स्टूडेंट्स पर कोई एक्शन न हो: अनशन तोड़ने के लिए वांगचुक की नई शर्त; बोले- सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार को तैयार
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सोनम वांगचुक 25 दिनों से अनशन पर हैं। शुरुआती 20 दिन वह जंतर-मंतर पर रहे। बीते 5 दिनों से वह हॉस्पिटल में हैं।
नेशनल डेस्क। क्लाइमेट एक्टिविस्ट और सोशल वर्कर सोनम वांगचुक ने दावा किया है कि मोदी सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार करने के लिए तैयार हो गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि NEET पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले बच्चों की फैमिली को भी मुआवजा देने पर केन्द्र सरकार विचार करेगी। सरकार की ओर से यह जानकारी केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने वांगचुक को दी।
हालांकि वांगचुक अब भी अनशन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने इन दोनों केन्द्रीय मंत्रियों के सामने एक नई शर्त रख दी है। उन्होंने कहा है कि प्रोटेस्ट में शामिल किसी भी स्टूडेंट पर कार्रवाई न करने का आश्वासन मिले, तभी वह अपना अनशन खत्म करेंगे।
सरकार ने किन मांगों पर सहमति जताई?
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक लेटर पोस्ट किया है। यह जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम पर है। इसमें वांगचुक लिखते हैं- आप दोनों ने मुझे बताया कि सरकार NEET पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने, संसद में पूरे मामले पर चर्चा करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार करेगी। वांगचुक ने लिखा कि सरकार की ओर से मिले इन आश्वासनों के बावजूद वह अभी अनशन खत्म नहीं करेंगे।

वांगचुक ने क्या नई शर्त रखी?
लेटर में उन्होंने लिखा कि सरकार को यह भरोसा देना होगा कि 'चलो संसद' आंदोलन में शामिल किसी भी युवा या छात्र प्रदर्शनकारी पर कोई कानूनी, दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। वांगचुक ने लिखा कि इन युवाओं का एकमात्र अपराध निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना था।
वांगचुक ने कहा कि अगर सरकार यह आश्वासन देती है तो वह फौरन अपना अनशन समाप्त कर देंगे। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि आगे आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
सांसदों का भी जिक्र
वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात के साथ ही अलग-अलग राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या मिलकर अनशन खत्म करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह अनशन खत्म कर फिर से देश और छात्रों के लिए काम जारी रखना चाहते हैं, लेकिन युवाओं के हितों से समझौता करके ऐसा नहीं कर सकते।
वांगचुक ने यह भी लिखा कि लोकतंत्र की असली परीक्षा इस बात से होती है कि वह अपने साहस के साथ आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने सरकार से छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील भी की।
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