उत्तराखंड का खूनी गांव अब देवीग्राम: कई दशक बाद नाम बदलवाने में कामयाबी; 1 साल प्रॉसेस चला, 6 मंत्रालयों की मंजूरी लेनी पड़ी
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तस्वीर में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। उनकी सरकार को खूनी गांव का नाम बदलने में आखिरकार कामयाबी मिली। (फाइल फोटो)
देवभूमि की पहचान रखने वाले उत्तराखंड के एक गांव का नाम ‘खूनी’ था। अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने इसका नाम ‘देवीग्राम’ कर दिया है। इसके लिए क्षेत्र के लोग लंबे वक्त से मांग भी कर रहे थे। आखिरकार पुष्कर सिंह धामी सरकार नाम बदलने को तैयार हुई और अब सरकारी रिकॉर्ड में नया नाम ही दर्ज होगा।
उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यह राज्य प्राचीन मंदिरों, धार्मिक महत्व और पवित्र तीर्थस्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां कई ऐसे गांव हैं, जो अपनी सुंदरता के साथ-साथ विचित्र नामों की वजह से जाने जाते हैं। पिथौरागढ़ में ऐसा ही एक गांव 'खूनी' नाम से था। यहां 60 परिवार रहते हैं। अब इस गांव का नाम ‘देवीग्राम’ कर दिया गया है।
नोटिफिकेशन भी जारी
उत्तराखंड सरकार ने लोगों की मांग का सम्मान करते हुए नाम में बदलाव को मंजूरी दी है। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। वहां से मंजूरी मिलने के बाद रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने फॉर्मल नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा- ग्रामीण लंबे समय से नाम बदलने की मांग कर रहे थे। अब खूनी गांव का नाम बदलकर देवीग्राम कर दिया गया है।
सांसद ने भी मांग की थी
खूनी गांव के लोग लंबे वक्त से नाम बदलने की मांग कर रहे थे। ONGC के पूर्व महाप्रबंधक ललित मोहन जोशी भी गांव को एक बेहतर पहचान दिलाने की कोशिश में जुटे रहे। उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे को उठाया था। ग्रामीणों ने सांसद अजय टम्टा और धामी के सामने अपनी परेशानी बताई। टम्टा की मदद से उनका पत्र राज्य सरकार तक पहुंचाया गया। 18 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंजूरी दी। इसके बाद राज्य राजस्व विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया।
टम्टा कहते हैं- नाम बदलवाने का यह काम आसान नहीं था, क्योंकि इसके लिए कॉन्सटीट्यूशनल प्रॉसेस होता है। हमने एक साल तक इस काम में जुटे रहे। इस दौरान 6 मंत्रालयों की मंजूरी लेनी पड़ी। इसके बाद ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी हो सका। अब हर कोई खुश है।
ये नाम कैसे पड़ा
इस बारे में तस्वीर साफ नहीं है। खूनी पड़ने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। कहा जाता है कि आजादी से पहले जब अंग्रेज इस गांव में आए तो गांववालों ने उनका डटकर सामना किया। इस लड़ाई में खूब खून बहा। इसके बाद से गांव का नाम खूनी पड़ गया। हालांकि, इसका कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है।

