20 साल बाद ठाकरे ब्रदर्स मंच पर साथ दिखेंगे: ‘विजय रैली’ को संबोधित करेंगे; हिंदी को अनिवार्य करने वाला फैसला वापस, दोनों नेता इसे अपनी जीत बता रहे
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उद्धव (बाएं) और राज (दाएं)।
आज यानी शनिवार को दो दशक बाद ठाकरे ब्रदर्स एक साथ स्टेज शेयर करते दिखेंगे। उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे मुंबई की वर्ली स्थित नेशनल स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में ‘विजय रैली ’ का हिस्सा होंगे।
महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य करने का आदेश दिया था। विवाद होने पर फैसला वापस ले लिया। उद्धव और राज ठाकरे, सरकार के इस फैसले को अपनी जीत बता रहे हैं। इसी वजह से साझा तौर पर रैली कर रहे हैं।
20 साल पहले मंच पर साथ दिखे थे ठाकरे ब्रदर्स
उद्धव और राज ठाकरे ने 2005 में आखिरी बार मंच साझा किया था। उस वक्त राज भी शिवसेना का हिस्सा थे। उचित सम्मान न मिलने की वजह से उन्होंने 2005 में ही शिवसेना छोड़ दी थी। पार्टी में नेतृत्व को लेकर उनके और उद्धव ठाकरे के बीच मतभेद बढ़ गए थे। पार्टी की जिम्मेदारियां धीरे-धीरे उद्धव को मिलती गईं, जिससे राज नाराज हो गए।
राज ने कई बार कबूला है कि उन्होंने सम्मान मांगा, लेकिन बदले में अपमान मिला। आखिरकार, मार्च 2006 में उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से नई पार्टी बना ली।

महाराष्ट्र सरकार ने हिंदी को अनिवार्य करने वाला फैसला वापस लिया
ठाकरे ब्रदर्स 20 साल बाद एक मंच पर क्यों आ रहे हैं? दरअसल, 16 अप्रैल को फडणवीस सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत राज्य के मराठी और इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में क्लास 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया गया था। आदेश के मुताबिक, स्कूलों में तीन भाषाएं पढ़ाई जानी थीं। पहली मराठी, दूसरी अंग्रेजी और तीसरी हिंदी।
इस फैसले के बाद शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विरोध के चलते सरकार ने 17 जून को संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें हिंदी को अनिवार्य की जगह वैकल्पिक बना दिया। इसके बाद भी विरोध कब नहीं हुआ। 29 जून को राज्य सरकार ने इस नीति को रद्द करते हुए पूरा आदेश ही वापस ले लिया।
ठाकरे ब्रदर्स ने ऐलान किया था कि वे हिंदी को अनिवार्य करने वाले फैसले के विरोध में रैली करेंगे, हालांकि इससे पहले ही सरकार ने फैसला वापस ले लिया। अब दोनों ठाकरे भाई इसे अपनी जीत बता रहे हैं।

खोई जमीन वापस पाने की कोशिश
शिवसेना (UBT) और MNS दोनों ने यह तय किया है कि वे इस कार्यक्रम में अपनी पार्टी का झंडा, बैनर, चुनाव चिन्ह या होर्डिंग्स इस्तेमाल नहीं करेंगे।
वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालें तो दोनों पार्टियों की जमीन कमजोर होती दिख रही है। 2024 विधानसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन बहुत खराब रहा। शिवसेना (UBT) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं, जबकि MNS का खाता भी नहीं खुला। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दोनों भाई इसी बहाने अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।

