थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: फिर से विचार करने को कहा; इंग्लिश को विदेशी भाषा की कैटेगिरी में रखने पर सवाल
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नए फॉर्मूले के तहत, CBSE के 6वीं से 10वीं क्लास तक के छात्रों को 3 लैंग्वेज पढ़नी होंगी। इसमें दो लैंग्वेज भारतीय होनी चाहिए। (AI इमेज)
नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और CBSE से कहा- वे इस साल छठी और नौवीं क्लास में लागू किए गए 3 लैंग्वेज फॉर्मूले पर फिर से विचार करें। साथ ही कोर्ट ने अंग्रेजी को नॉन नेटिव लैंग्वेज मानने के तर्क पर भी सवाल उठाए।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा- जिस लैंग्वेज की देश में गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं, उसे इंडिजिनियस लैंग्वेज माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अगर शुरुआत 6वीं क्लास से होनी है, तो इस साल 6वीं क्लास के छात्रों को इससे छूट देने पर विचार करें। आप इसे अगले साल से लागू करने के बारे में सोच सकते हैं।
3 लैंग्वेज फॉर्मूला क्या है
नए फॉर्मूले के तहत CBSE के 6वीं से 10वीं क्लास तक के छात्रों को 3 लैंग्वेज पढ़नी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
पहले, क्लास 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स को सिर्फ दो भाषाएं सीखनी होती थीं। जिनमें से कई इंग्लिश समेत दो विदेशी भाषाएं चुनते थे। जबकि क्लास 6-8 के स्टूडेंट्स 3 भाषाएं सीखते थे, और उनमें से भी कई दो विदेशी भाषाएं चुनते थे।
स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके इस पॉलिसी को अव्यावहारिक और तनावपूर्ण बताया है, खासकर क्लास 9वीं और 10वीं के उन स्टूडेंट्स के लिए जो बोर्ड एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने इंग्लिश को विदेशी भाषा की कैटेगिरी में रखने पर भी सवाल उठाए हैं।
जस्टिस बागची ने कहा- हमें यह देखना होगा कि किस हद तक अंग्रेजी को नॉन इंडीजिनियस लैंग्वेज माना जा सकता है। व्यक्तिगत रूप से मुझे नेटिव शब्द पर गंभीर आपत्ति है। इसमें कोलोनियल भाव झलकता है। इसके बजाय इंडिजिनस शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए।
जस्टिस बागची ने कहा- अंग्रेजी को नेटिव भाषा माना जाए या विदेशी, यह सवाल गहरे संवैधानिक मुद्दे खड़े करता है, खासकर इसलिए क्योंकि कई राज्यों में अंग्रेजी एक आधिकारिक भाषा है।
4 हफ्ते बाद होगी सुनवाई
इससे पहले SC ने केंद्र और CBSE को नोटिस जारी किए थे, लेकिन 3 लैंग्वेज फॉर्मूले वाले आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, बेंच ने कहा- किसी भी नई स्कीम या पॉलिसी को लेकर आम तौर पर कुछ आशंकाएं होती हैं, लेकिन सही तरीके से सोच-समझकर उनको दूर किया जा सकता है। अब इस मामले की सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी गई है।

