अमेरिकी नागरिक के इमिग्रेशन केस का निपटारा: FRRO में जमा किए 5.5 लाख रुपए; वैनडाइक को कोर्ट ने दी थी जमानत
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अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को 13 मार्च 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। 2011 में लिबिया में उसे युद्धबंदी भी बनाया गया था।(फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क. अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक ने इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत इमिग्रेशन से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामलों को निपटाने के लिए फॉरेनर्स रीजनरल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) में 5.5 लाख रुपए की कम्पाउंडिंग फी जमा की है। ANI के मुताबिक, 18 दिसंबर को FRRO के आदेश के बाद वैनडाइक ये राशि जमा की है।
कोर्ट ने वैनडाइक को जमानत दी
18 सितंबर को NIA की स्पेशल कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दी थी। हालांकि, उसके दिल्ली छोड़ने पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जांच के दौरान जब भी NIA उसे पूछताछ के लिए बुलाएगी, उसे हाजिर होना होगा। वैनडाइक के साथ 6 यूक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया था।
चार्जशीट में UAPA के तहत आरोप नहीं
वैनडाइक जब गिरफ्तार हुआ था, अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट यानी UAPA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन हाल ही में NIA ने इन आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर एक्ट (IFA) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई गई थीं। इसके बाद सवाल उठ रहे थे कि क्या जांच एजेंसी ने इन आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित आरोप हटा दिए।
हालांकि कोर्ट ने कहा था कि जब तक बड़ी जांच चल रही है, तब तक NIA वैन डाइक को डिफॉल्ट जमानत के कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए अधूरी चार्जशीट का सहारा नहीं लिया जा सकता।
सरकार ने दी थी सफाई
विवाद बढ़ने पर केंद्र सरकार ने कहा था कि NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद की जांच बंद नहीं की है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर एक्ट (IFA) के तहत चार्जशीट दाखिल करने के फैसले का मतलब अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट यानी UAPA के तहत जांच बंद करना नहीं है।

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वैनडाइक पर क्या आरोप
NIA के मुताबिक आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसने नियमों का उल्लंघन किया। विदेशी नागरिकों को मिजोरम में प्रवेश के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट जरूरी होता है। इसके बावजूद ये लोग मिजोरम के रास्ते म्यांमार के चिन इलाके में अवैध रूप से दाखिल हुए। जांच में सामने आया है कि यह रूट अब ऐसे नेटवर्क के लिए एंट्री प्वाइंट बनता जा रहा है।
आर्म्ड ग्रुप्स को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई
एजेंसी का दावा है कि इन विदेशी नागरिकों ने म्यांमार में जातीय आर्म्ड ग्रुप्स को हथियारों की ट्रेनिंग दी। इन समूहों पर नोर्थ-ईस्ट में एक्टिव उग्रवाइी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा आरोप है कि यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप मंगवाकर मिजोरम के जरिए इन ग्रुप्स तक पहुंचाई गई। इससे पूरे मामले में एक ऑर्गनाइज्ड इंटरनेशनल नेटवर्क के तार जुड़े होने की बात सामने आई है।

