सुप्रीम कोर्ट ने पूछा – क्या हमें भी अमेरिका जैसी दीवार बनानी चाहिए: बंगाली बोलने वाले मजदूरों को हिरासत में लेने पर फटकार लगाई; केंद्र से 7 दिन के अंदर जवाब मांगा
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सॉलिसिटर जनरल ने SC में कहा कि सरकार अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर गंभीर है ताकि वे देश के संसाधनों का गलत इस्तेमाल न करें।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अवैध प्रवासियों पर दायर याचिका पर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि क्या हमें भी अमेरिका की तरह दीवार बनाकर बांग्लादेश से घुसपैठ रोकनी चाहिए? याचिका में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल और कुछ राज्यों में बंगाली भाषा बोलने वाले मुस्लिम प्रवासी मजदूरों को बिना नागरिकता जांचे ही बांग्लादेशी मानकर हिरासत में लिया जा रहा है, और कुछ को जबरन भारत से बाहर भेज दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा है कि अवैध प्रवासियों (illegal migrants) को रोकने और वापस भेजने के लिए कौन-कौन से नियम (SOP) लागू किए जा रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या हमें भी अमेरिका की तरह दीवार बनाकर बांग्लादेश से घुसपैठ रोकनी चाहिए?
जस्टिस सूर्य कांत, जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने अवैध प्रवासियों पर दायर याचिका पर सुनवाई की।
एक हफ्ते में मांगा जवाब
कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। कोर्ट ने एक आवेदन के आधार पर गुजरात को भी पार्टी बनाया है। जिसमें राज्य को भी इस आधार पर पक्षकार बनाने की मांग की गई कि गुजरात के अधिकारियों द्वारा भी इसी तरह लोगों को उठाया और बाहर धकेला जा रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
- क्या केवल किसी भाषा (जैसे बंगाली) बोलने के आधार पर किसी को विदेशी माना जा सकता है?
- अगर कोई इंटरनेशनल बॉर्डर पार करते समय पकड़ा जाए, तो सुरक्षा बल उसे वापस भेज सकते हैं।
- जो पहले ही भारतीय सीमा में आ चुका है। इस केस कुछ प्रक्रिया पालन करने की जरुरत है।
सॉलिसिटर जनरल की दलील
- सरकार अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर गंभीर है ताकि वे देश के संसाधनों का गलत इस्तेमाल न करें।
- कोर्ट को संगठन की किसी दायर याचिका की बजाय किसी पीड़ित व्यक्ति का पक्ष सुनना चाहिए।
- पीड़ित व्यक्ति कोर्ट नहीं आ सकते, क्योंकि उन्हें भारत में अपनी कानूनी उपस्थिति को सही ठहराना होगा।
कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिसमें दावा किया गया था कि बंगाली भाषी प्रवासी श्रमिकों को बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया जा रहा है। कोर्ट ने हाईकोर्ट से भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति का मामला उनके पास लंबित है, तो वे तुरंत उसकी सुनवाई करें और फैसला लें।

