केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों पर एक साल में 92 करोड़ खर्च: 2014-15 की तुलना में यह तीन गुना से ज्यादा; क्यों महंगी पड़ रही मरम्मत
Published:
3 min read

दिल्ली में मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
नेशनल डेस्क। दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों को मिले सरकारी बंगलों की मरम्मत और साज-सज्जा पर सरकार ने पिछले साल कितना पैसा खर्च किया? इसका जवाब चौंकाने वाला है। 2025-26 में इन सरकारी घरों पर 92.35 करोड़ रुपए खर्च हुए।
यह जानकारी सूचना के अधिकार यानी RTI के जरिए सामने आई है। इसके मुताबिक, इन घरों पर होने वाला खर्च 2014-15 के मुकाबले अब तीन गुना से भी ज्यादा हो गया है। सवाल है कि आखिर इन बंगलों पर इतना पैसा क्यों खर्च हो रहा है? क्या यह सिर्फ महंगाई का असर है या इन घरों की उम्र भी इसकी बड़ी वजह है?

क्या हर मंत्री के घर पर 1 करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ?
केंद्रीय कैबिनेट में 72 मंत्री और राज्य मंत्री हैं। ऐसे में 92.35 करोड़ रुपए का औसत निकालने पर एक मंत्री के सरकारी बंगले पर करीब 1.2 करोड़ रुपए खर्च बैठता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मंत्री के घर पर इतनी ही रकम खर्च हुई। किसी बंगले में मामूली मरम्मत की जरूरत होती है, जबकि किसी दूसरे घर में बड़े स्तर पर काम कराना पड़ सकता है। इसलिए अलग-अलग आवासों पर खर्च काफी अलग हो सकता है।
आखिर इन बंगलों पर इतना खर्च क्यों?
इसका सबसे बड़ा कारण इन सरकारी बंगलों की उम्र बताई जा रही है। दिल्ली के लुटियंस इलाके में बने कई सरकारी बंगले 80 से 100 साल पुराने हैं। इनमें से कई मकान 1912 से 1930 के बीच बनाए गए थे। इतने पुराने घरों में वक्त बीतने के साथ-साथ कई तरह की समस्याएं आना स्वाभाविक है।
CPWD अधिकारियों के मुताबिक इन घरों में अक्सर पानी का रिसाव, दीमक की समस्या, पुरानी पाइपलाइन, पुराने इलेक्ट्रिकल सिस्टम, फर्श की मरम्मत, बिजली के उपकरणों की मरम्मत, बाथरूम और प्लंबिंग से जुड़े काम कराने पड़ते हैं।
कुछ मामलों में इमारत की हालत इतनी खराब हो जाती है कि सिर्फ छोटी-मोटी मरम्मत से काम नहीं चलता और बड़े स्तर पर स्ट्रक्चरल चेंज करना पड़ता है।

इसके अलावा ये सामान्य छोटे मकान नहीं हैं। कई सरकारी बंगलों का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। इनके साथ बड़े लॉन, लंबे-चौड़े परिसर और स्टाफ क्वार्टर भी होते हैं। इसलिए एक छोटी प्रॉब्लम को ठीक करने में भी सामान्य घर के मुकाबले ज्यादा खर्च हो सकता है।
क्या पुराने बंगलों को बार-बार ठीक करना सही है?
लुटियंस दिल्ली की कई पुरानी इमारतों के भविष्य को लेकर लंबे वक्त से चर्चा होती रही है। सवाल यह है कि अगर किसी इमारत में हर साल में बड़े पैमाने पर पैसा लगाना पड़े, तो क्या उसे बार-बार ठीक करना बेहतर है या फिर उसे नए तरीके से बनाया जाए?
शहरी योजना से जुड़े अधिकारियों के स्तर पर भी कुछ पुरानी इमारतों को आगे चलकर फिर से डेवलप करने या उनकी जगह नया कंस्ट्रक्शन बनाने पर विचार होता रहा है। हालांकि फिलहाल CPWD इन सरकारी आवासों की देखभाल और मरम्मत का काम जारी रखे हुए है।
यह भी पढ़ें...

