ट्रपति की सभी शक्तियां और विशेषाधिकार हासिल होते हैं। उपराष्ट्रपति को ऐसे प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकता है, जिसमें राज्यसभा से बहुमत प्राप्त हो, जिससे लोकसभा भी सहमत हो।

