सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रोटेस्ट पर 5 सदस्यों की कमेटी बनाई: पूर्व जज आर सुभाष रेड्डी लीड करेंगे; प्रदर्शनकारियों पर पुलिस एक्शन की जांच करेगी
Published:
3 min read

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (ANI)
नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षाबलों के एक्शन की जांच के लिए 5 सदस्यों की कमेटी का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी इसकी अध्यक्षता करेंगे। कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शालिन्दर कौर, पूर्व CBI डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एल आर बिश्नोई को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के कथित बल प्रयोग करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 18 अगस्त को ये आदेश दिया था। इस आदेश को गुरुवार को अपलोड किया गया। याचिका में SIT या CBI जांच की मांग की गई थी।
जांच में सहयोग करे पुलिस और एजेंसियां
बेंच ने दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे कमेटी को जांच में सहयोग करें और स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान के सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, वीडियोग्राफी उपलब्ध कराएं। कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में एजेंसियों और पुलिस को इन सभी सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान उपद्रव हुआ था
NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन किया था। इसी दौरान 20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च बुलाया था। मार्च के दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पुलिस पर लाठीचार्ज करने, पेलेट गन का इस्तेमाल करने और आंसू गैस के गोले दागने जैसे आरोप लगे। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों में CBI या SIT जांच के आदेश देने की मांग की गई है।
पुलिस ने कहा- ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं हुआ
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इन याचिकाओं के जवाब में हलफनामा दाखिल किया है। दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोपों से इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शन में 30 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे और बैरिकेड तोड़े जाने के बाद हालात बिगड़ने पर पुलिस को चरणबद्ध तरीके से बल प्रयोग करना पड़ा।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं करीब 200 प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं। पुलिस का दावा है कि भीड़ में कुछ असामाजिक तत्व और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग भी घुस आए थे, जिससे स्थिति और बिगड़ी।

