आर्मी अफसर के 1 साल के बेटे की मौत: बच्चे को 6 दिनों में 4 जिलों के 5 अस्पतालों में किया गया रेफर, CM धामी बोले- इलाज में लापरवाही हुई
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इलाज के लिए भटकता रहा 1 साल का मासूम शुभांशु जोशी
उत्तराखंड में सेना के अधिकारी के एक साल के बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्चे को 6 दिनों में 4 जिलों में 5 अस्पतालों में रेफर किया गया। मामला सामने आने के बाद जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इलाज में लापरवाही की बात मानी है।
दरअसल, चमोली के ग्वालदम का रहने वाले सेना अधिकारी के बेटे शुभांशु जोशी को डिहाईड्रेशन के लक्षण दिखने के बाद शुरूआती इलाज के लिए गांव के अस्पताल ले जाया गया। इलाज की व्यवस्था न होने के चलते उसे यहां से बागेश्वर, अलमोड़ा और फिर नैनीताल रेफर किया गया। 6 दिन बाद बच्चे की 16 जुलाई को हल्द्वानी अस्पताल में ICU में मौत हो गई।
CM धामी ने जताया दुख
शुभांशु की मौत पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी दुख जताया और इसे लापरवाही का मामला बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'बागेश्वर में एक मासूम बच्चे की इलाज में लापरवाही से मौत का समाचार अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है। अभी तक जो सूचना प्राप्त हुई है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरती गई है।'
सीएम ने कार्रवाई के निर्देश दिए
सीएम धामी ने कहा, 'इस अत्यंत संवेदनशील मामले को संज्ञान में लेते हुए कुमाऊं आयुक्त को तत्काल जांच के आदेश दिए गए हैं। इस मामले में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जनता के विश्वास और जीवन की रक्षा में कोई कोताही सहन नहीं की जाएगी।'
क्या है मामला
चमोली ग्वालदम के स्टाफ नारायण देवराड़ी ने बताया कि बच्चे के पिता 10 जुलाई को दोपहर 1.50 बजे इलाज के लिए पहुंचे थे। वह लगातार उल्टी कर रहा था और ब्रेस्टफीड भी नहीं कर पा रहा था। अस्पताल में बच्चों का डॉक्टर न होने की वजह से उसे 22 किलोमीटर दूर बागेश्वर के बैजनाथ में कॉम्युनिटी हेल्थ सेंटर रेफर किया गया।
बैजनाथ पहुंचने पर बच्चे का इलाज शुरु हुआ, लेकिन उसकी हालत और भी बिगड़ गई। इसके बाद उसे बागेश्वर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जो बैजनाथ से 20 किमी दूर था।
बैजनाथ कॉम्युनिटी हेल्थ सेंटर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि बच्चे के ब्रेन में ब्लड फ्लो होने में रुकावट आ रही थी, और पीडियाट्रिक ICU न होने की वजह से बच्चे को यहां से रेफर किया गया।
बागेश्वर जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था न होने की वजह से उसे 68 किलोमीटर दूर अलमोड़ा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर किया गया। यहां से बच्चे को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। जहां 16 जुलाई को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

