म्युनिसिपल इलेक्शन साथ लड़ेंगे ठाकरे ब्रदर्स: राउत बोले- आपसी ताकत से चुनाव जीतेंगे; 20 साल बाद उद्धव-राज ने मिलाया हाथ
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5 जुलाई को उद्धव-राज ठाकरे 20 साल बाद एक मंच पर दिखे थे।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS आने वाला म्युनिसिपल इलेक्शन साथ लड़ेंगी। इसका ऐलान शिवसेना (UBT) नेता और सांसद संजय राउत ने किया। ये दोनों पार्टियां मुंबई के अलावा नासिक, थाणे, कल्याण-डोंबिवली और सूबे के दूसरे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलेक्शन साथ लड़ेंगी। उद्धव और राज गठबंधन करने वाले हैं, इसका अनुमान तभी लग गया था कि जब दोनों भाई भाषा विवाद मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ आए थे।
आपसी ताकत से चुनाव जीतेंगे- राउत
संजय राउत ने कहा- उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मिलकर नगरपालिका चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। उनकी आपसी ताकत और मराठी लोगों की एकजुटता ही चुनाव में जीत का मार्ग तय करेगी।
4 नगर निगमों में दोनों पार्टियों की वर्तमान स्थिति
BMC- 227 सीटें
- शिवसेना UBT- 90 सीटें
- MNS- 1
ठाणे-131 सीटें
- शिवसेना: 67 सीटें
- MNS: 0 सीट
कल्याण-डोंबिवली- 122 सीटें
- शिवसेना UBT- 52 सीटें
- MNS- 9 सीटें
नासिक-122 सीटें
- शिवसेना UBT- 35 सीटें
- MNS- 5 सीटें
20 साल बाद साथ आए थे ठाकरे ब्रदर्स
5 जुलाई को उद्धव और राज ने 20 साल बाद स्टेज शेयर किया था। उन्होंने कहा कि हम दोनों मराठी और महाराष्ट्र को बचाने के लिए साथ आए हैं। BJP जबरदस्ती हिंदी थोपकर मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती है। ऐसा हम होने नहीं देंगे। राज ने तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र CM देवेंद्र फड़णवीस ने उन्हें और उद्धव को साथ ला दिया। ये काम तो बालासाहब भी नहीं कर पाए थे। उद्धव ने तभी इशारा कर दिया था कि वे और राज, राजनीति में भी साथ आ सकते हैं।
20 साल पहले दोनों के रास्ते अलग हो गए थे
राज ठाकरे 2005 तक बालासाहब की शिवसेना का हिस्सा थे। उचित सम्मान न मिलने की वजह से उन्होंने 2005 में ही शिवसेना छोड़ दी थी। पार्टी में नेतृत्व को लेकर उनके और उद्धव ठाकरे के बीच मतभेद बढ़ गए थे। पार्टी की जिम्मेदारियां धीरे-धीरे उद्धव को मिलती गईं, जिससे राज नाराज हो गए।
राज ने कई बार कबूला है कि उन्होंने सम्मान मांगा, लेकिन बदले में अपमान मिला। आखिरकार, मार्च 2006 में उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) नाम से नई पार्टी बना ली।
खोई जमीन वापस पाने की कोशिश
वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो दोनों पार्टियों की जमीन कमजोर होती दिख रही है। 2024 विधानसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन बहुत खराब रहा। शिवसेना (UBT) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं, जबकि MNS का खाता भी नहीं खुला। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दोनों भाई इसी बहाने अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना चाहते हैं।
महाराष्ट्र में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलेक्शन काफी मायने रखते हैं। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी BMC का ही उदाहरण ले लीजिए। यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे अमीर नगर निगम है। इसका सालाना बजट कई छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा होता है।

