बाघों को शिकारियों से खतरा: श्योपुर से जब्त हड्डियाें की पहचान हुई, 3 बाघ और एक तेंदुआ मारे गए थे
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मध्य प्रदेश के श्योपुर से जब्त की गई हड्डियां । DNA सैम्पलिंग के बाद यह साफ हो गया कि ये हड्डियां 3 बाघ और एक तेंदुए की हैं।
मध्य प्रदेश के श्योपुर से 5 जून को कथित तौर पर जंगली हड्डियां बरामद की गईं थीं। इनकी DNA सैंपलिंग कराई गई। अब राष्ट्रीय जैविक विज्ञान केंद्र (NCBS) बेंगलुरु ने बताया है कि बरामद की गईं हड्डियां तीन बाघ और एक तेंदुए की थीं।
राजस्थान वन विभाग और सवाई माधोपुर के NGO टाइगरवॉच के साथ मध्य प्रदेश के राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने 5 जून को खोपड़ियों और हड्डियों के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया था।
रणथंभौर के बाघों के शिकार की आशंका
श्योपुर से बरामद हड्डियां रणथंभौर के बाघों की हो सकती हैं। दरअसल, श्योपुर से रणथंभौर सिर्फ 30 किलोमीटर है। वहीं दूसरे टाइगर रिजर्व की बात करें तो यह ज्यादा दूर हैं। मसलन माधव टाइगर रिजर्व करीब 100 दूर है। इसके अलावा यह नया टाइगर रिजर्व है और इसमें सिर्फ 5 बाघ ही हैं।
मध्य प्रदेश के एक फॉरेस्ट अफसर के मुताबिक- पन्ना टाइगर रिजर्व तीसरा सबसे नजदीक टाइगर रिजर्व है। कभी-कभी यहां से चंबल की तरफ जाते हुए बाघों की आवाजाही देखी गई है। लेकिन यह भी 250 किमी. दूर है। इसलिए हमें लगता है कि जो हड्डियां मिली हैं वह रणथंभौर के बाघों की होंगी।
DNA एनालिसिस से कुछ और बातें पता लगेंगी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु के एक फॉरेस्ट अफसर ने कहा- NCBS बाघों के डीएनए का मिलान कर रहा है। इसके बाद ही यह तय होगा कि बाघ कहां से आए थे, पन्ना या रणथंभौर। इस प्रॉसेस में तीन हफ्ते लग सकते हैं।
रणथंभौर के फील्ड डायरेक्टर केआर अनूप ने राजस्थान के चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन को 24 जून को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसके मुताबिक, बरामद की गई हड्डियों की जांच के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के फॉरेस्ट अफसरों की ज्वॉइंट टीम काम कर रही है।
शिकारियों ने 5 बाघों का शिकार कबूला
गिरफ्तार आरोपी पारंपरिक शिकारी बताए गए हैं। पूछताछ के दौरान इन्हाेंने माना कि 2002 से 2004 के बीच उन्होंने रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पांच बाघों का शिकार किया था।

