2020 के दिल्ली दंगे: उमर खालिद, शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया
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उमर खालिद पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है। (PTI)
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 में राजधानी में हुए दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद, सरजील इमाम और अन्य को जमानत देने से इनकार कर दिया। उमर और सरजील पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। फरवरी 2020 में हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने कहा- सभी अपीलें खारिज की जाती हैं। हाई कोर्ट ने इन जमानत याचिकाओं पर 9 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था।
इन 7 आरोपियों की भी जमानत याचिका रद्द
कोर्ट ने सात अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH) के संस्थापक खालिद सैफी, अथर खान, मोहम्मद सलीम, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर और शदाब अहमद की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
दिल्ली हाई कोर्ट की एक अन्य बेंच जिसमें जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर ने इसी केस में आरोपी तसलीम अहमद को जमानत देने से इनकार कर दिया।
दंगों में हुई थी 53 लोगों की मौत
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी 2020 को हिंसा भड़क गई थी, जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ और समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। इस मामले में आरोपियों ने निचली अदालत से जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद हाई कोर्ट का रुख किया था।
'4 साल से हिरासत में हैं आरोपी'
आरोपी पक्ष ने दलील दी थी कि वे पहले ही 4 साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, और मुकदमे की धीमी गति की वजह से उनका लंबे समय तक जेल में रहना गलत है। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिन बाकी आरोपियों नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तन्हा को हाई कोर्ट ने 2021 में जमानत दी थी, इस आधार पर उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए।
वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने जमानत का विरोध किया। उनका कहना था कि 2020 के दंगे अचानक नहीं हुए, बल्कि एक प्री-प्लान और सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे, जो एक तय तारीख, समय और स्थान पर अंजाम दी गई। ताकि देश को धार्मिक आधार पर बांटने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को शर्मशार करने का मकसद पूरा किया जा सके।

