तिरुपति में AI रोबोट डॉग: जंगली जानवरों से श्रद्धालुओं को मिलेगी सुरक्षा; जानिए क्या हैं फीचर
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इस रोबोटिक यूनिट में खास तरह के साउंड और लाइट सिस्टम भी लगे हैं, जिससे लोगों की जानवरों से सुरक्षा हो सकेगी। (ai image)
नेशनल डेस्क. तिरुपति बालाजी में जंगली जानवरों की एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए AI-पावर्ड रोबोटिक डॉग्स का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे तिरुमाला की पहाड़ियों के घने जंगलों से होकर निकलने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ सके। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के सीनियर अधिकारी वेंकैया चौधरी ने श्री पद्मावती गेस्ट हाउस में रोबोट डॉग का इन्पेक्शन किया, ताकि घने जंगलों वाले इलाकों में उसे तैनात करने की तैयारी का जायजा लिया जा सके।
तिरुपति के जंगलों में AI-आधारित निगरानी
खराब रास्ते और खतरनाक इलाकों में चलने के लिए डिजाइन की गई रोबोटिक यूनिट एडवांस्ड सर्विलांस और मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी से लैस है। यह रोबोटिक्स डॉग ऐसे इलाकों में काम कर सकेंगे, जहां इंसानों के लिए पैदल चलना मुश्किल होता है। इस रोबोटिक डॉग में 360-डिग्री LiDAR, ऑप्टिकल और थर्मल कैमरे लगे हैं, जिससे यह पूरी तरह अंधेरे और कोहरे जैसे अलग-अलग मौसम में भी काम कर सकता है।
लाइव स्ट्रीमिंग भी करेगा रोबोट
इसका AI सिस्टम रियल टाइम में चीजों की पहचान कर सकता है और इंसानों, जंगली जानवरों, पालतू जानवरों और गाड़ियों के बीच फर्क कर सकता है। यह यूनिट फुटेज की लाइव-स्ट्रीमिंग भी कर सकती है और सेंट्रल कंट्रोल रूम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को जियो-टैग किए गए अलर्ट भेज सकती है।

वाइल्ड एनिमल की रियल-टाइम ट्रैकिंग
दरअसल, अलीपिरी-तिरुमाला ट्रेकिंग रूट तेंदुए जैसे जंगली जानवर होते हैं। AI-पावर्ड सिस्टम संभावित खतरों की पहचान कर सकता है। किसी संभावित खतरे का पते चलता है, तो रोबोटिक डॉग लाइव थर्मल वीडियो फीड भेज सकता है और जियो-टैग किए गए अलर्ट जारी कर सकता है, जिससे अधिकारी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स यूनिट स्थिति पर नजर रख सकेंगे और तेजी से कार्रवाई कर सकेंगे।
इस रोबोटिक यूनिट में खास तरह के साउंड और लाइट सिस्टम भी लगे हैं, जिनका मकसद जंगली जानवरों को बिना किसी शारीरिक नुकसान पहुंचाए तीर्थयात्रियों के रास्तों से दूर भगाना है।
फॉरेस्ट गार्ड्स की मदद के लिए रोबोटिक डॉग्स
अधिकारियों ने कहा- यह रोबोटिक डॉग्स का फॉरेस्ट गार्ड्स की जगह नहीं लेंगे। रोबोटिक सिस्टम से थर्मल और डेटा फॉरेस्ट कर्मचारियों को जानवरों की आवाजाही के पैटर्न देखसकेगा। जिससे जानवरों की आवाजाही का मैप बनाया जा सकेगा। गार्ड्स को जोखिम वाले इलाकों में गश्त को बेहतर बनाने में मदद मिल सकेगी।

