UPSC के 100 साल पूरे: लंदन से शुरू हुआ सफर, 1922 में भारत में पहली परीक्षा; जानिए कैसे बना देश का सबसे बड़ा भर्ती आयोग
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1922 में पहली बार ICS की परीक्षा भारत में की गई। AI-इमेज।
एजुकेशन डेस्क। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने 1 अक्टूबर को अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। 1926 में एक एडवाइजरी बॉडी के तौर पर शुरू हुआ यह संस्थान आज देश की प्रमुख भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करता है। इसके जरिए सिविल सर्विसेज से लेकर डिफेंस और इंजीनियरिंग सर्विसेज तक के लिए कैंडिडेट्स का सिलेक्शन किया जाता है।
UPSC के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में सेंटेनेरी प्रोग्राम हुआ। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान UPSC के सफर को तस्वीरों के जरिए दिखाया गया। प्रधानमंत्री ने कमीशन के स्टैंडर्ड और सिलेक्शन प्रोसेस की सराहना की। इस मौके पर उन्होंने एक कॉमेमोरेटिव कॉइन जारी किया और ‘हंड्रेड लैंडमार्क जजमेंट्स-शेपिंग द पॉलिसीज ऑफ UPSC एंड पब्लिक सर्विस कमीशन इन इंडिया’ किताब का विमोचन किया।
UPSC का सफर ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुआ था। उस समय सिविल सर्विस में भर्ती का प्रोसेस आज से काफी अलग था। परीक्षा लंदन में होती थी और इसमें शामिल होना भारतीय कैंडिडेट्स के लिए आसान नहीं था। बाद में परीक्षा भारत में भी शुरू हुई और पब्लिक सर्विस कमीशन में कई बदलाव आए। आइए, जानते हैं UPSC के 100 साल के सफर की कहानी...
1855 में शुरू हुई ICS परीक्षा
UPSC की कहानी समझने के लिए सबसे पहले इंडियन सिविल सर्विस (ICS) की शुरुआत को जानना जरूरी है। 1855 में ICS परीक्षा शुरू की गई। इससे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से नामांकन के आधार पर अफसरों की नियुक्ति होती थी। हालांकि, बाद में ओपन कॉम्पिटिटिव एग्जाम के जरिए कैंडिडेट्स का सिलेक्शन होने लगा है।
हालांकि, उस समय इंडियन कैंडिडेट्स के लिए इस एग्जाम में शामिल होना काफी मुश्किल था। परीक्षा सिर्फ लंदन में होती थी और अंग्रेजी मीडियम में होती थी। इसके अलावा ग्रीक और लैटिन जैसे सब्जेक्ट्स से भी सवाल पूछे जाते थे। ऐसे में इंडियन कैंडिडेट्स को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

सत्येन्द्रनाथ टैगोर बनेे पहले भारतीय सिविल सर्वेंट
ICS परीक्षा पास करने वाले पहले भारतीय सत्येंद्रनाथ टैगोर (Satyendranath Tagore) थे। वह 1862 में 21 साल की उम्र में परीक्षा देने के लिए कलकत्ता से इंग्लैंड गए। उन्होंने 1863 में परीक्षा पास की और 1864 में अपनी सर्विस शुरू की।
सत्येंद्रनाथ टैगोर ब्रिटिश शासन की उस सिविल सर्विस में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने, जिसे ब्रिटिश अधिकारी ‘हेवन बॉर्न सर्विस’ कहते थे। उनकी सफलता ने भारतीयों के लिए इस सर्विस में एंट्री का रास्ता खुल गया।

1922 में पहली बार भारत में हुई ICS परीक्षा
समय के साथ भारत में भी ICS परीक्षा आयोजित करने की मांग तेज हुई। राष्ट्रवादियों की मांग के बाद भर्ती में बदलाव का प्रोसेस शुरू हुआ। मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिफॉर्म्स के बाद बनाए गए भारत सरकार अधिनियम, 1919 में पब्लिक सर्विस कमीशन के गठन का प्रॉविजन किया गया।
इसके बाद 1922 में पहली बार ICS की परीक्षा भारत में हुई। यह परीक्षा इलाहाबाद में हुई। इसी साल लंदन में भी परीक्षा हुई थी। भारत में परीक्षा शुरू होने से यहां के कैंडिडेट्स के लिए ICS में शामिल होने का मौका ज्यादा मिलने लगा।
1926 में बनी पब्लिक सर्विस कमीशन
1 अक्टूबर 1926 को भारत में पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना हुई। इसी दिन से UPSC के 100 साल के सफर की शुरुआत मानी जाती है। शुरुआत में यह एक एडवाइजरी बॉडी थी। इसके चेयरमैन और मेंबर्स की अपॉइंटमेंट लंदन में भारत के लिए अपॉइंट किए गए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट करते थे।
समय के साथ कमीशन की जिम्मेदारियों और कामकाज में बदलाव होते गए। धीरे-धीरे यह एक इंडिपेंडेंट बॉडी के रूप में डेवलप हुआ। आज UPSC केंद्र सरकार की अलग-अलग सर्विसेज और पोस्ट के लिए भर्ती परीक्षाएं कराता है।
UPSC के जरिए किन पदों पर होती है भर्ती
आज UPSC कई अहम सेवाओं और पदों के लिए परीक्षाएं करवाता है। इनमें सिविल सर्विसेज परीक्षा के जरिए IAS, IPS और इंडियन फॉरेन सर्विस समेत कई सर्विसेज में भर्ती होती है। इसके अलावा इंडियन फॉरेस्ट सर्विस, इंजीनियरिंग सर्विसेज और कंबाइंड मेडिकल सर्विसेज के लिए भी परीक्षा की जाती है।
UPSC नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और नेवल एकेडमी के साथ कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की परीक्षाएं भी करवाता है। इसके अलावा सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज में असिस्टेंट कमांडेंट के पदों के लिए भी भर्ती परीक्षा होती है।
एक एडवाइजरी बॉडी से शुरू हुआ UPSC का सफर आज देश की कई अहम सर्विसेज में भर्ती तक पहुंच चुका है। 100 साल के इस सफर में परीक्षा करवाने और कमीशन की जिम्मेदारियों में बदलाव हुए हैं। इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी, लेकिन आज यह भारत में अहम सिविल सर्विसेज में नौकरी के लिए सबसे अहम और प्रतिष्ठित संस्थान है।

